Amplifier Feedback | Types Working Principle and Importance in Electronic Circuits

ऑडियो, रेडियो या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में सिग्नल को बढ़ाने के लिए जिस यंत्र का प्रयोग किया जाता है उसे एम्प्लीफायर (Amplifier) कहा जाता है। लेकिन किसी एम्प्लीफायर की कार्यक्षमता केवल उसके गेन (Gain) पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसमें प्रयुक्त फीडबैक तंत्र (Feedback Mechanism) पर भी आधारित होती है। फीडबैक एम्प्लीफायर के प्रदर्शन, स्थिरता, और सिग्नल की गुणवत्ता में सुधार लाने का एक प्रभावी तरीका है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि एम्प्लीफायर फीडबैक क्या है, यह कैसे कार्य करता है, और इसके प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं।


एम्प्लीफायर फीडबैक क्या है और यह कैसे कार्य करता है?

1. Amplifier Feedback किसे कहते हैं?

एम्प्लीफायर फीडबैक (Amplifier Feedback) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एम्प्लीफायर के आउटपुट सिग्नल का एक भाग उसके इनपुट सर्किट में वापस भेजा जाता है। इस वापस भेजे गए सिग्नल को ‘Feedback Signal’ कहा जाता है। यह सिग्नल इनपुट सिग्नल के साथ मिलकर एम्प्लीफायर के समग्र आउटपुट का निर्धारण करता है। फीडबैक के प्रयोग से एम्प्लीफायर का Gain नियंत्रण, Distortion में कमी और स्थिरता में वृद्धि होती है।

2. Amplifier Feedback का कार्य सिद्धांत

फीडबैक सिस्टम इस सिद्धांत पर आधारित है कि यदि आउटपुट सिग्नल का कोई हिस्सा इनपुट में वापस जोड़ा जाए, तो सर्किट की कार्य दक्षता बदल जाती है। जब यह वापस भेजा गया सिग्नल इनपुट सिग्नल के समान फेज़ में होता है, तो यह आउटपुट को और बढ़ा देता है (Positive Feedback)। जबकि यदि यह सिग्नल इनपुट के विपरीत फेज़ में हो, तो यह आउटपुट को कम करता है (Negative Feedback)। इन दोनों प्रकार के फीडबैक का उपयोग भिन्न-भिन्न अनुप्रयोगों में अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

3. एम्प्लीफायर फीडबैक का महत्व

फीडबैक का प्रयोग एम्प्लीफायर को अधिक स्थिर, प्रवर्धन में नियंत्रित, और आउटपुट को शुद्ध बनाने के लिए किया जाता है। बिना फीडबैक के एम्प्लीफायर अस्थिर हो सकता है, शोर (Noise) एवं डिस्टॉर्शन (Distortion) अधिक होती है। फीडबैक के उचित उपयोग से एम्प्लीफायर के आउटपुट में सुधार किया जा सकता है, उसकी स्थिरता बढ़ाई जा सकती है और आवृत्ति प्रतिक्रिया (Frequency Response) को भी समायोजित किया जा सकता है।


एम्प्लीफायर फीडबैक के प्रमुख प्रकार व उनका विवरण

1. Amplifier Feedback के प्रकार

मुख्य रूप से फीडबैक को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया जाता है –

  1. सकारात्मक फीडबैक (Positive Feedback / Regenerative Feedback)
  2. नकारात्मक फीडबैक (Negative Feedback / Degenerative Feedback)

इन दोनों के अतिरिक्त, फीडबैक को सिग्नल की मात्रा के आधार पर भी विभाजित किया जा सकता है जैसे – Voltage Feedback Amplifier और Current Feedback Amplifier। आइए अब इन प्रकारों के बारे में विस्तार से जानें।


2. Positive Feedback / Regenerative Feedback (सकारात्मक प्रतिक्रिया)

सकारात्मक फीडबैक वह स्थिति है जब आउटपुट सिग्नल का जो भाग इनपुट में वापस भेजा जा रहा है, वह इनपुट सिग्नल के समान फेज़ में होता है। इस कारण इनपुट सिग्नल की प्रभावी शक्ति बढ़ जाती है, जिससे एम्प्लीफायर का गेन (Gain) और बढ़ जाता है।

सकारात्मक फीडबैक अमूमन ऑस्सिलेटर सर्किट (Oscillator Circuits) में प्रयुक्त होता है, जहां निरंतर तरंग उत्पन्न करने की आवश्यकता होती है। हालांकि यह एम्प्लीफायर के लिए हमेशा उपयोगी नहीं होता क्योंकि इससे सर्किट की स्थिरता कम हो सकती है।

यदि Positive Feedback का अधिक मात्रा में उपयोग किया जाए तो एम्प्लीफायर स्वयं बेकाबू होकर ऑस्सिलेशन में चला जाता है। इसलिए इसका प्रयोग बड़े ध्यान और सीमित प्रतिशत में किया जाता है।

जब फीडबैक वोल्टेज या करंट इनपुट सिगनल के इन फेस होता है तो वह पॉजिटिव या रिजैनेरेटिव फीडबैक कहलाता है पॉजिटिव फीडबैक एमप्लीफायर के परिणाम में वृद्धि कर देता है

यदि, इनपुट सिगनल वोल्टेज = Es
आउटपुट वोल्टेज = Eo
फीडबैक वोल्टेज = Ef
आउटपुट वोल्टेज का एक अंश = β
एंपलीफायर गेन = A
तो Ef = β . Eo
फीडबैक सहित कुल इनपुट वोल्टेज
Ei = Es +Ef
या, Ei = Es +β . Eo
या, Es = Ei -β . Eo
परंतु आउटपुट वोल्टेज, Eo = कुल इनपुट वोल्टेज x A
या, Eo = ( Es+β . Eo ) x A
अतः वोल्टेज गेन (VA) = Eo/Es
= A (Es +β. Eo )/Ei – β. Eo
= A [(Ei – β .Eo )+β . Eo]/Ei – β. Eo
= A.Ei/Ei[1 – β. Eo/Ei]
= A/[1 – β. Eo/Ei]
VA = A/[1- β. A] (∵ Eo/Ei = A)


3. Negative Feedback / Degenerative Feedback (नकारात्मक प्रतिक्रिया)

नकारात्मक फीडबैक में आउटपुट सिग्नल का जो भाग इनपुट में वापस भेजा जाता है, वह इनपुट सिग्नल के विपरीत फेज़ में होता है। इसका प्रभाव यह होता है कि आउटपुट सिग्नल का गेन घट जाता है लेकिन सर्किट की स्थिरता और Linear Response बढ़ जाती है।

Negative Feedback अधिकांश एम्प्लीफायरों में प्रयोग किया जाता है क्योंकि इससे Noise, Distortion, Temperature Drift और Gain Variation जैसी समस्याओं में कमी आती है। इसका मुख्य उद्देश्य बेहतर ध्वनि गुणवत्ता, स्थिरता और विश्वसनीयता प्राप्त करना होता है।

यदि उचित मात्रा में Negative Feedback लगाया जाए तो एम्प्लीफायर की Bandwidth भी बढ़ जाती है, जिससे यह अधिक विस्तृत आवृत्तियों को संभाल सकता है।


4. नेगेटिव फीडबैक के लाभ (Advantages of Negative Feedback)

  • Distortion में कमी: यह एम्प्लीफायर आउटपुट में उपस्थित अनावश्यक विकृति को घटाता है।
  • स्थिरता में वृद्धि: तापमान और पावर सप्लाई के बदलाव के बावजूद आउटपुट स्थिर रहता है।
  • विस्तारित Bandwidth: फीडबैक लगाने से एम्प्लीफायर अधिक Frequency Range संभाल पाता है।
  • आउटपुट शोर में कमी: आउटपुट की शुद्धता और स्पष्टता बढ़ती है।

इन सब कारणों से उच्च गुणवत्ता वाले ऑडियो सिस्टम, रेडियो रिसीवर और संचार उपकरणों में Negative Feedback प्रमुख भूमिका निभाता है।


5. ऋण फीडबैक एम्प्लीफायर परिपथ (Negative Feedback Amplifier Circuit)

ऋण फीडबैक एम्प्लीफायर में आउटपुट का एक निश्चित भाग रेजिस्टिव नेटवर्क या अन्य सर्किट माध्यम से इनपुट में भेजा जाता है। यह नेटवर्क तय करता है कि कितनी मात्रा में सिग्नल वापस जाएगा, जिसे Feedback Factor (β) कहा जाता है।

Negative Feedback Amplifier का कुल गेन सूत्र


V.A. = A/1-(-β.A)
V.A. = A/1+β.A


जहाँ (A) मूल गेन है और (A_f) फीडबैक के बाद का गेन है। इस समीकरण से स्पष्ट है कि फीडबैक लगने के बाद गेन घटता है पर स्थिरता बढ़ती है।

यह सर्किट आमतौर पर ऑडियो एम्प्लीफायर, ऑपरेशनल एम्प्लीफायर और सिग्नल प्रोसेसिंग मॉड्यूल्स में पाया जाता है।


6. वोल्टेज फीडबैक एम्प्लीफायर सर्किट (Voltage Feedback Amplifier Circuit)

इस प्रकार के एम्प्लीफायर में आउटपुट वोल्टेज का एक अंश इनपुट में वापस भेजा जाता है। इस फीडबैक के कारण इनपुट सिग्नल की संवेदनशीलता कम होती है और सर्किट स्थिर हो जाता है।

(Voltage Feedback Amplifier Circuit

वोल्टेज फीडबैक एम्प्लीफायर दो रूपों में वर्गीकृत किए जाते हैं:

  1. Series Voltage Feedback – जब आउटपुट वोल्टेज इनपुट के साथ सीरीज़ में जोड़ा जाता है।
  2. Shunt Voltage Feedback – जब आउटपुट वोल्टेज इनपुट के समानांतर जोड़ा जाता है।

यह कॉन्फ़िगरेशन High Input Impedance और Low Output Impedance प्रदान करता है, जो ऑडियो और वोल्टेज प्रवर्धन सर्किट के लिए उपयुक्त है।


7. करंट फीडबैक एम्प्लीफायर सर्किट (Current Feedback Amplifier Circuit)

करंट फीडबैक एम्प्लीफायर में आउटपुट करंट का एक भाग इनपुट में लौटाया जाता है। जब फीडबैक करंट इनपुट करंट के समान दिशा में होता है तो Positive Feedback और विपरीत दिशा में होने पर Negative Feedback प्राप्त होता है।

Current Feedback Amplifier Circuit

करंट फीडबैक दो प्रकार का होता है:

  1. Series Current Feedback
  2. Shunt Current Feedback

यह कॉन्फ़िगरेशन Low Input Impedance और High Output Impedance प्रदान करता है, जो पावर एम्प्लीफिकेशन के लिए उपयोगी है।


8. तुलना सारणी: Positive vs Negative Feedback

तुलना का आधारPositive Feedback (सकारात्मक)Negative Feedback (नकारात्मक)
फीडबैक सिग्नल का फेज़इनपुट के समान फेज़ में होता हैइनपुट के विपरीत फेज़ में होता है
एम्प्लीफायर गेन पर प्रभावगेन बढ़ता हैगेन घटता है
स्थिरता पर प्रभावस्थिरता घटती हैस्थिरता बढ़ती है
डिस्टॉर्शनबढ़ती हैघटती है
ऑस्सिलेशन का जोखिमअधिक होता हैनहीं होता
अनुप्रयोगऑस्सिलेटर सर्किटएम्प्लीफायर सर्किट

एम्प्लीफायर फीडबैक एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है जो किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के प्रदर्शन और गुणवत्ता को प्रभावित करती है। सही फीडबैक तकनीक के प्रयोग से न केवल गेन को नियंत्रित किया जा सकता है बल्कि सिग्नल की शुद्धता, स्थिरता और दक्षता में भी वृद्धि लाई जा सकती है।

Positive Feedback ऑस्सिलेशन उत्पन्न करने के लिए उपयुक्त है, वहीं Negative Feedback स्थिर और गुणवत्ता पूर्ण आउटपुट देने के लिए आवश्यक है। इसलिए एक कुशल इंजीनियर फीडबैक का चयन करते समय सर्किट की आवश्यकता, स्थिरता और प्रदर्शन को ध्यान में रखता है ताकि एम्प्लीफायर सर्वश्रेष्ठ परिणाम दे सके।

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