1st angle and 3rd Angle Projection आसान भाषा में

बेसिक समझ – Orthographic Projection क्या है?

किसी 3D ऑब्जेक्ट (त्रिआयामी वस्तु) को जब हम 2D (दो आयाम) में दिखाते हैं,
यानि उसकी लंबाई (Length), चौड़ाई (Width) और ऊँचाई (Height) को अलग-अलग दृश्यों (views) में दिखाते हैं,
तो उसे Orthographic Projection कहते हैं।

इसमें हम मुख्य रूप से 3 views बनाते हैं:

  1. Front View (सामने का दृश्य)
  2. Top View (ऊपर से दृश्य)
  3. Side View (बाएँ या दाएँ का दृश्य)

Principle Planes (मुख्य तल)

Principle Planes (मुख्य तल)

Orthographic projection में दो काल्पनिक plane माने जाते हैं:

  • Vertical Plane (VP) → जिस पर Front View बनती है।
  • Horizontal Plane (HP) → जिस पर Top View बनती है।

इन दोनों के बीच 90° का कोण होता है।
जब हम किसी ऑब्जेक्ट को इन planes के बीच रखते हैं, तो हमें अलग-अलग projection systems मिलते हैं।


Projection Systems के प्रकार

Projection Systems के प्रकार

मुख्य रूप से दो प्रकार के projection systems उपयोग किए जाते हैं:

  1. First Angle Projection (प्रथम कोण प्रक्षेपण)
  2. Third Angle Projection (तृतीय कोण प्रक्षेपण)

(Second और Fourth angle theoretically exist करते हैं पर प्रैक्टिकल में इस्तेमाल नहीं होते।)


1st Angle Projection (प्रथम कोण प्रक्षेपण)

🔹 Concept:

इसमें object को First Quadrant में रखा जाता है,
यानि कि object Vertical Plane और Horizontal Plane दोनों के सामने और ऊपर होता है।

Observer → Object → Plane

मतलब: देखने वाले की नज़र और ड्रॉइंग शीट के बीच object होता है


🔹 View Arrangement (दृश्यों की स्थिति):

View Typeकहाँ बनेगा (Drawing Sheet पर)
Front ViewCenter में (Vertical Plane पर)
Top ViewFront View के नीचे
Right Side ViewFront View के बाएँ

🔹 पहचान का Symbol:

पहचानने के लिए Truncated Cone Symbol (ISO Symbol) होता है —
इसमें बड़ा सर्कल बाएँ और छोटा सर्कल दाएँ होता है।
→ यह बताता है कि यह First Angle Projection है।


3rd Angle Projection (तृतीय कोण प्रक्षेपण)

🔹 Concept:

इसमें object को Third Quadrant में रखा जाता है,
यानि कि object Plane के पीछे और नीचे होता है।

Observer → Plane → Object

मतलब: देखने वाले की नज़र और ड्रॉइंग शीट के बीच plane होता है, और object उसके पीछे।


🔹 View Arrangement (दृश्यों की स्थिति):

View Typeकहाँ बनेगा (Drawing Sheet पर)
Front ViewCenter में
Top ViewFront View के ऊपर
Right Side ViewFront View के दाएँ

🔹 पहचान का Symbol:

उसी Truncated Cone Symbol में
बड़ा सर्कल दाएँ और छोटा सर्कल बाएँ होता है।
यह दर्शाता है कि यह Third Angle Projection है।


दोनों के बीच मुख्य अंतर (Difference Table)

विशेषता1st Angle Projection3rd Angle Projection
QuadrantFirst QuadrantThird Quadrant
View की स्थितिTop view नीचे बनती हैTop view ऊपर बनती है
Side view की स्थितिRight view बाएँ बनती हैRight view दाएँ बनती है
Object और Plane का संबंधObject Plane के सामनेObject Plane के पीछे
Rule Symbolबड़ा सर्कल बाएँबड़ा सर्कल दाएँ
Common inIndia, Europe (ISO standard)USA, Canada (ANSI standard)
Drawing sheet में देखने का तरीकाView उलट दिशा में रखे जाते हैंView उसी दिशा में रखे जाते हैं
Visualizationथोड़ा complexआसान और intuitive

How to Draw Step-by-Step (According to BIS/ISO Rule)

✳ Step 1: Draw Reference Line (XY Line)

Horizontal line बनाइए —
इसके ऊपर Front View और नीचे या ऊपर (projection system के अनुसार) Top View बनेगा।


✳ Step 2: Draw Front View

  • ऑब्जेक्ट को सामने से देखें।
  • इसकी ऊँचाई और चौड़ाई से Front View बनाइए।

✳ Step 3: Draw Top View

  • ऊपर से देखकर projection नीचे (1st angle) या ऊपर (3rd angle) ड्रॉ करें।
  • Projection lines (light thin lines) का उपयोग करें।

✳ Step 4: Draw Side View

  • Front View से 45° की projector line खींचें।
  • इससे Side View की ऊँचाई और चौड़ाई match करें।
  • Side View 1st angle में बाएँ, और 3rd angle में दाएँ बनेगा।

✳ Step 5: Dimensioning

  • Dimension lines parallel to view edges होनी चाहिए।
  • Use ISO/BIS dimensioning standard (SP 46:2003).

✳ Step 6: Projection Symbol

  • Right bottom corner में proper projection symbol डालें
    (यह बताता है कि drawing 1st angle है या 3rd angle)।

Professional Tips

✅ Always write projection type on title block —
“Projection: First Angle” or “Projection: Third Angle”

✅ Projection lines thin और construction lines faint रखें।
✅ Visible edges dark lines (thick continuous) से बनाएं।
✅ Hidden edges dashed lines से बनाएं।
✅ Center lines chain-dash से बनाएं।
✅ Always use proper scaling and labeling.


आसान याद रखने का तरीका

  • 1st Angle → Front के नीचे Top View
  • 3rd Angle → Front के ऊपर Top View
  • 1st Angle → Right View बाएँ
  • 3rd Angle → Right View दाएँ

👉 बस इतना याद रखिए, तो कभी गलती नहीं होगी।


निष्कर्ष (Conclusion)

बिंदुसारांश
Orthographic Projection3D ऑब्जेक्ट को 2D में दिखाने की तकनीक
1st Angle ProjectionISO/BIS Standard (India/Europe में प्रचलित)
3rd Angle ProjectionANSI Standard (USA/Canada में प्रचलित)
DifferenceTop और Side views की स्थिति में अंतर
Drawing RuleISO Symbol, Reference Line, Dimensions के अनुसार

Isometric और Orthographic Projection को आसान भाषा में

सबसे पहले समझो – ये दोनों क्या होते हैं

आइसोमेट्रिक प्रोजेक्शन (Isometric Projection) और ऑर्थोग्राफिक प्रोजेक्शन (Orthographic Projection) — दोनों ही तकनीकी ड्रॉइंग में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

  • आइसोमेट्रिक प्रोजेक्शन किसी वस्तु को तीन आयामों (3D) में दिखाता है, जहाँ तीनों अक्ष (X, Y, Z) समान कोण पर दिखाई देते हैं। यह ऑब्जेक्ट का वास्तविक आकार और रूप समझने में मदद करता है।
  • ऑर्थोग्राफिक प्रोजेक्शन वस्तु के विभिन्न दृश्य (2D Views) जैसे — Front View, Top View, Side View प्रस्तुत करता है, जिससे सटीक माप और निर्माण जानकारी मिलती है।

ड्रॉइंग बनाते समय कुछ सावधानियाँ ज़रूरी हैं — जैसे कोण सही रखना (30°)प्रोजेक्शन लाइनें समान रखनासही स्केल का उपयोग करना, और छिपी रेखाएँ (Hidden Lines) ठीक ढंग से दिखाना।

1. Isometric Projection (आइसोमेट्रिक प्रोजेक्शन)

यह एक 3D (त्रिआयामी) ड्राइंग होती है जिसमें किसी ऑब्जेक्ट को ऐसे दिखाया जाता है कि उसके तीनों साइड (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) बराबर रूप से दिखाई दें

Isometric Projection
  • इसमें तीन एक्सिस होती हैं:
    ➤ X-axis (30° दाएँ)
    ➤ Y-axis (30° बाएँ)
    ➤ Z-axis (ऊपर की ओर)

 इससे ऑब्जेक्ट थोड़ा झुका हुआ लगता है, और हम उसे 3D में “महसूस” कर सकते हैं।

2. Orthographic Projection (ऑर्थोग्राफिक प्रोजेक्शन)

यह 2D (दो आयामी) व्यू होता है। इसमें ऑब्जेक्ट के विभिन्न साइड को अलग-अलग दिखाया जाता है — जैसे:

  • Front View (सामने से)
  • Top View (ऊपर से)
  • Side View (बगल से)

 यह इंजीनियरिंग ड्रॉइंग या मशीन पार्ट्स बनाने में बहुत जरूरी होता है।

अब सीखो – इसे आसान तरीके से कैसे बनाएं

Isometric Projection आसान तरीका:

  1. सबसे पहले पेज पर 30° के दो लाइनें बनाओ (एक दाईं ओर, एक बाईं ओर)।
  2. बीच में एक वर्टिकल लाइन (ऊँचाई) बनाओ।
  3. अब अपने ऑब्जेक्ट के माप (length, width, height) के अनुसार लाइनें खींचो।
  4. सभी को जोड़ो — तुम्हारा ऑब्जेक्ट 3D दिखने लगेगा।
  5. अंदर की डिटेल दिखानी है तो faint lines (हल्की रेखाएँ) इस्तेमाल करो।

 टिप:

  • हमेशा 30° सेट स्केल का प्रयोग करो।
  • लाइनों को साफ और हल्का रखो ताकि गाइड लाइन्स मिटाई जा सकें।
  • पहले क्यूब या बॉक्स बनाना प्रैक्टिस करो, फिर कॉम्प्लेक्स शेप्स बनाओ।

Orthographic Projection आसान तरीका:

  1. एक सादा राइट-एंगल बॉक्स बनाओ (3 व्यूज़ के लिए जगह)।
  2. ऊपर की जगह में Top View, बीच में Front View, और साइड में Side View बनाओ।
  3. हर व्यू को एक-दूसरे से प्रोजेक्शन लाइन से जोड़ो।
  4. सब व्यूज़ को सही प्रपोर्शन में रखो।

टिप:

  • हर व्यू की लाइनें समान रूप से मिलनी चाहिए।
  • Hidden lines (डॉटेड) से अंदर के हिस्से दिखाओ।
  • पहले हमेशा Front View से शुरू करो, फिर Top और Side बनाओ।

याद रखने योग्य बातें:

  • Isometric = 3D Look
  • Orthographic = Real technical drawing
  • Isometric को समझना आसान, Orthographic से माप निकालना आसान
  • Practice is key  – रोज़ 1-2 ड्रॉइंग बनाओ

 Isometric और Orthographic Projection बनाते समय ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण सावधानियाँ (Precautions) दी गई हैं 👇

आइसोमेट्रिक प्रोजेक्शन (Isometric Projection) बनाते समय सावधानियाँ:

  1. कोण सही रखें (30°): हमेशा सेट स्क्वेयर या ड्राफ्टिंग मशीन से दोनों ओर 30° के कोण बनाएं। अनुमान से लाइन न खींचें।
  2. स्केल एडजस्ट करें: Isometric ड्रॉइंग में actual scale नहीं बल्कि isometric scale (0.816) इस्तेमाल होता है।➤ मतलब: 100mm की लंबाई ड्रॉइंग में 81.6mm होगी।
  3. लाइनें हल्की खींचें (Construction Lines): शुरुआत में सभी गाइड लाइनें बहुत हल्की बनाएं ताकि बाद में साफ-साफ मिटाई जा सकें।
  4. समान माप रखें: X, Y, और Z तीनों दिशाओं में समान माप रखें वरना ड्रॉइंग तिरछी या विकृत लगेगी।
  5. साफ-सुथरी लाइनें बनाएं: सभी मुख्य लाइनें गहरी और सीधी बनाएं ताकि ऑब्जेक्ट 3D और क्लियर दिखे।
  6. अंदर की लाइनें (Hidden edges) केवल ज़रूरत हो तभी दिखाएं। बहुत ज़्यादा दिखाने से चित्र भ्रमित कर सकता है।

ऑर्थोग्राफिक प्रोजेक्शन (Orthographic Projection) बनाते समय सावधानियाँ:

  1. व्यू का सही क्रम रखें: पहले Front View, फिर Top View, और उसके बाद Side View बनाएं।
  2. Projection Lines सीधी और समान रखें: व्यूज़ को जोड़ने वाली projection lines सीधी और parallel होनी चाहिए।
  3. समान माप (Proportion): तीनों व्यू एक-दूसरे से perfectly align होने चाहिए — ताकि एक व्यू का आकार दूसरे में मेल खाए।
  4. Hidden Lines (छिपी रेखाएँ): अंदर के हिस्से दिखाने के लिए dotted lines का प्रयोग करें। लेकिन बहुत अधिक न बनाएं।
  5. Labels और Dimensions: हर व्यू को label करें — जैसे Front View (FV), Top View (TV), Side View (SV)। Dimension lines को thin और neat रखें।
  6. Line Type और Weight: Visible edges → dark continuous line Hidden edges → dotted line Center lines → long-short-long dash
Bonus Tips:
  • हमेशा शुरुआत पेंसिल (HB या 2H) से करें।
  • रबर से मिटाने के बाद ड्रॉइंग पेपर पर दाग न पड़ें।
  • Scale और Protractor का सही प्रयोग करें।
  • Practice daily with simple shapes like cube, cone, cylinder.
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ITI AITT CITS Important Engineering Drawing Model Paper 2023

Latest Model Paper of Engineering Dawing According to the latest NIMI Pattern Most Important Question and with Solve for ITI Engineering Drawing.

All India Trade Test of Craftsmen, Model Paper Set – 1

ENGINEERING DRAWING

इंजीनियरिंग ड्राइंग

First Year (प्रथम वर्ष) – 2023


  • Note – Attempt All Questions
  • Total Marks – 50

Q1. Print 10mm Single Stroke capital letters and numerals in inclined style.

(Small Steps Each Day)

Ans:-

Engineering Drawing Lettering

Q2. Construct a hexagon of side 32 mm by an arc method.

Ans:-

 hexagon of side 32 mm by an arc method.

Q3. Draw the free hand Sketch of an outside micrometer or vernier caliper.

Ans:-

Outside Micrometer

Outside Micrometer

Vernier Caliper

Vernier Caliper

Q4. Draw an orthographic projection (front view, top view, and side view) of a given cylinder in first angle projection.

Draw an orthographic projection (front view, top view, and side view) of a given cylinder in first angle projection.

Ans:-

Draw an orthographic projection (front view, top view, and side view) of a given cylinder in first angle projection.

Q4. Draw the given profile and place the dimension in a uni-directional system.

Ans: –

uni-directional system

Important Engineering Drawing Symbols Graphics

Engineering Drawing Symbols for Drawing Students according to BIS Rule 46-2003 all symbol used in all types technical drawing Sector Like – Engineering Diploma ITI etc. this Symbols also used for Engineering Graphics.

Engineering Drawing Symbols

Rivet Joints Convection Symbols

DescriptionView in Drawing1st Angle3rd Angle
Rivet or Bolt to fit on site
Rivet General
Rivet Countersunk on Back Side
Rivet Countersunk on Front Side
Rivet Countersunk on Back & Front Side
Bolt General
Bolt to Distinguish from the Rivet
Bolt Place of Nut Indicated
Bolt Head countersunk inside on back side
Bolt Head countersunk inside on Front side

Convention brake Line Symbol

The rods, shafts, channels, tubes and pipes of different sizes of the same cross-section have been shown to be shortened so that objects of greater length can be easily explained in a small space for the full length.

ObjectConvection
Rectangular Section
Round Section
Pipe or Tubing
Pipe or Tubing
Wood Rectangle Section
Rolled Section
Channel Section

Convection of Material Symbol

Materials NameConvention or Symbol
Steel Cast Iron Copper and its alloys Aluminium and its alloys
Lead Zinc Tin White Metal
Brass Bronze Gun Metal
Glass
Porcelain Stone Ware Marble Slate
Asbestos Fiber Felt Synthetic Resin Product Paper Cork Linoleum Rubber Leather Wax Insulating and Filling Material
Wood Plywood
Earth
Brick Work Masonry Fire Bricks
Concrete
Water Oil Petrol Kerosene

Engineering Drawing Question Paper in Hindi

Most Important Engineering Drawing Question Paper 2022 for ITI Introduction of Engineering Drawing Question answer all Question are Important for ITI CBT Exam

Engineering Drawing Question Paper

Engineering Drawing Question Paper with Answer

  • प्रश्न – उस रेखाचित्र उपकरण का नाम बताइए जिसे स्थानांतरण माप को मापने में प्रयुक्त करते हैं
  • उत्तर – विभाजक
  • प्रश्न – इंजीनियरिंग ड्राइंग किसकी भाषा से जानी जाती है
  • उत्तर – रेखांकित तथा अभियंताओं की भाषा
  • प्रश्न – सेट स्क्वायर किन किन कोणों में पाए जाते हैं
  • उत्तर – 30° – 60° तथा 45° – 45°
  • प्रश्न – ड्राइंग की अनुकृति तैयार करने के लिए प्रयोग में लिए जाने वाले पन्ने को किस नाम से जाना जाता है
  • उत्तर – ट्रेसिंग पेपर
  • प्रश्न – ड्राइंग शीट की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात कितना होता है
  • उत्तर – 1:2
  • प्रश्न – अनुप्रस्थ समानांतर रेखाएं खींचने के लिए टीस्क्वायर के किस भाग का प्रयोग किया जाता है
  • उत्तर – कार्यकारी या कार्यान्वित कोर
  • प्रश्न – सेट स्क्वायर का उपयोग किस प्रकार की रेखाएं खींचने के लिए किया जाता है
  • उत्तर – क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर रेखा, वृत्त के समभागो में विभाजित करने, कोण बनाने तथा समानांतर रेखाएं खींचने में
  • प्रश्न – आईएस विशेषता के अनुसार A4 साइज के ड्राइंग शीट का अपरिष्कृत माप 240 x 330 मिलीमीटर है तो परिष्कृत बताइए
  • उत्तर – 210 मिलीमीटर x 297 मिलीमीटर
  • प्रश्न – किस पदार्थ से ड्राइंग पेंसिल बनती है
  • उत्तर – ग्रेफाइट तथा केओलिन (मिट्टी)
  • प्रश्न – HB पेंसिल में HB का क्या अर्थ है
  • उत्तर – हार्ड बांड
  • प्रश्न – 2H ग्रेड की पेंसिल किस प्रकार की रेखाएं खींचने में प्रयोग ली जाती हैं संक्षिप्त में उत्तर दें
  • उत्तर – केंद्र रेखा विच्छेद रेखा ऑब्जेक्ट रेखा
  • प्रश्न – कला एवं छायांकन कार्य हेतु किस ग्रेड की पेंसिल का उपयोग किया जाता है|
  • उत्तर – 4B – 7B
  • प्रश्न – विमा, तीर एवं अक्षराकन कार्य हेतु किस ग्रेड की पेंसिल का प्रयोग किया जाता है
  • उत्तर – H
  • प्रश्न – कठोर श्रेणी के पेंसिल कि ग्रेड लिखिए
  • उत्तर – 9H से 4H तक
  • प्रश्न – मध्यम श्रेणी की पेंसिल की ग्रेड लिखिए
  • उत्तर – 3H,2H,H,HB,B
  • प्रश्न – मृदु श्रेणी की पेंसिल की ग्रेड लिखिए
  • उत्तर – 2B – 7B
  • प्रश्न – ड्राइंग बोर्ड लकड़ी की पट्टी से क्यों बनाया जाता है संक्षिप्त में उत्तर दीजिए
  • उत्तर – मौसम की नमी के कारण बोर्ड को प्रसार या सिकुड़न से बचाने के लिए
  • प्रश्न – मिनी ड्रॉफ्टर का उपयोग लिखिए
  • उत्तर – मिनी ड्रॉफ्टर में टी -स्क्वायर सेट स्क्वायर चांदा एवं स्केल का समायोजित रुप होने के कारण इसका उपयोग ड्राइंग बनाने में किया जाता है
  • प्रश्न – ड्राइंग बनाने में कौन-कौन से उपकरण की आवश्यकता होती है
  • उत्तर – ड्राइंग बोर्ड, ड्राइंग शीट, टी स्क्वायर, सेट स्क्वायर, प्रोटेक्टर, फ्रेंच कर्व, रबड़, बोर्ड, क्लिप, डिवाइडर, पेंसिल विभिन्न ग्रेड की
  • प्रश्न – टी स्क्वायर को किस प्रकार निर्दिष्ट किया जाता है
  • उत्तर – लंबाई से जैसे – T0 – 1500MM, T1 – 1000MM, T2 – 700MM, T3 – 500MM
  • प्रश्न – लैमिनेट सतह वाले ड्राइंग बोर्ड की सतह समतलता जांच कैसे की जाती है
  • उत्तर – प्रकाश गुजार कर यदि प्रकाश बिल्कुल आरपार नहीं जाता है तो मान लिया जाता है कि सतह और समतल है
  • प्रश्न – किस मौसम में पेंसिल लीड मृदु तथा कठोर हो जाती है
  • उत्तर – मृदु – गर्मी के मौसम में, कठोर – ठंडे मौसम में
  • प्रश्न – उच्च ग्रेड वाले ड्राइंग उपकरण किस धातु के बनाए जाते हैं
  • उत्तर – निकल या पीतल के
  • प्रश्न – इंजीनियरिंग ड्राइंग पेंसिल का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल षुष्ट्भुजाकार क्यों रखा जाता है
  • उत्तर – षुष्ट्भुजाकार अनुप्रस्थ काट वाली पेंसिल को गोल घुमा कर सामान मोटाई की रेखाएं खींचने में आसानी रहती है तथा ढाल वाली सतह पर नीचे गिरने की संभावना नहीं रहती है
  • प्रश्न – ड्राइंग बोर्ड के उस भाग का नाम बताइए जिस पर टी स्क्वायर का शीर्ष सरकता है
  • उत्तर – आबुनस धार

Conventional Representation of Materials in ED

Engineering Drawing Perfection is based on representations Representation of a large object, sentence or action as a sign is called a convention. These conventions have been approved by ISI by IS 696 – 1972

Materials Conventions Representation Symbol According to IS 696 – 1972

MaterialsConvention or Symbol
Steel
Cast Iron
Copper and its alloys
Aluminum and its alloys
Lead
Zinc
Tin
White Metal
Brass
Bronze
Gun Metal
Glass
Porcelain
Stone
Ware Marble
Slate
Asbestos
Fiber Felt
Synthetic
Resin Product
Paper
Cork
Linoleum
Rubber
Leather
Wax
Insulating and Filling Material
Wood
Plywood
Earth
Brick Work
Masonry
Fire Bricks
Concrete
Water
Oil
Petrol
Kerosene

By not writing the name of the cut material on the intersecting surface of the object, it is displayed only in the sign of the substance by its ball.

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कोणों के कितने प्रकार होते हैं Types Of Angles in Hindi

ज्यामिति में माप के आधार पर विभिन्न प्रकार के कोण होते हैं। Types Of Angles in Hindi मूल कोणों के नाम हैं न्यून कोण, अधिक कोण, समकोण, सीधा कोण, प्रतिवर्त कोण और पूर्ण घूर्णन। एक कोण ज्यामितीय आकार होता है जो दो किरणों को उनके अंत-बिंदुओं पर मिलाने से बनता है। कोण को आमतौर पर डिग्री में मापा जाता है।

कोण की परिभाषा :-

दो रेखाओं के परस्पर मिलने से बनी स्थिति कोण कहलाती है कोण को अंश, मिनट, अथवा सेकंड में मापते हैं कौन मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं |

कोणों के प्रकार

समकोण (Right Angle)

जिस कोण का माप 90° होता है समकोण कहलाता है

RIght Angle
Right angle

न्यून कोण (Acute Angle)

जो कोण 90 डिग्री से कम होता है वह न्यून कोण कहलाता है|

Acute Angle

अधिक कोण (Obtuse Angle)

90 डिग्री से अधिक, परन्तु 180 डिग्री से कम माप के कोण को अधिक कोण कहते हैं|

Obtuse Angle
Obtuse Angle

सरल कोण (Straight Angle)

180 डिग्री के कोण को सरल कोण/ऋजुकोण/रेखीय कोण कहते हैं| यह एक सीधी रेखा बनाता है।

Straight Angle
Straight Angle

वृहत कोण (Reflex Angle)

180 डिग्री से अधिक परंतु 360 डिग्री से कम मान के कोण को वृहत कोण कहते हैं|

Reflex Angle
Reflex Angle

पूरक कोण (Complementary Angle)

जब दो समीपवर्ती कोणों का योग 90 डिग्री हो जैसे एक दूसरे के कंप्लीमेंट्री कोण या पूरक कोण कहलाते हैं|

Complementary Angle
Complementary Angle

अधिक कोण (Supplementary Angle)

जब दो समीपवर्ती कोणों का योग 180 डिग्री हो जैसे तो दोनों को एक दूसरे के सप्लीमेंट्री कोण या संपूरक कोण या अधिक कोण कहलाएंगे|

Supplementary Angle
Supplementary Angle

ऊर्ध्वाधर कोण (Vertical Angles)

ऊर्ध्वाधर कोण दो रेखाओं के प्रतिच्छेदन से बनने वाले विपरीत कोण होते हैं। वे सदैव सर्वांगसम (समान माप वाले) होते हैं।

Vertical Angles

आसन्न कोण (Adjacent Angles): आसन्न कोण वे कोण होते हैं जो एक उभयनिष्ठ भुजा और एक उभयनिष्ठ शीर्ष साझा करते हैं, लेकिन ओवरलैप नहीं होते हैं।

समीपवर्ती कोण या आसन्न कोण (Adjacent Angles)

एक रेखा के दो तरफ बने कोण समीपवर्ती कोण या आसन्न कोण कहलाते हैं|

या

दो कोण जिनमें एक उभयनिष्ठ शीर्ष, उभयनिष्ठ भुजा और अलग आंतरिक भाग होता है, आसन्न कोण/समीपवर्ती कोण कहलाते हैं|

Adjacent Angles

संगत कोण (Corresponding Angles)

ये कोण प्रत्येक कटाव पर एक ही स्थिति में होते हैं जहां एक सीधी रेखा दो समानांतर रेखाओं को काटती है। वे सर्वांगसम हैं. उसे संगत कोण कहते है

Corresponding Angles

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ITI Engineering Drawing Sheet Size & Layout

If you are a student of ITI and you also read the subject of engineering drawing, then it is most important that you have knowledge about the engineering seat, if you do not have complete knowledge of the seat in any way, then you will not be able to do a good standard drawing. You will not be able to understand where you have to write the title, where you have to write the description etc. That is why it is most important that you get detailed information about the engineering drawing sheet. Let us explain to you all the types of engineering drawing sheets. and where to write what is in it, if you tell us how you will make a drawing on it, let us understand in detail.

ITI Engineering Drawing Sheet Size & Layout

Standard sizes of drawing sheets as per BIS 46: 2003

Sr. NoSheet DesignationTrimmed Size (mm)Untrimmed Size (mm)
1A0841 x 1189880 x 1230
2A1594 x 841625 x 880
3A2420 x 594450 x 625
4A3297 x 420330 x 450
5A4210 x 297240 x 330
6A5147 x 210165 x 240

Basic Principle of Drawing Sheet

प्रयुक्त की जाने वाली पूर्व मुद्रित या खाली ड्राइंग शीट का आकार इंजीनियरिंग के किसी भी क्षेत्र में तकनीकी ड्राइंग के साथ अत्यधिक महत्व होता है ड्राइंग शीट के साइज का आधारभूत सिद्धांत इसकी लंबाई व चौड़ाई के अनुपात के रूप में दर्शाया जाता है

  1. x:y = 1: √2
  2. xy = 1

जहां x और y ड्राइंग शीट की साइड तथा जिसका पृष्ठीय क्षेत्रफल 1 मीटर स्क्वायर होता है अतः x = 0.841m और y= 1.189m |

Basic Principle of Drawing Sheet
  1. लंबाई के या चौड़ाई के दुगने के साथ-साथ संयोग से क्रमबद्ध प्ररूपी मापो के आकार की दो श्रेणियां प्राप्त होते हैं दोनों मापो का क्षेत्र के 1 : 2 अनुपात में होता है
  2. 1 सीट के दोनों माफ समान होते हैं अतः एक प्रारूप के x व y दोनों साइड के लिए समीकरण x:y = 1: √2 प्राप्त होता है इसके परिणाम स्वरूप दोनों साइडों के मध्य समान अनुपात होता है जैसे एक वर्ग के विकर्ण के दोनों तरफ होता है

Layout of Drawing Sheet

ड्राइंग शीट पर ड्राइंग का अभिन्यास इस तरह से किया जाना चाहिए कि इसे आसानी से पढ़ा जा सके तथा जरूरी संदर्भों को लोकेट किया जा सके जैसा की चित्र में दिखाया गया है A1 साइज का ड्राइंग शीट लेआउट दिखाया गया है सभी विमाए मिली मीटर में है एक फुल साइज का ड्राइंग कागज 565 मिलीमीटर x 765 मिलीमीटर साइज का लिया जाता है ड्राइंग शीट में मार्जिन रेखाएं खींचकर मार्जिन छोडी जाती है

Layout of Drawing Sheet
Layout of Drawing Sheet

चित्रानुसार बॉर्डर लाइन खींचकर वर्किंग स्पेस प्राप्त किया जा सकता है SP : 46 – 2003 के संस्तुति अनुसार A0 तथा A1 शीट साइज के लिए बॉर्डर की चौड़ाई 20 mm तथा A2,A3,A4, एवं A5 साइज के लिए दी गई है

Margin

ड्राइंग शीट में मार्जिन मार्जिन रेखा द्वारा प्रदान किया जाता है मार्जिन रेखा का प्रिंट ड्राइंग शीट का परिष्कृत साइज होता है

Border Line

ड्राइंग शीट के चारों ओर बॉर्डर रेखा खींच कर एक स्पष्ट कार्यक्षेत्र उपरोक्त चित्र अनुसार प्राप्त होता है सीट के बाएं तरफ बॉर्डर रेखा द्वारा रखा गया अधिक क्षेत्र सीट को फाइलिंग और वाइंडिंग करने के उपयोग में लिया जाता है यदि सीट को वाइंडिंग और फाइलिंग नहीं करके कैबिनेट मे स्टोर की जाती है तो बॉर्डर लाइन के द्वारा सीट के चारों तरफ बराबर क्षेत्र दिया जाता है

Border and Frame

IS 46 : 2003 के अनुसार A0 व A1 साइज की सीट के लिए बॉर्डर की चौड़ाई 20 mm तथा A2,A3,A4,A5 के लिए बॉर्डर की चौड़ाई 10mm रखी जाती है एक ड्राइंग उद्देश्य के लिए एक स्पष्ट क्षेत्र फ्रेम के द्वारा दर्शाया जाता है

Orientation Mark

ड्राइंग शीट के चारों साइड में चार सेंटर मार्क किए जाते हैं जो ड्राइंग की स्थिति के पुनः उत्पादित करने के उद्देश्य के लिए सुविधा प्रदान करते हैं

Metric Reference Graduation

सभी ड्राइंग पर एक फिगर लेस मेट्रिक रेफरेंस ग्रेजुएशन प्रदान किए जाते हैं जिनकी न्यूनतम लंबाई 100 मिली मीटर होती है और इन्हें 10 मिली मीटर के बराबर भागों में बांटा जाता है मेट्रिक रेफरेंस ग्रेजुएशन सीट के बॉर्डर में प्रेम के पास अनुस्थापन चिन्ह से समान रूप से दिए जाते हैं इनकी अधिकतम चौड़ाई 5 मिलीमीटर और स्ट्रोक की मोटाई 0.5 मिलीमीटर रखी जाती है

Grid Reference

ग्रिड संदर्भ सभी साइज की ड्राइंग सीटों के लिए ड्राइंग की डिटेल ड्राइंग पर किए गए अलग से परिवर्तन तथा ड्राइंग की स्थिति को दर्शाने के लिए प्रदान किए जाते हैं इन सभी ग्रिडों की संख्या दो से भाज्य होनी चाहिए तथा ड्राइंग की जटिलता के आधार पर होनी चाहिए तथा यह अनुशंसा की जाती है कि ग्रिड आए तो के किसी भी साइड की लंबाई 25 मिली मीटर से कम और 75 मिलीमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए ड्राइंग शीट पर ग्रीड एक तरफ अक्षरों में तथा दूसरी तरफ अंकों में दिए जाते हैं|

Item Reference

वस्तु संदर्भ किसी असेंबली है या डिटेल ड्राइंग में दिखाया गया पाटो को क्रमानुसार ड्राइंग शीट पर एक सारणी में दिखाना कहलाता है कोई भी असेंबली में दिखाए गए समान पार्ट समान वस्तु संदर्भ रखते हैं सभी वस्तु संदर्भ एक वस्तु सूची में दिखाया जाते हैं

Title Box

सीट को बॉर्डर पर लगाने के पश्चात इसे ISI 696 – 1972 के अनुमोदन के अनुरूप माप लेकर चित्र अनुसार बनाते हैं बाई और पर्याप्त जगह ड्राइंग बनाने के लिए छोड़ी जाती है टाइटल बॉक्स हमेशा ड्राइंग शीट के दाएं तरफ नीचे की ओर बनाया जाता है इसकी माप 185 मिलीमीटर x 65 मिलीमीटर रखी जाती है यह माप क्षैतिज रेखा के सापेक्ष 185 मिली मीटर तथा ऊर्ध्वाधर रेखा के सापेक्ष 65 मिलीमीटर रखी जाती है|

टाइटल बॉक्स में निम्न बिंदु होना आवश्यक है

  • फर्म का नाम
  • ड्राइंग का शीर्षक
  • पैमाना
  • ड्राइंग संख्या
  • ड्राइंग की दिनांक
  • विद्यार्थी का नाम
  • वीक्षक के हस्ताक्षर
  • सीट पर बनाई गई सभी ड्राइंग की संख्या

IS विशिष्टता के अनुसार 210 x 297 मिली मीटर माप का परिष्कृत रेखा चित्र पन्ना किस ग्रेड के नाम से जाना जाता है

A4

ड्राइंग शीट को उनके आकार के अनुसार भारतीय मानक द्वारा नामित किया गया है 1 मीटर स्क्वायर सतह क्षेत्रफल वाले ड्राइंग शीट का पद नाम होगा

A0

ड्राइंग बोर्ड की कार्यकारी कोर को किस से जांचा जाता है?

टी स्क्वायर

SP 46 : 2003 के अनुसार एक A0 साइज की ड्राइंग शीट के प्रिंट को फाइलिंग व वाइंडिंग करने के लिए प्रिंट को मोड़ने के लिए कितने मोड़ दिए जाते हैं

4

Types of Engineering Drawing Pencils

Types of pencils in Engineering Drawing is the most important topic for all ITI and Drawing students there are three Grade types of the pencil used in engineering drawing and drawing

Types of Engineering Drawing Pencils

Pencils Grade & Types

Sr. NoPencils GradePencils CodeUses of Pencils
1Hard Grade9H, 8H, 7H, 6H, 5H, 4HUsed for fine lines
2Medium Grade3H, 2H, H, HB, BUsed for record work, lettering, arrowhead
3Soft Grade2B, 3B, 4B, 5B, 6B, 7BUsed for artwork

ड्राइंग बनाने के लिए मानक या अर्द्ध स्वचालित पेंसिल का प्रयोग करना चाहिए घटिया किस्म की पेंसिल एक समान मोटाई व शेड की रेखाएं नहीं खींच पाती है तथा कार्य करते समय बार-बार टूट जाती हैं इसलिए अच्छे किस्म की ही पेंसिल की कार्य में लेनी चाहिए पेंसिल लीड ग्रेफाइड तथा केओलाइन मिट्टी से बनाई जाती है जितना अधिक केओलाइन मात्रा होगी पेंसिल उतना ही कठोर होगा यह विभिन्न ग्रेड में उपलब्ध होती है आजकल मैकेनिकल ऑटोमेटिक पेंसिल/क्लच 0.3, 0.5, 0.7 या 0.9 मिलीमीटर व्यास वाली लीड प्रयोग की जाती है

इंजीनियरिंग ड्राइंग बनाने की शुरुआत H या 2H पेंसिल से बहुत हल्के हाथ से करते हैं जिससे जो रेखा कार्य में ना आए तो उसे रबड़ द्वार आसानी से मिटाया जा सके ड्राइंग फाइनल करने के लिए 3H या 4H अक्षर लिखने के लिए 3H व फ्री हैंड स्केचिंग के लिए HB ग्रेड की पेंसिल का उपयोग में लेना चाहिए

Standard or semi-automatic pencil should be used for drawing drawing. Poor quality pencils are not able to draw lines of uniform thickness and shade and break repeatedly while working, so only good quality pencils should be used. Lead is made from graphite and kaolin clay, the higher the amount of kaolin, the harder the pencil, it is available in various grades, nowadays mechanical automatic pencils/clutches 0.3, 0.5, 0.7 or 0.9 mm in diameter lead are used.

Beginning to make engineering drawing with H or 2H pencil with very light hand so that the line which is not useful can be erased easily by eraser to finish the drawing 3H or 4H to write the letter 3H and free hand sketching. HB grade pencil should be used for

  1. 2H – Object Line, Center Line, Break Line etc.
  2. H – Dimensioning, Arrow Heads, Section Lines, Lettering, Sketching, Extension Line, Circles, Arc, etc.
  3. HB – Writing Notes on sketch Book or Rough Work etc.
  4. 4B to 7B – For Artistic Sketching and shading

Introduction of Engineering Drawing in Hindi

Introduction of Engineering Drawing in Hindi (हिंदी में) It is the specific language of engineers, which is based on complete diagrams and stereotypes, information and copy, with the help of which the imaginary form of an object is shown on clear paper along with complete dimensions. Best topic of ITI Engineering Drawing CBT Mock Test Exam.

Engineering Drawing Instrument ( इंजीनियरिंग ड्राइंग के उपकरण )

Drawing Board (ड्राइंग बोर्ड) :-

Engineering Drawing Board

यह संशोधित लकड़ियां जैसे सफेद पाइन फर या ओक की पट्टियों का पूर्ण समतल आयताकार ड्राफ्ट्समैन के द्वारा उपयोग किए जाने वाला बोर्ड है जिसमें बोर्ड के बाएं तरफ सीधे किनारे वाली चार से 5 मिली मीटर आबनूस कठोर लकड़ी का प्रक्षेपित सीधा कोर टी स्क्वायर के लिए रखा जाता है जिसे कार्यकारी कोर या कार्यान्वित कोर कहते हैं इसे टी स्क्वायर से जांचा जा सकता है ड्राइंग बोर्ड निम्नलिखित प्रकार के आते हैं जिनका विवरण निम्न है

It is a perfectly flat rectangular board of modified woods such as white pine fur or oak strips used by draftsmen with a projected straight core of four to 5 mm ebony hardwood with a straight edge on the left side of the board for the T-square. Which is called a working core or working core, it can be checked with T square drawing board comes of following types whose details are given below

Classification of Drawing Boards & Size Engineering Drawing(ड्राइंग बोर्ड का वर्गीकरण)

Sr. NoDesignated PostBoard Size
1D01500x1000x25 mm
2D11000x700x25 mm
3D2700x500x15 mm
4D3500x350x15 mm

T-Square (टी-स्क्वायर)

T Square

नाम के अनुरूप यह टी आकार की संशोधित लकड़ी प्लास्टिक एवं सेल्यूलाइट का बना होता है यह शीर्ष तथा ब्लेड दो भाग में होता है जिसमें एक ब्लेड का किनारा कार्यकारी किनारा होता है इस कार्यकारी किनारे को शीर्ष के साथ समकोण पर स्क्रू से कसा जाता है जिससे ब्लेड वाले भाग से छत्तिज समानांतर रेखाएं खींची जा सके|

As the name suggests, it is made of T-shaped modified wood, plastic and cellulite, this head and blade are in two parts, in which the edge of one blade is the working edge, this working edge is screwed at right angles to the top, so that the blade horizontal parallel lines can be drawn from the part of the

Classification of T Square & Size (टी स्क्वायर का वर्गीकरण)

Sr. NoDesignated PostBlade Length ( in mm)
1T01500 mm
2T11000 mm
3T2700 mm
4T3500 mm

Set-Square (सेट स्क्वायर)

Set Square

यह पारदर्शक प्लास्टिक अथवा सेल्यूलाइट के समकोण त्रिभुजाकार आकृति के बने होते हैं यह दो के जोड़े में उपलब्ध होते हैं प्रत्येक में 90 डिग्री का एक कोण होता है सामान्य कार्य के लिए 25 सेंटीमीटर लंबा 60 डिग्री से 30 डिग्री कोण तथा 20 सेंटीमीटर लंबा 45 डिग्री – 45 डिग्री कोण वाले सैट स्क्वायर उपयोग में लिए जाते हैं इनके मध्य के स्थान पर फ्रेंच कर्वे विभिन्न आकृतियों के कटे होते हैं जो सेट स्क्वायर को ड्राइंग शीट पर सरकाने तथा उठाने में सहायक होते हैं इसकी सहायता से ऊर्ध्वाधर रेखाए तथा समांतर रेखाए खींची जा सकती है सेट-स्क्वायर तथा टी स्क्वायर की सहायता से छेतिज रेखाएं 15 डिग्री 30 डिग्री 45 डिग्री 60 डिग्री के गुणांक में तथा वृतो को सम भागो में विभाजित किया जा सकता है कभी-कभी सेट स्क्वायर अपनी अचूक यथार्थता आंतरिक विकृति के कारण खो देता है अतः इसकी जांच समय समय पर की जानी चाहिए |

They are made of transparent plastic or cellulite angled triangular shape. Available in pairs of two, each with a 90-degree angle, 25 cm long 60 ° to 30 ° angle for normal work and 20 cm long 45 ° – Set squares with 45-degree angles are used, in place of them, French curves are cut of different shapes, which are helpful in sliding and lifting the set square on the drawing sheet, with the help of this vertical lines and parallel lines can be drawn. With the help of set-square and T-square, horizontal lines can be divided into coefficients of 15 ° 30 ° 45 ° 60 ° and circles can be divided into even parts. Sometimes set square loses its accuracy due to internal distortion, hence its inspection should be done from time to time

Protractor (चांदा)

Protractor

चांदा का उपयोग कोण नापने व बनाने के काम में किया जाता है यह पारदर्शक प्लास्टिक अथवा सेल्यूलाइट का बना होता है इसमें 0 शून्य से 180 डिग्री तक का कोण आसानी से इसकी सहायता से बना सकते हैं इसका आकार वृत्ताकार या अर्धवृत्त आकार होता है जिस पर वह वामावर्त व दक्षिणावर्त दिशा में शून्य से 180 डिग्री के कोण प्रदर्शित किए जाते हैं कोण नापने वह बनाने के लिए चंदे की बेसलाइन को चित्र की बेस लाइन पर व बिंदु 0 को बेसलाइन के मध्य रखा जाता है

The protractor is used in the work of measuring and making angles, it is made of transparent plastic or cellulite, in which angles from zero to 180 degrees can be easily made with its help, its shape is circular or semicircle shape on which it is placed. The angles of zero to 180 degrees are displayed in the counterclockwise and clockwise direction. To measure the angle, the donation baseline is placed on the baseline of the picture and point 0 is placed in the middle of the baseline.

Scale (स्केल)

Scale

इंजीनियरिंग ड्राइंग में उपयोग किए जाने वाले स्केल stainless-steel/ आईवेरी एवं पारदर्शक सेल्यूलाइट प्लास्टिक के आयताकार आकार के में बने होते हैं सामान्यतः स्केल पर एक तरफ सेंटीमीटर व दूसरी तरफ इंच की मार्किंग ही होती है सेंटीमीटर साइड में सबसे छोटी मापी जाने वाली दूरी 1 मिली मीटर होती है तथा इंच साइड में सबसे छोटी मापी जाने वाली दूरी 1 सूत होती है

Scales used in engineering drawings are made in rectangular shape of stainless-steel/ivory and transparent cellulite plastics. The scale usually has markings of centimeters on one side and inches on the other side. The shortest distance measured on the centimeter side is 1 Millimeter is meter and the smallest distance measured in inch side is 1 Sut.

Divider (विभाजक)

Divider

विभाजक इसकी बनावट परकार की भांति होती है अंतर सिर्फ इतना है कि इनकी इसकी दोनों टांगों के सिरों पर पिन लगी होती है इसका उपयोग सीधी रेखा को विभाजित करने ड्राइंग के नाप को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने में किया जाता है यह भी बाजार में दो प्रकार की उपलब्ध होती हैं इसलिए अच्छे परिणाम के लिए स्प्रिंग वाले विभाजक का उपयोग करना चाहिए

Separator Its structure is like a compass, the only difference is that it has pins at the ends of both its legs, it is used to divide the straight line and transfer the size of the drawing from one place to another. There are two types available in this so for best result spring separator should be used

Compass (परकार)

Compass

परकार यह दो टांगों की आकृति में बना होता है एक टांग के नीचे तीन तथा दूसरी टांग में पेंसिल की लीड लगाने की व्यवस्था होती है जिसकी सहायता से वृत्त एवं चाप बनाते हैं बड़े वृत्तो के लिए दीर्घीकरण छड़ का उपयोग किया जाता है यह बाजार में दो प्रकार के उपलब्ध होते हैं साधारण एवं स्प्रिंग वाले अच्छे परिणाम के लिए स्प्रिंग वाले परकार का उपयोग करते हुवे पिन कोड ड्राइंग शीट पर लंबवत रखते हैं

The compass is made in the shape of two legs, three under one leg and a pencil lead in the other leg, with the help of which circles and arcs are made, Elongation rods are used for large circles, it is two in the market. Varieties are available Ordinary and springy For best results, using spring compasses, pin code is placed vertically on the drawing sheet.

Circle Master (वृत्त मास्टर)

Circle Master

यह भी सिलोलाइड या प्लास्टिक का बना हुआ पारदर्शी वृत्ताकार उपकरण होता है इस पर विभिन्न छोटे अलग-अलग वृत्त कटे होते हैं तथा प्रोटेक्टर की भांति 0 डिग्री से 360 डिग्री तक के कोण की माप अंकित होती है इसका उपयोग ड्राइंग में तेजी से कार्य करने के लिए किया जाता है

It is also a transparent circular instrument made of Celluloid or plastic, on it various small different circles are cut and the measurement of angle from 0 degree to 360 degree is marked like a protector, it is used to work fast in drawing. is done for

Mini Drafter (मिनी ड्रॉफ्टर)

Mini Drafter

इंजीनियरिंग ड्राइंग के कार्य में आजकल मिनी ड्रॉफ्टर का उपयोग ज्यादा किया जाता है इसका मुख्य कारण है इसमें टी स्क्वायर सेट स्क्वायर ,चांदा,स्केल, का समायोजन होना है मिनी ड्राफ्टर दो भुजाओं का बना होता है उपयोग के समय एक भुजा ड्रॉइंग बोर्ड पर स्क्रू द्वारा क्लेम की जाती है तथा दूसरी भुजा जिस पर चांदा और 90 डिग्री पर जुड़े तो स्केल होते हैं जो ड्राइंग बोर्ड पर सभी स्थान पर पहुंच सकती है मिनी ड्राफ्टर से क्षैतिज ऊर्ध्वाधर तिरछी व समांतर लाइने आसानी से खींची जा सकती हैं

Nowadays mini draughter is used more in the work of engineering drawing, the main reason for this is the adjustment of T square set square, protractor, and scale, mini drafter is made of two arms at the time of use, one arm is screwed on the drawing board. The claim is made and the other arm on which the protractor is connected and connected at 90 degrees, there is a scale which can reach all the places on the drawing board. Horizontal vertical diagonal and parallel lines can be drawn easily with the mini drafter.

Introduction of Engineering Drawing FAQs

इंजीनियरिंग ड्रॉइंग क्या है?

इंजीनियरिंग ड्रॉइंग वो ग्राफिकल भाषा है जो इंजीनियर्स और डिजाइनर्स द्वारा उत्पाद या तंत्र के बारे में जानकारी संवहन करने के लिए प्रयुक्त होती है। इसमें वस्तुओं, घटकों और संरचनाओं की विस्तृत और सटीक प्रतिष्ठान की जाती है, समायोजन योजनाएँ, और अन्य जानकारियों को शामिल करती है।

इंजीनियरिंग ड्रॉइंग क्यों महत्वपूर्ण है?

इंजीनियरिंग ड्रॉइंग महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इंजीनियरों, डिजाइनर्स और निर्माताओं के लिए एक सार्वभौमिक भाषा के रूप में काम करती है। यह डिजाइन की उद्देश्य द्वारा सटीक रूप से जानकारी प्रस्तुत करने में मदद करती है, संवहन को सुनिश्चित करती है, सहयोग को सरल बनाती है, और निर्माण और विधान प्रक्रिया के दौरान त्रुटियों को कम करती है।

इंजीनियरिंग ड्रॉइंग के मुख्य तत्व क्या हैं?

एक इंजीनियरिंग ड्रॉइंग आमतौर पर निम्नलिखित तत्वों को शामिल करती है:

  • शीर्षक ब्लॉक: इसमें ड्रॉइंग का शीर्षक, भाग संख्या, स्केल, और अन्य आवश्यक विवरण होता है।
  • नजरिये: वस्तु के विभिन्न कोणों से दृष्टिकोणियों को उपस्थित करते हैं (जैसे, सामना, ऊपर, और पक्ष)।
  • माप और अनुमतियाँ: विशेषत: विशेषत विवरण, विशालता, और विशेषत: स्थान के अंशों के आकार और स्थान की माप होती है।
  • नोट्स और विशेषिकाएँ: सामग्री, समापन, सम्मिलित निर्देश, और अन्य संबंधी विवरणों की अतिरिक्त जानकारी।

इंजीनियरिंग ड्रॉइंग के विभिन्न प्रकार कौन-कौन से हैं?

विभिन्न प्रकार के इंजीनियरिंग ड्रॉइंग हो सकते हैं, जैसे:

  • विवरण ड्रॉइंग: व्यक्तिगत भागों के बारे में विशेष जानकारी प्रदान करती है।
  • संघटन ड्रॉइंग: कैसे कई घटकों को एक बड़े सिस्टम में आस्थित किया जाता है यह दिखाती है।
  • आइसोमेट्रिक ड्रॉइंग: वस्तु का 3D दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो इसे तीन आयामों में दृश्यित करने में मदद करता है।
  • पिक्चरियल ड्रॉइंग: वस्तुओं को एक अधिक वास्तविक और सांवेगिक तरीके से प्रस्तुत करती है, जैसे दृष्टिकोण या तिरिची दृष्टिकोण।

सामान्य ड्रॉइंग बोर्ड के कौन-कौन से प्रकार होते हैं?

सामान्य ड्रॉइंग बोर्ड के तीन प्रमुख प्रकार होते हैं – रेगुलर, रेडियस्ड और आईजीजी (IGCSE) बोर्ड।