Different Types of Drill Machine for ITI Fitter

Drill Machine हर ITI Fitter छात्र के लिए एक बहुत ही जरूरी टूल है। जब भी किसी धातु, लकड़ी या प्लास्टिक में छेद (hole) बनाना होता है, तो ड्रिल मशीन की मदद ली जाती है। ITI में पढ़ने वाले छात्रों को इसकी तकनीक, प्रकार और उपयोग की पूरी जानकारी होना जरूरी है, ताकि वे इसे सही और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकें।

इस लेख में हम “Types of Drill Machine” यानी अलग-अलग प्रकार की ड्रिल मशीनों के बारे में विस्तार से जानेंगे। इसमें हम देखेंगे कि कौन-सी मशीन किस काम के लिए उपयोग होती है, उसकी विशेषताएं (features), उपयोग (uses) और फायदे (advantages) क्या हैं।

यह लेख खासकर ITI Fitter छात्रों के लिए तैयार किया गया है ताकि वे अपने प्रैक्टिकल्स और इंडस्ट्रियल वर्क में इसे आसानी से समझ सकें और प्रयोग कर सकें।


Understanding Various Drill Machine Types for ITI Fitters

1. Portable Drill Machine

Portable Drill Machine सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली मशीन है। यह हल्की और हाथ में पकड़ने वाली होती है, जिससे किसी भी जगह पर आसानी से काम किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल निर्माण स्थलों और फिटिंग वर्क्स में किया जाता है।

Features:

  • हल्का और आसानी से ले जाने योग्य
  • इलेक्ट्रिक या बैटरी से चलने वाली
  • अलग-अलग साइज के ड्रिल बिट्स फिट हो सकते हैं

Uses:

  • दीवार, लकड़ी या छोटे मेटल शीट में छेद करने के लिए
  • रिपेयरिंग और मोंटाज वर्क्स में
  • छोटे प्रोजेक्ट्स और फिटिंग टास्क में

Advantages:

  • Portable और यूज़र-फ्रेंडली
  • किसी बड़े सेटअप की आवश्यकता नहीं
  • समय और श्रम की बचत

2. Bench Drill Machine

Bench Drill Machine

Bench Drill Machine को किसी वर्कटेबल या बेंच पर फिक्स किया जाता है। यह स्थिर मशीन होती है और सटीक छेद करने में मदद करती है। इसका उपयोग छोटे कंपोनेंट्स के निर्माण में किया जाता है।

Features:

  • मेटल बेस पर माउंटेड
  • सटीक गहराई और एंगल सेटिंग
  • फीड कंट्रोल मैकेनिज्म

Uses:

  • छोटे मेटल पार्ट्स या जॉब्स पर होल बनाने के लिए
  • लेबोरेटरी और प्रोडक्शन यूनिट्स में
  • वर्कशॉप प्रैक्टिकल्स में

Advantages:

  • High Precision और Stability
  • कम वाइब्रेशन
  • Consistent Drilling Quality

3. Pillar Drill Machine

Pillar Drill Machine, Bench Drill का बड़ा और अधिक पावरफुल वर्जन है। इसे फर्श पर माउंट किया जाता है और भारी जॉब्स के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

Pillar Drill Machine

Features:

  • बड़ी हाइट और पिलर स्ट्रक्चर
  • Powerful Motor और V-Belt Drive
  • Adjustable Table Movement

Uses:

  • भारी मेटल पार्ट्स में छेद करने के लिए
  • बड़े मेकैनिकल वर्कशॉप्स में
  • Deep Hole और सटीक Bore के लिए

Advantages:

  • Long Life और Durability
  • उच्च गहराई तक ड्रिलिंग क्षमता
  • Heavy Duty Performance

4. Radial Drill Machine

Radial Drill Machine बड़ी मशीनरी या भारी वर्कपीस में ड्रिलिंग के लिए प्रयोग की जाती है। इसके आर्म (radial arm) को घूमाया और ऊपर-नीचे किया जा सकता है, जिससे यह बड़ी सतहों पर काम करने योग्य बनती है।

Radial Drill Machine

Features:

  • घूमने वाला आर्म और हेड
  • Adjustable Height और Angle
  • आसान टूल सेटिंग

Uses:

  • बड़े वर्कपीस पर छेद बनाना
  • Boiler, Frame, और Machinery Fitting में
  • Industrial Heavy Applications में

Advantages:

  • Flexible Operation
  • Multiple Position Drilling
  • बड़े वर्कपीस को मूव करने की जरूरत नहीं

5. Gang Drill Machine

Gang Drill Machine में एक बेस पर कई स्पिंडल लगे होते हैं, जिससे एक साथ अलग-अलग होल बनाए जा सकते हैं। इसका उपयोग प्रोडक्शन यूनिट्स में होता है।

Gang Drill Machine

Features:

  • Multiple Spindles on Single Table
  • Independent Feed Control
  • Adjustable Setup

Uses:

  • सीरियल ड्रिलिंग ऑपरेशन के लिए
  • Mass Production Industries में
  • समान वर्कपीस पर तेजी से छेद करने के लिए

Advantages:

  • उच्च उत्पादन क्षमता
  • समय की बचत
  • Efficient और Consistent Performance

6. Multi-Spindle Drill Machine

Multi-Spindle Drill Machine, Gang Drill से भी ज्यादा एडवांस मशीन होती है। इसमें एक ही समय में कई ड्रिल पॉइंट्स पर छेद किया जाता है, जिससे उत्पादन और Accuracy दोनों बढ़ जाते हैं।

Multi-Spindle Drill Machine

Features:

  • कई Spindles एक ही हेड से जुड़े होते हैं
  • ऑटोमेटिक फीडिंग सिस्टम
  • CNC कंट्रोल सपोर्ट

Uses:

  • Mass Production में, जहां समान पैटर्न के होल चाहिए
  • ऑटोमोबाइल और मशीन पार्ट्स इंडस्ट्री में
  • बड़ी मशीनरी असेंबली वर्क में

Advantages:

  • समय और श्रम की बचत
  • एकसमान क्वालिटी
  • High Speed और Efficiency

Key Features and Uses of Drill Machines for Students

ITI फिट्टर छात्रों के लिए Drill Machines की समझ जरूरी है क्योंकि यह उनके रोजमर्रा के वर्क का मुख्य हिस्सा है। हर प्रकार की मशीन का अलग उद्देश्य और उपयोग होता है, और सही मशीन का चयन करना कार्य की गुणवत्ता बढ़ाता है।

नीचे दिया गया टेबल आपको विभिन्न Types of Drill Machine की तुलना करता है:

Drill Machine TypeMounting TypePower & SizeCommon UseAdvantages
Portable DrillHandheldLow Power, SmallHousehold & Light WorkPortable, Easy to Use
Bench DrillFixed on BenchMediumPrecision DrillingAccurate & Stable
Pillar DrillFloor MountedHigh PowerHeavy WorkDeep & Strong Drilling
Radial DrillFloor MountedHighLarge WorkpieceFlexible & Wide Reach
Gang DrillBench MountedMedium-HighProduction DrillingMultiple Drills at Once
Multi-Spindle DrillIndustrial SetupVery HighMass ProductionHigh Speed, High Volume

Safety Tips for ITI Students

  • काम शुरू करने से पहले मशीन के सभी पार्ट्स की जांच करें।
  • Safety goggles और gloves पहनें।
  • ड्रिल बिट लगाने से पहले मशीन बंद रखें।
  • ओवर-स्पीडिंग से बचें।
  • मशीन के मैनुअल निर्देशों का पालन करें।

 

ड्रिल मशीन हर ITI Fitter छात्र की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग में अहम भूमिका निभाती है। हर प्रकार की मशीन का अपना महत्व और उपयोग होता है। Portable Drill से लेकर Multi-Spindle तक, सभी का उद्देश्य अलग होता है — लेकिन इन सबका मकसद सटीक और सुरक्षित ड्रिलिंग सुनिश्चित करना है।

जो छात्र “Types of Drill Machine” को अच्छे से समझ लेते हैं, वे अपने करियर में एक मजबूत तकनीकी नींव बना पाते हैं। यही जानकारी आगे चलकर औद्योगिक क्षेत्रों में काम आते समय उपयोगी साबित होती है।


FAQs

Q1. Types of Drill Machine कितने प्रकार की होती हैं?
A1. आम तौर पर 6 प्रकार की मशीनें होती हैं – Portable, Bench, Pillar, Radial, Gang, और Multi-Spindle Drill।

Q2. Portable Drill Machine का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
A2. यह हल्की, सस्ती और आसानी से ले जाई जा सकती है।

Q3. Bench Drill और Pillar Drill में क्या फर्क है?
A3. Bench Drill छोटी और टेबल पर लगती है, जबकि Pillar Drill बड़ी और फर्श पर स्थिर होती है।

Q4. Radial Drill Machine का उपयोग कहाँ होता है?
A4. बड़े वर्कपीस या भारी मशीनरी पर छेद करने के लिए।

Q5. Multi-Spindle Drill Machine का Industrial use क्या है?
A5. एक साथ कई छेद करने के लिए Mass Production में इसका प्रयोग किया जाता है।


Quick Summary (Revision Notes)

  • Drill Machine छेद बनाने का मुख्य टूल है।
  • 6 प्रमुख प्रकार: Portable, Bench, Pillar, Radial, Gang, Multi-Spindle।
  • ITI students को इनका उपयोग, फीचर्स और सुरक्षा नियम जानना जरूरी है।
  • सही Drill Machine का चयन काम की गति और सटीकता बढ़ाता है।
  • Drill Machine तकनीक का ज्ञान किसी भी Fitter के करियर के लिए आधार है।

10 Short Question Answers

  1. Q: Drill Machine का मुख्य कार्य क्या है?
    A: धातु या लकड़ी में सटीक छेद करना।

  2. Q: Portable Drill किससे चलती है?
    A: बिजली या बैटरी से।

  3. Q: Bench Drill कहाँ लगाई जाती है?
    A: वर्क बेंच या टेबल पर।

  4. Q: Pillar Drill कौन-से वर्क में उपयोग होती है?
    A: भारी और गहरे छेद में।

  5. Q: Radial Drill की विशेषता क्या है?
    A: घूमने वाला आर्म और बड़ी पहुँच।

  6. Q: Gang Drill का फायदा क्या है?
    A: एक साथ कई ऑपरेशन करना।

  7. Q: Multi-Spindle Drill का उपयोग कहाँ होता है?
    A: Mass Production Industries में।

  8. Q: Drill Machine चलाने से पहले क्या पहनना चाहिए?
    A: Safety glasses और gloves।

  9. Q: Drill Machine में कौन-सा पार्ट छेद करता है?
    A: Drill Bit।

  10. Q: ITI छात्रों के लिए Drill Machine का ज्ञान क्यों जरूरी है?
    A: क्योंकि यह उनके फिटर ट्रेड का मूल उपकरण है।


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Understanding Limits Fits and Tolerances for ITI Fitter

Basic Concepts and Practical Guide for ITI Students

ITI Fitter विद्यार्थियों के लिए “Limits, Fits और Tolerances” विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि मशीन पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली में इनका सही ज्ञान ही सही फिटिंग सुनिश्चित करता है। जब दो पार्ट्स जैसे कि shaft (शाफ्ट) और hole (होल) को जोड़ा जाता है, तो उनके बीच की जगह या फिटिंग की सटीकता को नियंत्रित करने के लिए यही अवधारणाएँ उपयोग में आती हैं। इस लेख में हम सरल भाषा में इन सब टॉपिक्स – लिमिट्स, फिट्स और टॉलरेंस – को समझेंगे ताकि कोई भी ITI विद्यार्थी आसानी से इस विषय में महारत हासिल कर सके।


Fundamental Terms (The Basics)

Nominal Size (नाममात्र आकार)

नाममात्र आकार वह सामान्य मापा गया आकार होता है जो ड्राइंग या डिजाइन पर लिखा होता है। उदाहरण के लिए, यदि एक शाफ्ट का नाममात्र व्यास 50 mm लिखा है, तो इसका मतलब है कि शाफ्ट का वास्तविक आकार 50 mm के आसपास होगा। यह एक संदर्भ आकार (reference size) होता है, जिससे सारा गणना-कार्य शुरू होता है।
ITI विद्यार्थियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे समझें कि नाममात्र आकार परफेक्ट नहीं होता, बल्कि यह बस एक आदर्श या निर्धारित मान होता है।
याद रखने की ट्रिक: “Nominal size = नाम से जाने वाला आकार, पर वास्तविक नहीं।”

Basic Size (मूल आकार)

मूल आकार, नाममात्र आकार के बहुत करीब होता है और यह दो interacting parts (जैसे शाफ्ट और होल) के बीच समान रूप से लिया गया रेफरेंस साइज होता है। अधिकांश मामलों में नाममात्र और मूल आकार समान होते हैं।
उदाहरण: यदि एक शाफ्ट और होल दोनों का बेसिक साइज 50 mm है, तो उनका डिजाइन इसी मान के आसपास किया जाएगा।
ट्रिक: Basic size = दोनों पार्ट्स का आधार साइज।

Actual Size (वास्तविक आकार)

यह वास्तविक मापा गया आकार होता है जो मैन्युफैक्चरिंग के बाद पार्ट में प्राप्त होता है। यह आदर्श या डिजाइन किए गए साइज से थोड़ा ऊपर या नीचे हो सकता है।
उदाहरण के लिए, एक 50 mm शाफ्ट यदि 49.97 mm या 50.02 mm बन जाए, तो वह उसका Actual size कहलाएगा।
ट्रिक: Actual size = हकीकत में बना आकार।


Deviation (विचलन – Difference from Basic Size)

Deviation का मतलब है वास्तविक आकार और मूल आकार का अंतर। यह पॉजिटिव (+) या निगेटिव (–) हो सकता है।

  • जब किसी पार्ट का साइज बेसिक साइज से बड़ा हो तब Positive deviation
  • जब किसी पार्ट का साइज बेसिक साइज से छोटा हो तब Negative deviation

Deviation को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि यह बताता है कि ‘कितना त्रुटि (error)’ अनुमत है। मशीनी कार्यों में यह बहुत छोटा होता है – जैसे μ (माइक्रोन) के स्तर तक।

याद करने की ट्रिक: Deviation = Difference from Desire.


Tolerance (सहनशीलता या अनुमत अंतर)

Tolerance वह अधिकतम और न्यूनतम सीमाओं का अंतर है, जिसमें एक पार्ट का आकार मैन्युफैक्चरिंग के दौरान स्वीकार्य होता है।
उदाहरण: एक होल का साइज 50 +0.02 / −0.01 mm लिखा है, तो टॉलरेंस = 0.02 + 0.01 = 0.03 mm।टॉलरेंस का उद्देश्य यह है कि उत्पादन में कुछ मात्रा तक की गलतियों को अनुमति दी जा सके, ताकि लागत और समय बचाया जाए।
ITI छात्रों के लिए मुख्य बिंदु – टॉलरेंस जितनी छोटी होगी, मैन्युफैक्चरिंग उतनी अधिक सटीक और महंगी होगी।

याद करने की ट्रिक: Tolerance = “टोटल रेंज ऑफ एलाउड साइज।”


Fits (सबसे महत्वपूर्ण विषय)

जब दो पार्ट्स (जैसे होल और शाफ्ट) आपस में फिट होते हैं, तो उनके बीच की टाइटनेस या लूजनेस को Fit कहते हैं। यह सीधे टॉलरेंस और लिमिट्स पर निर्भर करता है।

1. Clearance Fit (क्लियरेंस फिट)

इस फिट में शाफ्ट छोटा और होल थोड़ा बड़ा होता है। इसलिए उनके बीच हमेशा थोड़ा गैप रहता है।
उदाहरण: बाइक के व्हील बेयरिंग में।
ट्रिक: Clearance = Comfortable Fit.

2. Interference Fit (इंटरफेरेंस फिट)

यह फिट बहुत टाइट होता है। इसमें शाफ्ट का आकार होल से बड़ा होता है, जिससे फिटिंग के लिए फोर्स लगती है।
उदाहरण: गियर या बियरिंग को शाफ्ट पर हॉट फिट करना।
ट्रिक: Interference = Inside जोर से फिट।

3. Transition Fit (ट्रांजिशन फिट)

यह बीच की स्थिति होती है जहाँ कभी-कभी क्लियरेंस रहती है, कभी इंटरफेरेंस।
उदाहरण: हब और शाफ्ट की ऐसी जगह जहाँ हल्का प्रेस फिट चाहिए।
ट्रिक: Transition = Tension वाला फिट।


Hole Basis vs. Shaft Basis System

Hole Basis System (होल बेसिस सिस्टम)

इस सिस्टम में होल का लोअर डेविएशन (न्यूनतम आकार) फिक्स रहता है और शाफ्ट के साइज को बदला जाता है।
यह सबसे ज्यादा उपयोगी और सामान्य प्रणाली है क्योंकि ड्रिल या बोरिंग टूल के साइज बदलना कठिन होता है।
ट्रिक: Hole fixed, Shaft adjusts.

Shaft Basis System

इसमें शाफ्ट का अपर डेविएशन फिक्स रखा जाता है और होल साइज को एडजस्ट किया जाता है।
यह तब उपयोगी है जब शाफ्ट के साइज में बदलाव कठिन या सीमित हो।
ट्रिक: Shaft fixed, Hole adjusts.


BIS System of Limits and Fits (भारतीय मानक प्रणाली)

BIS (Bureau of Indian Standards) ने Limits, Fits और Tolerances के लिए ISO मानकों के अनुसार एक मानकीकरण प्रणाली बनाई है।
इसमें सभी टॉलरेंस ग्रेड “IT01, IT0, IT1… IT16” के रूप में दिए गए हैं। IT ग्रेड जितना छोटा, उतनी अधिक सटीकता।
उदाहरण: IT5 बहुत सटीक काम के लिए, जबकि IT13 सामान्य वर्कशॉप काम के लिए।

यह मानकीकरण मशीन पार्ट्स को परस्पर बदलने योग्य (Interchangeable) बनाने में मदद करता है, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन आसान होता है।
ट्रिक: छोटा IT नंबर = ज्यादा Accuracy।


Quick Exam Revision Table

शब्द / टर्मअर्थयाद रखने की ट्रिक
Nominal Sizeनाम या डिजाइन पर लिखा आकारनाम से जाना साइज
Basic Sizeमुख्य या मानक आकारदोनों पार्ट्स का आधार
Actual Sizeमापा गया वास्तविक आकारहकीकत में बना साइज
Deviationबेसिक और वास्तविक में फर्कDifference from Desire
Toleranceअधिकतम-न्यूनतम साइज का अंतरटोटल रेंज ऑफ एलाउड साइज
Clearance Fitढीला फिटआसान मूवमेंट
Interference Fitटाइट फिटजोर से फिटिंग
Transition Fitबीच का फिटकभी टाइट, कभी लूज
Hole Basisहोल फिक्स, शाफ्ट बदलतासामान्य रूप से उपयोग
Shaft Basisशाफ्ट फिक्स, होल बदलताविशेष परिस्थितियों में उपयोग

10 Short Questions and Answers

  1. प्रश्न: Nominal size क्या होता है?
    उत्तर: ड्रॉइंग पर लिखा सामान्य आकार जो डिजाइन के लिए लिया जाता है।

  2. प्रश्न: Tolerance का मतलब क्या है?
    उत्तर: पार्ट के अधिकतम और न्यूनतम आकार के बीच का अंतर।

  3. प्रश्न: Clearance Fit क्या है?
    उत्तर: जहाँ शाफ्ट छोटा और होल बड़ा होता है, जिससे मूवमेंट संभव रहती है।

  4. प्रश्न: Interference Fit क्यों उपयोग किया जाता है?
    उत्तर: मजबूती और स्थायित्व के लिए टाइट फिटिंग हेतु।

  5. प्रश्न: Transition Fit का उपयोग कहाँ होता है?
    उत्तर: जहाँ हल्की प्रेस फिटिंग की जरूरत होती है।

  6. प्रश्न: Hole Basis System सबसे सामान्य क्यों है?
    उत्तर: क्योंकि होल के टूल्स फिक्स होते हैं, शाफ्ट को बदलना आसान है।

  7. प्रश्न: Deviation के प्रकार कितने हैं?
    उत्तर: दो – Positive और Negative।

  8. प्रश्न: IT Grades क्या दिखाते हैं?
    उत्तर: मशीनी सटीकता का स्तर।

  9. प्रश्न: Basic Size क्या दर्शाता है?
    उत्तर: वह रेफरेंस साइज जिससे लिमिट्स निर्धारित की जाती हैं।

  10. प्रश्न: टॉलरेंस कम करने से क्या प्रभाव पड़ता है?
    उत्तर: सटीकता बढ़ती है, लेकिन लागत भी बढ़ती है


इस लेख में हमने ITI Fitter विद्यार्थियों के लिए Limits, Fits और Tolerances को सरल भाषा में समझा। ये विषय न केवल परीक्षा के दृष्टिकोण से बल्कि व्यावहारिक कार्य में भी अत्यंत उपयोगी हैं। जब कोई विद्यार्थी इन सिद्धांतों को समझ लेता है, तो वह मशीन पार्ट्स को ज्यादा सटीकता से फिट कर पाता है, जिससे कार्य की गुणवत्ता बढ़ जाती है।
याद रखें — “सटीक माप ही सटीक फिट की कुंजी है”।

1st angle and 3rd Angle Projection आसान भाषा में

बेसिक समझ – Orthographic Projection क्या है?

किसी 3D ऑब्जेक्ट (त्रिआयामी वस्तु) को जब हम 2D (दो आयाम) में दिखाते हैं,
यानि उसकी लंबाई (Length), चौड़ाई (Width) और ऊँचाई (Height) को अलग-अलग दृश्यों (views) में दिखाते हैं,
तो उसे Orthographic Projection कहते हैं।

इसमें हम मुख्य रूप से 3 views बनाते हैं:

  1. Front View (सामने का दृश्य)
  2. Top View (ऊपर से दृश्य)
  3. Side View (बाएँ या दाएँ का दृश्य)

Principle Planes (मुख्य तल)

Principle Planes (मुख्य तल)

Orthographic projection में दो काल्पनिक plane माने जाते हैं:

  • Vertical Plane (VP) → जिस पर Front View बनती है।
  • Horizontal Plane (HP) → जिस पर Top View बनती है।

इन दोनों के बीच 90° का कोण होता है।
जब हम किसी ऑब्जेक्ट को इन planes के बीच रखते हैं, तो हमें अलग-अलग projection systems मिलते हैं।


Projection Systems के प्रकार

Projection Systems के प्रकार

मुख्य रूप से दो प्रकार के projection systems उपयोग किए जाते हैं:

  1. First Angle Projection (प्रथम कोण प्रक्षेपण)
  2. Third Angle Projection (तृतीय कोण प्रक्षेपण)

(Second और Fourth angle theoretically exist करते हैं पर प्रैक्टिकल में इस्तेमाल नहीं होते।)


1st Angle Projection (प्रथम कोण प्रक्षेपण)

🔹 Concept:

इसमें object को First Quadrant में रखा जाता है,
यानि कि object Vertical Plane और Horizontal Plane दोनों के सामने और ऊपर होता है।

Observer → Object → Plane

मतलब: देखने वाले की नज़र और ड्रॉइंग शीट के बीच object होता है


🔹 View Arrangement (दृश्यों की स्थिति):

View Typeकहाँ बनेगा (Drawing Sheet पर)
Front ViewCenter में (Vertical Plane पर)
Top ViewFront View के नीचे
Right Side ViewFront View के बाएँ

🔹 पहचान का Symbol:

पहचानने के लिए Truncated Cone Symbol (ISO Symbol) होता है —
इसमें बड़ा सर्कल बाएँ और छोटा सर्कल दाएँ होता है।
→ यह बताता है कि यह First Angle Projection है।


3rd Angle Projection (तृतीय कोण प्रक्षेपण)

🔹 Concept:

इसमें object को Third Quadrant में रखा जाता है,
यानि कि object Plane के पीछे और नीचे होता है।

Observer → Plane → Object

मतलब: देखने वाले की नज़र और ड्रॉइंग शीट के बीच plane होता है, और object उसके पीछे।


🔹 View Arrangement (दृश्यों की स्थिति):

View Typeकहाँ बनेगा (Drawing Sheet पर)
Front ViewCenter में
Top ViewFront View के ऊपर
Right Side ViewFront View के दाएँ

🔹 पहचान का Symbol:

उसी Truncated Cone Symbol में
बड़ा सर्कल दाएँ और छोटा सर्कल बाएँ होता है।
यह दर्शाता है कि यह Third Angle Projection है।


दोनों के बीच मुख्य अंतर (Difference Table)

विशेषता1st Angle Projection3rd Angle Projection
QuadrantFirst QuadrantThird Quadrant
View की स्थितिTop view नीचे बनती हैTop view ऊपर बनती है
Side view की स्थितिRight view बाएँ बनती हैRight view दाएँ बनती है
Object और Plane का संबंधObject Plane के सामनेObject Plane के पीछे
Rule Symbolबड़ा सर्कल बाएँबड़ा सर्कल दाएँ
Common inIndia, Europe (ISO standard)USA, Canada (ANSI standard)
Drawing sheet में देखने का तरीकाView उलट दिशा में रखे जाते हैंView उसी दिशा में रखे जाते हैं
Visualizationथोड़ा complexआसान और intuitive

How to Draw Step-by-Step (According to BIS/ISO Rule)

✳ Step 1: Draw Reference Line (XY Line)

Horizontal line बनाइए —
इसके ऊपर Front View और नीचे या ऊपर (projection system के अनुसार) Top View बनेगा।


✳ Step 2: Draw Front View

  • ऑब्जेक्ट को सामने से देखें।
  • इसकी ऊँचाई और चौड़ाई से Front View बनाइए।

✳ Step 3: Draw Top View

  • ऊपर से देखकर projection नीचे (1st angle) या ऊपर (3rd angle) ड्रॉ करें।
  • Projection lines (light thin lines) का उपयोग करें।

✳ Step 4: Draw Side View

  • Front View से 45° की projector line खींचें।
  • इससे Side View की ऊँचाई और चौड़ाई match करें।
  • Side View 1st angle में बाएँ, और 3rd angle में दाएँ बनेगा।

✳ Step 5: Dimensioning

  • Dimension lines parallel to view edges होनी चाहिए।
  • Use ISO/BIS dimensioning standard (SP 46:2003).

✳ Step 6: Projection Symbol

  • Right bottom corner में proper projection symbol डालें
    (यह बताता है कि drawing 1st angle है या 3rd angle)।

Professional Tips

✅ Always write projection type on title block —
“Projection: First Angle” or “Projection: Third Angle”

✅ Projection lines thin और construction lines faint रखें।
✅ Visible edges dark lines (thick continuous) से बनाएं।
✅ Hidden edges dashed lines से बनाएं।
✅ Center lines chain-dash से बनाएं।
✅ Always use proper scaling and labeling.


आसान याद रखने का तरीका

  • 1st Angle → Front के नीचे Top View
  • 3rd Angle → Front के ऊपर Top View
  • 1st Angle → Right View बाएँ
  • 3rd Angle → Right View दाएँ

👉 बस इतना याद रखिए, तो कभी गलती नहीं होगी।


निष्कर्ष (Conclusion)

बिंदुसारांश
Orthographic Projection3D ऑब्जेक्ट को 2D में दिखाने की तकनीक
1st Angle ProjectionISO/BIS Standard (India/Europe में प्रचलित)
3rd Angle ProjectionANSI Standard (USA/Canada में प्रचलित)
DifferenceTop और Side views की स्थिति में अंतर
Drawing RuleISO Symbol, Reference Line, Dimensions के अनुसार

Isometric और Orthographic Projection को आसान भाषा में

सबसे पहले समझो – ये दोनों क्या होते हैं

आइसोमेट्रिक प्रोजेक्शन (Isometric Projection) और ऑर्थोग्राफिक प्रोजेक्शन (Orthographic Projection) — दोनों ही तकनीकी ड्रॉइंग में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

  • आइसोमेट्रिक प्रोजेक्शन किसी वस्तु को तीन आयामों (3D) में दिखाता है, जहाँ तीनों अक्ष (X, Y, Z) समान कोण पर दिखाई देते हैं। यह ऑब्जेक्ट का वास्तविक आकार और रूप समझने में मदद करता है।
  • ऑर्थोग्राफिक प्रोजेक्शन वस्तु के विभिन्न दृश्य (2D Views) जैसे — Front View, Top View, Side View प्रस्तुत करता है, जिससे सटीक माप और निर्माण जानकारी मिलती है।

ड्रॉइंग बनाते समय कुछ सावधानियाँ ज़रूरी हैं — जैसे कोण सही रखना (30°)प्रोजेक्शन लाइनें समान रखनासही स्केल का उपयोग करना, और छिपी रेखाएँ (Hidden Lines) ठीक ढंग से दिखाना।

1. Isometric Projection (आइसोमेट्रिक प्रोजेक्शन)

यह एक 3D (त्रिआयामी) ड्राइंग होती है जिसमें किसी ऑब्जेक्ट को ऐसे दिखाया जाता है कि उसके तीनों साइड (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) बराबर रूप से दिखाई दें

Isometric Projection
  • इसमें तीन एक्सिस होती हैं:
    ➤ X-axis (30° दाएँ)
    ➤ Y-axis (30° बाएँ)
    ➤ Z-axis (ऊपर की ओर)

 इससे ऑब्जेक्ट थोड़ा झुका हुआ लगता है, और हम उसे 3D में “महसूस” कर सकते हैं।

2. Orthographic Projection (ऑर्थोग्राफिक प्रोजेक्शन)

यह 2D (दो आयामी) व्यू होता है। इसमें ऑब्जेक्ट के विभिन्न साइड को अलग-अलग दिखाया जाता है — जैसे:

  • Front View (सामने से)
  • Top View (ऊपर से)
  • Side View (बगल से)

 यह इंजीनियरिंग ड्रॉइंग या मशीन पार्ट्स बनाने में बहुत जरूरी होता है।

अब सीखो – इसे आसान तरीके से कैसे बनाएं

Isometric Projection आसान तरीका:

  1. सबसे पहले पेज पर 30° के दो लाइनें बनाओ (एक दाईं ओर, एक बाईं ओर)।
  2. बीच में एक वर्टिकल लाइन (ऊँचाई) बनाओ।
  3. अब अपने ऑब्जेक्ट के माप (length, width, height) के अनुसार लाइनें खींचो।
  4. सभी को जोड़ो — तुम्हारा ऑब्जेक्ट 3D दिखने लगेगा।
  5. अंदर की डिटेल दिखानी है तो faint lines (हल्की रेखाएँ) इस्तेमाल करो।

 टिप:

  • हमेशा 30° सेट स्केल का प्रयोग करो।
  • लाइनों को साफ और हल्का रखो ताकि गाइड लाइन्स मिटाई जा सकें।
  • पहले क्यूब या बॉक्स बनाना प्रैक्टिस करो, फिर कॉम्प्लेक्स शेप्स बनाओ।

Orthographic Projection आसान तरीका:

  1. एक सादा राइट-एंगल बॉक्स बनाओ (3 व्यूज़ के लिए जगह)।
  2. ऊपर की जगह में Top View, बीच में Front View, और साइड में Side View बनाओ।
  3. हर व्यू को एक-दूसरे से प्रोजेक्शन लाइन से जोड़ो।
  4. सब व्यूज़ को सही प्रपोर्शन में रखो।

टिप:

  • हर व्यू की लाइनें समान रूप से मिलनी चाहिए।
  • Hidden lines (डॉटेड) से अंदर के हिस्से दिखाओ।
  • पहले हमेशा Front View से शुरू करो, फिर Top और Side बनाओ।

याद रखने योग्य बातें:

  • Isometric = 3D Look
  • Orthographic = Real technical drawing
  • Isometric को समझना आसान, Orthographic से माप निकालना आसान
  • Practice is key  – रोज़ 1-2 ड्रॉइंग बनाओ

 Isometric और Orthographic Projection बनाते समय ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण सावधानियाँ (Precautions) दी गई हैं 👇

आइसोमेट्रिक प्रोजेक्शन (Isometric Projection) बनाते समय सावधानियाँ:

  1. कोण सही रखें (30°): हमेशा सेट स्क्वेयर या ड्राफ्टिंग मशीन से दोनों ओर 30° के कोण बनाएं। अनुमान से लाइन न खींचें।
  2. स्केल एडजस्ट करें: Isometric ड्रॉइंग में actual scale नहीं बल्कि isometric scale (0.816) इस्तेमाल होता है।➤ मतलब: 100mm की लंबाई ड्रॉइंग में 81.6mm होगी।
  3. लाइनें हल्की खींचें (Construction Lines): शुरुआत में सभी गाइड लाइनें बहुत हल्की बनाएं ताकि बाद में साफ-साफ मिटाई जा सकें।
  4. समान माप रखें: X, Y, और Z तीनों दिशाओं में समान माप रखें वरना ड्रॉइंग तिरछी या विकृत लगेगी।
  5. साफ-सुथरी लाइनें बनाएं: सभी मुख्य लाइनें गहरी और सीधी बनाएं ताकि ऑब्जेक्ट 3D और क्लियर दिखे।
  6. अंदर की लाइनें (Hidden edges) केवल ज़रूरत हो तभी दिखाएं। बहुत ज़्यादा दिखाने से चित्र भ्रमित कर सकता है।

ऑर्थोग्राफिक प्रोजेक्शन (Orthographic Projection) बनाते समय सावधानियाँ:

  1. व्यू का सही क्रम रखें: पहले Front View, फिर Top View, और उसके बाद Side View बनाएं।
  2. Projection Lines सीधी और समान रखें: व्यूज़ को जोड़ने वाली projection lines सीधी और parallel होनी चाहिए।
  3. समान माप (Proportion): तीनों व्यू एक-दूसरे से perfectly align होने चाहिए — ताकि एक व्यू का आकार दूसरे में मेल खाए।
  4. Hidden Lines (छिपी रेखाएँ): अंदर के हिस्से दिखाने के लिए dotted lines का प्रयोग करें। लेकिन बहुत अधिक न बनाएं।
  5. Labels और Dimensions: हर व्यू को label करें — जैसे Front View (FV), Top View (TV), Side View (SV)। Dimension lines को thin और neat रखें।
  6. Line Type और Weight: Visible edges → dark continuous line Hidden edges → dotted line Center lines → long-short-long dash
Bonus Tips:
  • हमेशा शुरुआत पेंसिल (HB या 2H) से करें।
  • रबर से मिटाने के बाद ड्रॉइंग पेपर पर दाग न पड़ें।
  • Scale और Protractor का सही प्रयोग करें।
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ITI Construction of Building and Foundation Mock Test

ITI Draftsman Civil exams in Construction of Building and Foundation with our specialized Mock Test. Dive into comprehensive practice, refine your skills, and ensure success with our targeted questions. Get ready to excel in the intricate aspects of construction and foundation work, advancing your proficiency in ITI Draftsman Civil studies

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Construction of Building and Foundation

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किसी भवन संरचना में प्लिंथ बीम का क्या कार्य है?IWhat is the function of a plinth beam in a building structure?

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भवन डिज़ाइन में पैरापेट का क्या उद्देश्य है?IWhat is the purpose of a parapet in building design?

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आवासीय निर्माण में फ़्रेमिंग के लिए आमतौर पर निम्नलिखित में से किस सामग्री का उपयोग किया जाता है?IWhich of the following materials is commonly used for framing in residential construction?

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किसी भवन की नींव को वॉटरप्रूफ करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी सामान्य विधि है?IWhich of the following is a common method for waterproofing a building foundation?

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किसी भवन संरचना में लिंटेल का उद्देश्य क्या है?IWhat is the purpose of a lintel in a building structure?

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किसी भवन के लिए स्थान का चयन करने में निम्नलिखित में से कौन सा एक महत्वपूर्ण कारक है?IWhich of the following is a critical factor in selecting the location for a building?

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चिनाई वाली दीवार में हेडर का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?IWhat is the primary purpose of a header in a masonry wall?

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किस प्रकार की छत अपनी तीव्र ढलान और त्रिकोणीय आकार के लिए जानी जाती है?IWhich type of roof is known for its steep slope and triangular shape?

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निर्माण में, एचवीएसी का क्या अर्थ है?IIn construction, what does HVAC stand for?

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कंक्रीट निर्माण में फॉर्मवर्क का उद्देश्य क्या है?IWhat is the purpose of formwork in concrete construction?

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निर्माण प्रक्रिया के दौरान भवन निरीक्षक की क्या भूमिका होती है?IWhat is the role of a building inspector during the construction process?

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सपाट छत डिज़ाइन का उपयोग करने का निम्नलिखित में से कौन सा नुकसान है?IWhich of the following is a disadvantage of using a flat roof design?

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15. किस प्रकार की नींव कमजोर मिट्टी वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है जो भारी भार का सामना नहीं कर सकती है?I15. Which type of foundation is suitable for areas with weak soil that cannot support heavy loads?

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किस निर्माण विधि में साइट पर पूर्व-निर्मित घटकों को जोड़ना शामिल है?IWhich construction method involves assembling pre-fabricated components on-site?

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निम्नलिखित में से कौन सा हरित भवन अभ्यास है जिसका उद्देश्य ऊर्जा खपत को कम करना है?IWhich of the following is a green building practice aimed at reducing energy consumption?

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भूकंप प्रतिरोधी निर्माण के लिए निम्नलिखित में से कौन सी आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली विधि है?IWhich of the following is a commonly used method for earthquake-resistant construction?

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निर्माण में, पीपीई का संक्षिप्त रूप क्या है?IIn construction, what does the acronym PPE stand for?

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धातु के दो टुकड़ों को पिघलाकर और एक साथ जोड़कर जोड़ने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?IWhat is the term for the process of joining two pieces of metal by melting and fusing them together?

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किसी भवन में नींव का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?IWhat is the primary purpose of a foundation in a building?

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निर्माण में "क्योरिंग" शब्द का क्या अर्थ है?IWhat does the term "Curing" refer to in construction?

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चिनाई वाली दीवार में वेप होल का उद्देश्य क्या है?IWhat is the purpose of a weep hole in a masonry wall?

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किस प्रकार की निर्माण सामग्री अपनी अग्नि प्रतिरोध और उच्च संपीड़न शक्ति के लिए जानी जाती है?IWhich type of construction material is known for its fire resistance and high compressive strength?

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किसी भवन में डैम्प प्रूफ़ कोर्स (डीपीसी) का उद्देश्य क्या है?IWhat is the purpose of a damp proof course (DPC) in a building?

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निर्माण में बिल्डिंग कोड का उद्देश्य क्या है?IWhat is the purpose of a building code in construction?

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20. बाहरी लकड़ी को क्षय और कीड़ों से बचाने के लिए निम्नलिखित में से कौन सा एक सामान्य तरीका है?I20. Which of the following is a common method for protecting exterior wood from decay and insects?

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Types of Hammer Use and size : Hammer ke prakar aur prayog

हथौड़े (Types of Hammer in Hindi) एक हाथ के उपकरण हैं जो सदियों से मानव सभ्यता के लिए आवश्यक रहे हैं। वे विभिन्न प्रकारों में आते हैं, प्रत्येक को विशिष्ट कार्यों (Uses of Hammer in Hindi)के लिए डिज़ाइन किया गया है, और विभिन्न अनुप्रयोगों के अनुरूप कई (Sizes of Hammer in Hindi) आकारों में उपलब्ध हैं। हम विभिन्न प्रकार के हथौड़ों, उनके उपयोग और आमतौर पर बाजार में पाए जाने वाले विभिन्न आकारों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

Parts of Hammer

हथौड़ा एक सरल लेकिन आवश्यक उपकरण है जिसमें कई प्रमुख घटक होते हैं। हथौड़े के हिस्सों को समझने से उपयोगकर्ताओं को विभिन्न कार्यों के लिए इसका प्रभावी ढंग से और सुरक्षित रूप से उपयोग करने में मदद मिल सकती है। यहाँ हथौड़े के मुख्य भाग हैं

Face

चेहरा सिर की सपाट सतह है जो प्रहार की जाने वाली वस्तु से सीधा संपर्क बनाती है। यह सिर का वह भाग है जिसका उपयोग वार करने के लिए किया जाता है।

Peen

कुछ प्रकार के हथौड़ों में, जैसे बॉल पीन या क्रॉस पीन हथौड़ों में, पीन सपाट चेहरे के विपरीत गोल, पच्चर के आकार के सिरे को संदर्भित करता है। इसका उपयोग धातु को आकार देने या रिवेटिंग जैसे विशिष्ट कार्यों के लिए किया जाता है।

Handle

हैंडल हथौड़े का लंबा, आमतौर पर लकड़ी या फाइबरग्लास शाफ्ट होता है। यह हथौड़े को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए पकड़ और उत्तोलन प्रदान करता है। आराम और बेहतर नियंत्रण के लिए कुछ हैंडल में रबर या एर्गोनोमिक ग्रिप होती है।

Eye Hole

आई हथौड़े के हेड में वह छेद है जहां हैंडल डाला जाता है और सुरक्षित किया जाता है। यह आम तौर पर एक सही माप फिट सुनिश्चित करने के लिए पतला होता है, जिससे उपयोग के दौरान सिर को ढीला होने से बचाया जा सके।

Cheeks

हथौड़े के सिर के किनारे हैं, जो फेस से आई तक फैले हुए हैं। वे सिर को अतिरिक्त ताकत और सहारा प्रदान करते हैं।

Neck

फेस के पास का भाग जो थोड़ा टेढ़ा भाग होता है उसे नेक कहते हैं।

Types of Hammer in Hindi

Claw Hammer (क्लॉ हथौड़ा)

Claw Hammer

यह एक विशेष प्रकार का हैमर है इसके एक सिरे पर गोल फेस बना होता है और दूसरे सिरे पर पीन को हैंडल की ओर तिरछा कर दिया जाता है जिसके केंद्र में एक स्लॉट काट दिया जाता है इस स्लॉट की सहायता से कील को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है (Claw Hammer in Hindi)

Uses of Claw Hammer

सामान्य लकड़ी के काम जैसे फ्रेमिंग, निर्माण और घरेलू मरम्मत के लिए।

Ball Peen Hammer (बॉल पीन हथौड़ा)

Ball Peen Hammer

बॉल पीन (Ball Peen Hammer in Hindi)हथौड़े के एक सिरे पर गोल सिर और दूसरे सिरे पर चपटा चेहरा होता है। इसकी विशेषता इसकी पीन है, जो एक गोल, सपाट सतह है।

Uses of Ball Peen Hammer

आमतौर पर धातु को आकार देने और रिवेटिंग जैसे कार्यों के लिए धातु में उपयोग किया जाता है

Sledge Hammer

Sledge Hammer

स्लेज हैमर लंबे हैंडल वाला एक बड़ा, भारी-भरकम हथौड़ा होता है। इसका एक तरफ चपटा, चौकोर सिर होता है।

Uses of Sledge Hammer

भारी-भरकम कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जैसे तोड़ फोड़ कार्य, कंक्रीट तोड़ना और बड़े स्टेक्स लगाना।

Cross Peen Hammer (क्रॉस पीन हैमर)

Cross Peen Hammer

क्रॉस-पीन हथौड़े में पच्चर के आकार का, पतला सिर होता है, जिसमें एक सपाट चेहरा और एक छेनी जैसा चेहरा होता है।

Cross Peen Hammer Uses

अक्सर धातुओं को आकार देने और बनाने के लिए लोहार और धातु के कार्य में उपयोग किया जाता है।

Mallet Hammer (लकड़ी का हथौड़ा)

Mallet Hammer

हथौड़े का सिर बड़ा होता है, आमतौर पर लकड़ी का बना होता है , और इसका उपयोग अक्सर नरम, बिना चोट के प्रहार के लिए किया जाता है।

Mallet Hammer Uses

मेटल के पतली चादरों के कार्य में , नक्काशी और जोड़ों को जोड़ने जैसे बक्शे के काम के लिए।

Rubber Mallet (रबड़ का हथौड़ा)

Rubber Hammer

मैलेट के समान, लेकिन रबर या प्लास्टिक के सिर के साथ। यह एक कम चोट प्रहार प्रदान करता है, जो इसे नाजुक सामग्रियों के लिए उपयुक्त बनाता है।

Rubber Hammer Uses

लकड़ी के काम, ऑटोमोटिव कार्य और फर्नीचर को असेंबल करने के लिए उपयोग किया जाता है।

Dead Blow Hammer (डेड ब्लो हथौड़ा)

Dead Blow Hammer

डेड ब्लो हथौड़े में शॉट या रेत से भरा एक खोखला सिर होता है। यह रिबाउंड को कम करता है और अधिक नियंत्रित, गैर-हानिकारक स्ट्राइक प्रदान करता है।

Dead Blow Hammer

सटीक और नियंत्रित बल की आवश्यकता वाले कार्यों के लिए ऑटोमोटिव और धातु उद्योगों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

हथौड़े का उपयोग करते समय ध्यान रखने योग्य कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां (Uses of Hammer Safety)

दुर्घटनाओं को रोकने और कार्यों को कुशलतापूर्वक पूरा करने को सुनिश्चित करने के लिए हथौड़े का सुरक्षित रूप से उपयोग करना महत्वपूर्ण है। हथौड़े का उपयोग करते समय ध्यान रखने योग्य कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां यहां दी गई हैं:

  1. सुरक्षा गियर पहनें:
    • हमेशा उचित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) पहनें जैसे सुरक्षा चश्मा, दस्ताने और, यदि आवश्यक हो, कान की सुरक्षा। यह उड़ने वाले मलबे, धूल और संभावित हाथ की चोटों से बचाने में मदद करता है।
  2. कार्य के लिए सही हथौड़ा चुनें:
    • ऐसा हथौड़ा चुनें जो मौजूदा विशिष्ट कार्य के लिए उपयुक्त हो। अलग-अलग हथौड़ों को अलग-अलग उद्देश्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसलिए सही प्रकार का उपयोग करने से इष्टतम परिणाम सुनिश्चित होंगे।
  3. हथौड़े का निरीक्षण करें:
    • उपयोग करने से पहले, क्षति के किसी भी लक्षण के लिए हथौड़े का निरीक्षण करें, जैसे कि ढीला सिर या हैंडल, दरारें, या सिर में चिप्स। क्षतिग्रस्त हथौड़े का प्रयोग न करें.
  4. मजबूत पकड़ बनाए रखें:
    • हथौड़े को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ें, एक हाथ को नियंत्रण के लिए हैंडल के आधार के पास और दूसरे हाथ को सटीकता के लिए सिर के पास रखें।
  5. नियंत्रित प्रहारों का प्रयोग करें:
    • अत्यधिक परिश्रम या संतुलन खोने से बचने के लिए पूरे झूले के दौरान हथौड़े पर नियंत्रण बनाए रखें। बेतहाशा मत घूमें या अत्यधिक बल का प्रयोग न करें।
  6. प्रभावित सतह की जाँच करें:
    • सुनिश्चित करें कि हथौड़े का चेहरा साफ है और किसी भी दोष या विदेशी वस्तु से मुक्त है जो आपके वार की सटीकता को प्रभावित कर सकता है।
  7. अपने परिवेश का ध्यान रखें:
    • अपने परिवेश के प्रति सचेत रहें और सुनिश्चित करें कि जहां आप काम कर रहे हैं वहां आसपास कोई रुकावट या लोग न हों। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्षेत्र को साफ़ करें.
  8. खुद को सही स्थिति में रखें:
    • अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई पर फैलाकर स्थिर स्थिति में खड़े हो जाएं। यह एक संतुलित रुख प्रदान करता है और हथौड़ा घुमाते समय संतुलन खोने का जोखिम कम करता है।
  9. कार्य पर ध्यान दें:
    • ध्यान भटकाने से बचें और हाथ में लिए काम पर अपनी एकाग्रता बनाए रखें। ध्यान भटकने से दुर्घटना हो सकती है।
  10. वर्कपीस को सुरक्षित करें:
    • यदि संभव हो, तो जिस सामग्री पर आप काम कर रहे हैं, उसे हथौड़े मारने के दौरान हिलने या हिलने से रोकने के लिए सुरक्षित करें। यह अधिक सटीक और नियंत्रित हमले सुनिश्चित करता है।
  11. अतिशयोक्ति से बचें:
    • किसी लक्ष्य पर प्रहार करने के लिए आगे न बढ़ें या न खिंचें। इसके बजाय, अपनी स्थिति बदलें ताकि आप आराम से और सुरक्षित रूप से हमला कर सकें।
  12. सही तकनीक का प्रयोग करें:
    • विभिन्न कार्यों के लिए उचित हथौड़े मारने की तकनीक सीखें और लागू करें। इसमें कार्य के लिए आवश्यक उचित कोण और बल को समझना शामिल है।
  13. कभी भी हथौड़े का प्रयोग प्राई बार के रूप में न करें:
    • हथौड़ों को चुभने या उठाने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है। ऐसे कार्यों के लिए हथौड़े का उपयोग करने से क्षति और संभावित दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
  14. हथौड़ों को सुरक्षित रूप से रखें:
    • जब उपयोग में न हो, तो हथौड़ों को एक निर्दिष्ट क्षेत्र में, उच्च यातायात वाले क्षेत्रों से दूर और बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  15. कठोर या भंगुर सामग्री पर प्रहार करने से बचें:
    • हथौड़े कठोर स्टील, कांच, या अन्य अत्यंत भंगुर सामग्री पर प्रहार करने के लिए नहीं होते हैं, क्योंकि प्रभाव पड़ने पर वे टूट सकते हैं या टूट सकते हैं।

क्लॉ हथौड़े का उपयोग किस लिए किया जाता है?

क्लॉ हथौड़े का उपयोग मुख्य रूप से लकड़ी में कील ठोकने और इसके क्लॉ के आकार के सिरे के कारण कील निकालने के लिए किया जाता है।

बॉल पीन हथौड़े उपयोग किस लिए किया जाता है?

बॉल पीन हथौड़े का उपयोग धातु के काम में आकार देने, काटने और पंचिंग करने जैसे कार्यों के लिए किया जाता है।

स्लेज हैमर का क्या उपयोग है?

स्लेजहैमर का उपयोग आम तौर पर भारी-भरकम कार्यों जैसे विध्वंस, कंक्रीट को तोड़ने और बड़े खूंटों को चलाने के लिए किया जाता है।

अधिकतम नियंत्रण और सुरक्षा के लिए आपको हथौड़े को कैसे पकड़ना चाहिए?

नियंत्रण के लिए हथौड़े को एक हाथ से हैंडल के आधार के पास और दूसरे हाथ से सटीकता के लिए सिर के पास पकड़ें।

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Types of Chisel in Workshop and Their Uses in Hindi

छेनी धातु chisel meaning in Hindi के ब्लेड के सिरे पर नुकीले किनारों वाले काटने के उपकरण हैं। वे अलग-अलग उद्देश्यों के लिए विभिन्न प्रकारों, आकारों, डिज़ाइनों, शैलियों और आकारों में आते हैं। छेनी के प्रकार का चुनाव मुख्य रूप से वर्कपीस पर निर्भर करता है। छेनी लकड़ी के काम, धातु के काम और चिनाई में एक शक्तिशाली उपकरण है। यह लेख मुख्य प्रकार की छेनी, उनका उपयोग कैसे करें, और छेनी किन विभिन्न सामग्रियों के साथ काम कर सकती है

Definition of Chisel in Hindi

छेनी एक हाथ का उपकरण है जिसमें धातु के ब्लेड के अंत में एक तेज धार होती है, जिसका उपयोग लकड़ी, धातु या पत्थर जैसी विभिन्न सामग्रियों को तराशने, काटने या आकार देने के लिए किया जाता है। छेनी आमतौर पर कठोर स्टील से बनी होती है और इसमें पकड़ने के लिए एक हैंडल होता है। वे विभिन्न आकृतियों और आकारों में आते हैं, प्रत्येक को विशिष्ट कार्यों और सामग्रियों के लिए डिज़ाइन किया गया है। छेनी का उपयोग व्यापक रूप से लकड़ी के काम, धातु के काम और चिनाई में किया जाता है।

Parts of Chisel in Hindi

छेनी एक सरल लेकिन प्रभावी काटने का उपकरण है जिसका उपयोग आमतौर पर लकड़ी के काम, धातु के काम और चिनाई में किया जाता है। इसमें कई प्रमुख भाग शामिल हैं:

Parts of Chisel in Hindi

ब्लेड (Blade):

ब्लेड छेनी की धार है। यह आमतौर पर कठोर स्टील से बना होता है। ब्लेड का आकार और कोण छेनी के प्रकार के आधार पर भिन्न हो सकता है।

बेवेल (Bevel):

बेवल ब्लेड के एक तरफ ढलान वाली या कोणीय सतह है। यह छेनी की धार बनाती है। बेवल का कोण छेनी के काटने के तरीके और विभिन्न सामग्रियों के लिए इसकी उपयुक्तता को प्रभावित करता है।

पीछे का भाग (Back):

पिछला भाग बेवल के विपरीत ब्लेड का सपाट, बिना नुकीला भाग है। यह छेनी को समर्थन और स्थिरता प्रदान करता है।

हैंडल (Handle):

हैंडल वह पकड़ है जिसे उपयोगकर्ता पकड़ता है। यह आमतौर पर लकड़ी, प्लास्टिक या किसी अन्य मजबूत सामग्री से बना होता है। यह छेनी को प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए नियंत्रण और उत्तोलन प्रदान करता है।

तांग (Tang):

टैंग ब्लेड का वह भाग है जो हैंडल तक फैला होता है। इसे आमतौर पर हैंडल में फेरूल या अन्य बन्धन विधि द्वारा सुरक्षित किया जाता है।

फेरूल (Ferrule):

फेरूल एक धातु या प्लास्टिक का कॉलर है जो हैंडल में छेनी के स्पर्श को सुरक्षित करता है। यह स्थिरता प्रदान करता है और टांग को ढीला होने या फिसलने से रोकता है।

स्ट्राइकिंग कैप (वैकल्पिक) (Striking Cap):

कुछ छेनी, विशेष रूप से जो चिनाई या भारीभरकम अनुप्रयोगों में उपयोग की जाती हैं, उनके हैंडल के सिरे पर एक आकर्षक टोपी हो सकती है। यह अतिरिक्त बल के लिए छेनी को हथौड़े या हथौड़े से मारने की अनुमति देता है।

बोल्स्टर (कुछ प्रकारों में) (Bolster):

चिनाई या पत्थर के काम के लिए उपयोग की जाने वाली छेनी में, बोल्स्टर ब्लेड के शीर्ष पर एक चौड़ा, सपाट क्षेत्र होता है। यह उन कार्यों के लिए अतिरिक्त ताकत प्रदान करता है जिनमें अधिक बल की आवश्यकता होती है।

गार्ड (वैकल्पिक) (Guard):

कुछ छेनी में उपयोगकर्ता के हाथ को गलती से ब्लेड पर फिसलने से बचाने के लिए एक हैंडगार्ड या हैंडस्टॉप होता है, जो आमतौर पर धातु या प्लास्टिक से बना होता है।

कंधे (कुछ प्रकारों में) (Shoulder):

कुछ छेनी में, विशेष रूप से लकड़ी के काम के लिए उपयोग की जाने वाली छेनी में, ब्लेड के शीर्ष के पास एक कंधा हो सकता है। यह उपयोग के दौरान अतिरिक्त सहायता और स्थिरता प्रदान करता है।

याद रखें, छेनी को सावधानीपूर्वक संभालना और उनके इच्छित उद्देश्य के अनुसार उनका उपयोग करना महत्वपूर्ण है। दुर्घटनाओं को रोकने और साफ, सटीक कट प्राप्त करने के लिए हमेशा सुनिश्चित करें कि ब्लेड तेज और अच्छी स्थिति में है।

छेनी के प्रकार (Types of Chisel in Hindi)

Bevel-edged chisel in Hindi

Bevel-edged chisel in Hindi

बेवल-किनारे वाली छेनी एक मजबूत छेनी है जो न तो बहुत लंबी होती है और न ही बहुत छोटी होती है। इसमें एक बेवलदार या कोणीय पक्ष और एक सीधा किनारा होता है। बेवेल्ड और सीधे किनारे डोवेटेल जोड़ों तक अधिकतम पहुंच की अनुमति देते हैं और कोनों तक पहुंच को आसान बनाते हैं।

Bench chisel

Bench chisel

बेंच छेनी (Bench Chisel) एक प्रकार की छेनी है जो आमतौर पर लकड़ी के काम के लिए उपयोग होती है। यह एक प्लेन ब्लेड के साथ एक सिर वाली धार वाली छेनी होती है जो आसानी से लकड़ी को शेप देने और विभिन्न डिजाइन में कटाई करने के काम में उपयोग होती है। बेंच छिल आमतौर पर कारीगरों और वुडवर्कर्स द्वारा उपयोग होती है जो लकड़ी के उत्पादों को बनाने के लिए काम करते हैं।

Firmer Chisel

Firmer Chisel

जैसा कि नाम से पता चलता है, मजबूत छेनी में भारी-भरकम काम में उपयोग के लिए स्टील जैसी कठोर सामग्री शामिल होती है। वे सबसे पुराने छेनी मॉडलों में से एक हैं। उनके पास एक आयताकार क्रॉस-सेक्शन और 20-डिग्री बेवल वाला एक ब्लेड है। अपने आकार के कारण, वे अविश्वसनीय रूप से तेज़ 90-डिग्री कोने बनाने के लिए आदर्श हैं। एक मजबूत छेनी के हैंडल में हथौड़े या हथौड़े के प्रहार को झेलने के लिए दृढ़ लकड़ी या कठोर प्लास्टिक शामिल होता है।

Mortise Chisel

Mortise Chisel

एक प्रकार की वस्त्रकुशली है जो लकड़ी के उत्पादों में गहराई करने के काम में उपयोग होती है। यह छेनी आमतौर पर एक लम्बी धार वाली होती है जो गहरे खुदाई काम के लिए डिज़ाइन की जाती है। मोर्टाइस छिल वुडवर्किंग (लकड़ी के काम) में उपयोग होती है, जब आपको लकड़ी की खुदाई करनी होती है तो इसका प्रयोग करते है

Bolster chisel

Bolster chisel

इसे ईंट की छेनी के रूप में भी जाना जाता है, एक बोल्स्टर छेनी सीधी रेखाओं में ईंटों, धातु या पत्थरों को काटती है। उनके पास एक सपाट हैंडल और एक मजबूत बेवेल्ड किनारे वाला ब्लेड होता है जो हथौड़े या हथौड़े की मार से अधिकांश कठोर सामग्रियों को काट देता है।

Butt Chisel

बट छेनी में विशिष्ट रूप से छोटा ब्लेड होता है। यह मजबूत या बेंच छेनी से प्राप्त होता है और इसमें बेवेल्ड और सीधे काटने वाले दोनों किनारे होते हैं। ये बढ़ईगीरी में बट और टिका लगाने के लिए उत्कृष्ट हैं। इसके अलावा, वे किसी वर्कपीस के दुर्गम या तंग क्षेत्रों में काम करते समय उपयोगी होते हैं।

Concrete Chisel

Concrete Chisel

एक विशेष प्रकार की वस्त्रकुशली है जो सामान्यत: कॉन्क्रीट या सीमेंट के वस्तुओं को काटने और आकार देने के काम में उपयोग होती है। यह छेनी आमतौर पर एक प्लेन धार वाली होती है जो सख्त या ठोस सामग्री को काटने में मदद करती है। इसका उपयोग निर्माण कार्यों में और अन्य सीमेंट आधारित कामों में किया जाता है।

Cold Chisel

Cold Chisel

एक विशेष प्रकार की वस्त्रकुशली है जो आमतौर पर धातु या सीमेंट जैसे ठोस सामग्री को काटने के काम में उपयोग होती है। यह छेनी विशेष रूप से हामर या मॉलेट के साथ इस्तेमाल की जाती है ताकि ठोस सामग्री को काटा जा सके। इसका नाम “कोल्ड” छेनी इसलिए है क्योंकि इसे सामान्यतः ठंडे हाथों में पकड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

Paring chisel

Paring chisel

पेरिंग छेनी में एक हल्का, पतला ब्लेड और 15 डिग्री के कोण पर एक बेवल ग्राउंड के साथ एक काटने वाला किनारा होता है। ब्लेड मजबूत छेनी की तुलना में अधिक लंबा होता है, और हैंडल अलग होता है। एक छीलन वाली छेनी हल्के काम के लिए होती है और इसलिए इसे हथौड़े या हथौड़े से मारने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है।

Dovetail chisel

Dovetail chisel

डोवेटेल छेनी डोवेटेल बनाती हैं और जोड़ों को खत्म करती हैं। इनमें 20-30 डिग्री पर बेवल वाले किनारों के साथ एक लंबा ब्लेड और कटिंग एज होता है। अपनी लंबी लंबाई के कारण, वे जोड़ों की सफाई और धार तेज करने के लिए आदर्श हैं।

Slick chisel

Slick chisel

चिकनी छेनी लगभग छीलने वाली छेनी के समान ही काम करती है लेकिन एक चौड़े और सीधे ब्लेड के साथ। लकड़ी के काम से लकड़ी के पतले टुकड़ों को अलग करते समय आरामदायक पकड़ के लिए उनके पास एक अलग बेसबॉल बैट के आकार का हैंडल होता है।

छेनी का वर्गीकरण (Classification of Chisel)

छेनी को विभिन्न कारकों के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है, जिसमें उनका उद्देश्य, जिस सामग्री के लिए उन्हें डिज़ाइन किया गया है और उनकी विशिष्ट विशेषताएं शामिल हैं। यहां छेनी के कुछ सामान्य वर्गीकरण दिए गए हैं:

उद्देश्य के आधार पर:

लकड़ी पर काम करने वाली छेनी:

ये छेनी लकड़ी के साथ काम करने से संबंधित कार्यों के लिए डिज़ाइन की गई हैं। वे विभिन्न प्रकारों में आते हैं जैसे बेंच छेनी, मोर्टिस छेनी और लकड़ी पर नक्काशी वाली छेनी।

धातु पर काम करने वाली छेनी:

ये छेनी धातु के साथ काम करने के लिए बनाई गई हैं। इनमें ठंडी धातु को काटने के लिए ठंडी छेनी या धातु को आकार देने और काटने के लिए अन्य विशेष छेनी शामिल हो सकती हैं।

चिनाई वाली छेनी:

ये छेनी विशेष रूप से ईंट, पत्थर या कंक्रीट जैसी कठोर सामग्री के साथ काम करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। इनमें चिनाई वाली छेनी, बोल्स्टर और स्कच छेनी जैसे उपकरण शामिल हैं।

ब्लेड आकार के आधार पर:

चपटी छेनी:

इनमें एक सपाट, सीधी धार वाला ब्लेड होता है और इसका उपयोग काटने, छीलने या शेविंग जैसे कार्यों के लिए किया जाता है।

गॉज:

इनमें एक घुमावदार या स्कूप्ड ब्लेड होता है और आमतौर पर गोल सतहों को तराशने और आकार देने के लिए उपयोग किया जाता है।

नुकीली छेनी:

इनका सिरा नुकीला होता है और इनका उपयोग अक्सर विस्तृत कार्य के लिए किया जाता है, विशेष रूप से चिनाई और पत्थर की नक्काशी में।

सामग्री के आधार पर:

लकड़ी की छेनी:

ये विशेष रूप से लकड़ी के साथ काम करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। इनमें बेंच, मोर्टिज़, पेरिंग और लकड़ी पर नक्काशी वाली छेनी जैसे विभिन्न प्रकार शामिल हैं।

धातु की छेनी:

इन्हें धातु के साथ काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें ठंडी छेनी और धातु को आकार देने के लिए विशेष उपकरण शामिल हैं।

पत्थर की छेनी:

ये पत्थर या कंक्रीट को तराशने और आकार देने के लिए होती हैं। उनमें विभिन्न प्रकार की छेनी, जैसे हीरे की नोक वाली छेनी और चिनाई वाली छेनी शामिल हो सकती हैं।

विशेष छेनी:

खराद छेनी:

इन्हें खराद मशीन पर उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका उपयोग अक्सर लकड़ी बनाने में किया जाता है।

चिकनी छेनी:

लकड़ी के ढांचे और बड़े पैमाने पर लकड़ी के काम में उपयोग की जाने वाली भारीभरकम छेनी।

विभाजन छेनी:

लकड़ी पर खांचे, मोती, या अन्य सजावटी विशेषताएं बनाने के लिए लकड़ी की कटाई में उपयोग किया जाता है।

कार्बाइड टिप वाली छेनी:

इनमें कार्बाइड टिप होती है, जो इन्हें कंक्रीट या कुछ प्रकार के पत्थर जैसी कठोर सामग्री को काटने के लिए उपयुक्त बनाती है।

याद रखें, छेनी का चुनाव उस विशिष्ट कार्य और सामग्री पर निर्भर करता है जिसके साथ आप काम कर रहे हैं। सही प्रकार की छेनी का उपयोग करने से सुरक्षा और सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित होते हैं।

चिपिंग आपरेशन (Chipping Operation)

Angle of A Chisel

चिपिंग एक आपरेशन है जिसमें सरफेस से चिप्स के रूप में धातु की परत को दूर किया जाता है। सही प्वाइंट ऐंगल और झुकाव का कोण सही रेक ऐंगल व कलीयरेंस ऐंगल को बनाते हैं। चीजेल के झुकाव को मापा नहीं जाता है बल्कि कुशल कारीगर के द्वारा इसे महसूस किया जाता है तथा हाथ की मोशन के साथ एडजस्ट किया जाता है।

Chisel Unable to Peretrate the job

यदि क्लीयरेंस बहुत कम या जीरो होगा हो रेक ऐंगल बढ़ जाएगा, तब कटिंग ऐंगल जॉब में पेनेट्रेट नहीं कर सकता जिसके कारण चीजल स्लिप होने लगती है।

Chisel digs in the job

यदि क्लीयरेंस बहुत अधिक होगा तो रेक ऐंगल घट जाएगा, तब कटिंग ऐंगल जॉब में धंसने लगता है जिसके कारण कट प्रगति करता हुआ आगे बढ़ता है।

सामग्री के अनुसार छेनी से कोण काटना (Material wise Cutting angle with chisel)

काटी जाने वाली सामग्रीबिंदु कोणझुकाव का कोण
उच्च कार्बन इस्पात65⁰39.5⁰
कच्चा लोहा60⁰37⁰
नरम इस्पात55⁰34.5⁰
पीतल50⁰32⁰
ताँबा45⁰29.5⁰
एल्यूमिनियम30⁰22⁰

चीजल की ग्राइंडिंग (Grinding of Chisel)

चीजल की ग्राइंडिंग करते समय निम्नलिखित प्वाइंटों को ध्यान में रखना चाहिए

  1. कार्य करने के कारण यदि चीजल का हैड फैल गया है तो उसे सही आकार के ग्राइंड कर देना चाहिए।
  2. यदि चीजल का कटिंग ऐज बलंट हो गया है तो काटे जाने वाले मैटीरियल के अनुसार उसे सही कोण में ग्राइंड कर देना चाहिए।
  3. फ्लैट चीजल का कटिंग ऐज थोड़ा सा कनवेक्स फार्म में ग्राइंड करना चाहिए।
  4. घूमते हुए ग्राइंडिंग व्हील के विरुद्ध चीजल पर अधिक प्रैशर नहीं लगाना चाहिए।
  5. टेम्पर बनाए रखने के लिए चीजल की ग्राइंडिंग करते समय उसे बार-बार पानी में डुबोना चाहिए।
  6. चीजल के कटिंग ऐंगल को एक गेज या प्रोट्रैक्टर के द्वारा चैक करना चाहिए।

छेनी की छीलने की विधि (Chipping Method)

फ्लैट चीजल द्वारा चिपिंग करते समय निम्नलिखित संकेतों को ध्यान में रखना चाहिए

  1. जॉब को वाइस में अच्छी तरह से क्लेम्प करें। यदि आवश्यक हो तो जॉब को हार्ड लकड़ी का आश्रय दें।
  2. चीजल के कटिंग ऐज को सीट देने के लिए जॉब की सामने वाली साइड को चेम्फर करें।
  3. सुरक्षा के लिए वर्क बेंच पर चिपिंग गार्ड फिक्स करें।
  4. आखों के बचाव के लिए सुरक्षा चश्मा पहनें।
  5. बाएं हाथ में चीजल को हैड के टॉप से 15-20 मिमी० शैंक पर पकड़ें।
  6. वर्कपीस पर चीजल को बहुत अधिक कसकर ग्रिप या प्रैस न करें।
  7. दाएं हाथ में हैमर को पकड़ें और उससे चीजल पर चोट करें।
  8. हैमर की प्रत्येक चोट के बाद चीजल को दाएं से बाएं मूव करें।
  9. एक समय में अधिक धातु की चिपिंग न करें।
  10. जब कट दूसरे सिरे पर पहुँच जाए तो भारी चोट न लगाएं।
  11. चिपिंग के दौरान आँखों द्वारा चीजल के हैड को न देखकर कटिंग ऐज को देखना चाहिए।

छेनी का प्रयोग करते समय बरतने वाली सावधानियां (Precautions)

  • चिपिंग करते समय या चीजल की ग्राइंडिंग करते समय सुरक्षा चश्मा पहनें।
  • बलंट या मशरूम हैड वाली चीजल का प्रयोग न करें।
  • हैमर के फेस और चीजल के हैड पर तेल या ग्रीस नहीं लगी होनी चाहिए।
  • हैमर के हैंडल पर उसे दूर वाले सिरे पर पकड़ें।
  • जॉब को वाइस में हार्ड लकड़ी की उपयुक्त पैकिंग के साथ (यदि आवश्यक हो) अच्छी तरह से पकड़ना चाहिए।
  • चिपिंग करते समय चिपिंग गार्ड का प्रयोग करें।
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What is the Difference between Welding, Soldering, and Brazing?

Welding, soldering, and brazing are three distinct processes used to join metal parts together. They differ primarily in terms of the temperatures involved and the types of filler materials used.

What is the Difference between Welding, Soldering, and Brazing?

वेल्डिंग (Welding)

Welding

वेल्डिंग प्रक्रिया (Welding Process)

वेल्डिंग में जोड़ पर धातुओं को पिघलाने के लिए गर्मी का सीधा उपयोग किया जाता है|
यह आम तौर पर एक विद्युत आर्क, एक गैस लौ, एक लेजर, या यहां तक कि घर्षण का उपयोग करके किया जाता है।

वेल्डिंग तापमान (Welding Temprature)

वेल्डिंग करने में अत्यधिक उच्च तापमान का प्रयोग होता है, जो की लगभग 3800 डिग्री सेल्सियस तक किया जाता है।
आधार धातुएँ स्वयं पिघलती हैं और एक साथ जुड़ती हैं।

वेल्डिंग भराव सामग्री (Welding Filler Material)

कुछ मामलों में, जोड़ को मजबूत करने के लिए एक भराव सामग्री (वेल्डिंग रॉड या तार) का उपयोग किया जा सकता है।
भराव सामग्री का गलनांक वेल्डिंग करने वाले धातुओं के अनुकूल होना चाहिए।

वेल्डिंग जोड़ की ताकत (Welding Strength of Joint)

वेल्डेड जोड़ आम तौर पर बहुत मजबूत होते हैं और अक्सर मूल सामग्री के समान या उससे भी अधिक मजबूत हो सकते हैं।

वेल्डिंग अनुप्रयोग (Welding Application):

वेल्डिंग का उपयोग हेवीड्यूटी अनुप्रयोगों में किया जाता है जहां उच्च संरचनात्मक मजबूती महत्वपूर्ण होती है, जैसे निर्माण, जहाज निर्माण, ऑटोमोटिव विनिर्माण और एयरोस्पेस उद्योग इत्यादि में।

वेल्डिंग के प्रकार (Types of Welding):

  • MIG (मेटल इनर्ट गैस) वेल्डिंग: एक तार इलेक्ट्रोड और एक इनर्ट गैस शील्ड का उपयोग किया जाता है।
  • TIG (टंगस्टन अक्रिय गैस) वेल्डिंग: एक गैरउपभोज्य टंगस्टन इलेक्ट्रोड और एक अक्रिय गैस शील्ड का उपयोग किया जाता है।
  • SMAW (शील्डेड मेटल आर्क वेल्डिंग): फ्लक्स में लेपित एक उपभोज्य इलेक्ट्रोड का उपयोग किया जाता है|

Definition of Welding in Hindi

Fitter Welding Mock Test

Soldering Mock Test

MRAC Welding Mock Test

सोल्डरिंग (Soldering)

Soldering

प्रक्रिया (Soldering Process)

सोल्डरिंग में जोड़ को ऐसे तापमान पर गर्म करते है जहां सोल्डर (भराव सामग्री) पिघल जाती है और जोड़ में प्रवाहित होती है।
वेल्डिंग के विपरीत, मूल धातुएँ पिघलती नहीं हैं।

तापमान (Soldering Temprature)

सोल्डरिंग कम तापमान पर होती है, आमतौर पर 450 डिग्री सेल्सियस (840 डिग्री फ़ारेनहाइट) से नीचे।

सोल्डरिंग भराव सामग्री (Soldering Filler Material)

भराव सामग्री, जिसे सोल्डर के रूप में जाना जाता है, का गलनांक आधार धातुओं की तुलना में कम होता है।
सामान्य सोल्डर सामग्री में टिन-लेड मिश्र धातु, सीसा रहित मिश्र धातु और विशेष प्रकार का मिश्र धातु शामिल हैं।

सोल्डरिंग जोड़ की ताकत (Soldering Strength of Joint)

वेल्डेड जोड़ों की तुलना में सोल्डर वाले जोड़ अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं, लेकिन वे कई अनुप्रयोगों के लिए पर्याप्त होते हैं।
इनका उपयोग आमतौर पर उन अनुप्रयोगों में किया जाता है जहां विद्युत चालकता महत्वपूर्ण है लेकिन इसका उपयोग उच्च यांत्रिक शक्ति में नहीं किया जा सकता है|

सोल्डरिंग अनुप्रयोग (Soldering Application):

सर्किट बोर्ड पर घटकों को जोड़ने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स में, साथ ही पाइप और फिटिंग को जोड़ने के लिए प्लंबिंग में सोल्डरिंग का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।

सोल्डरिंग के प्रकार:

  • इलेक्ट्रिकल सोल्डरिंग: इलेक्ट्रॉनिक्स में सर्किट बोर्डों को सोल्डरिंग घटकों के लिए उपयोग किया जाता है।
  • प्लंबिंग सोल्डरिंग: तांबे के पाइप और फिटिंग को जोड़ने के लिए प्लंबिंग में उपयोग किया जाता है।
  • आभूषण सोल्डरिंग: धातु के टुकड़ों को जोड़ने के लिए आभूषण बनाने में उपयोग किया जाता है।

टांकना (Brazing)

Brazing

टांकना प्रक्रिया (Brazing Process)

टांकना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक धातुओं को जोड़ने के लिए एक भराव सामग्री, अक्सर पीतल मिश्र धातु का उपयोग किया जाता है।
भराव धातु टांका लगाने की तुलना में उच्च तापमान पर पिघलती है लेकिन आधार धातुओं के पिघलने बिंदु से नीचे होती है।

टांकना तापमान (Brazing Temperature)

टांकना 450 से 1,150 डिग्री सेल्सियस (840 से 2,100 डिग्री फ़ारेनहाइट) के बीच तापमान पर होता है।

टांकना भराव सामग्री (Brazing Filler Material)

ब्रेज़िंग में भराव सामग्री आम तौर पर 450 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के पिघलने वाली बिंदु के साथ एक मिश्र धातु होती है।
सामान्य भराव सामग्री में पीतल, कांस्य और चांदी आधारित मिश्र धातु शामिल हैं।

टांकना जोड़ की ताकत (Strength of brazed joint)

ब्रेज़्ड जोड़, सोल्डर किए गए जोड़ों की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं, हालांकि वेल्डेड जोड़ों जितने मजबूत नहीं होते हैं।
वे अच्छी ताकत प्रदान करते हैं और अक्सर उन अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं जहां मध्यम ताकत की आवश्यकता होती है।

टांकना अनुप्रयोग (brazing applications)

ब्रेज़िंग का उपयोग आमतौर पर प्लंबिंग, एचवीएसी सिस्टम और एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव उद्योगों में धातु भागों को जोड़ने में किया जाता है।
इसका उपयोग उपकरण, हीट एक्सचेंजर्स और विभिन्न प्रकार की मशीनरी के निर्माण में भी किया जाता है।

इन प्रक्रियाओं में से प्रत्येक की अपनी ताकत होती है और इन्हें अनुप्रयोग की विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर चुना जाता है, जिसमें सामग्री अनुकूलता, संयुक्त ताकत और परिशुद्धता की आवश्यकता शामिल है।

Final Conclution of Diffrence Between Welding Soldering and Brazing

Stepsवेल्डिंग (Welding)सोल्डरिंग (Soldering)टांकना (Brazing)
प्रक्रियावेल्डिंग में जोड़ पर आधार धातुओं को पिघलाने के लिए ऊष्मा का सीधा उपयोग किया जाता हैसोल्डरिंग को जोड़ तापमान पर गर्म किया जाता है जहां सोल्डर (भराव सामग्री) पिघल जाती है और जोड़ में प्रवाहित होती है।टांकना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक धातुओं को जोड़ने के लिए एक भराव सामग्री, अक्सर पीतल मिश्र धातु का उपयोग किया जाता है।
तापमान3800°C450°C450 – 1150 °C
मजबूतीबहुत ज्यादाकमवेल्डिंग की तुलना में कम मजबूत
भराव सामग्रीवेल्डिंग रॉड या तारटिन-लेड मिश्र धातु, सीसा रहित मिश्र धातुपीतल, कांस्य और चांदी आधारित मिश्र धातु
उपयोगनिर्माण, जहाज निर्माण, ऑटोमोटिव विनिर्माण और एयरोस्पेस उद्योगइलेक्ट्रॉनिक्स में, साथ ही पाइप और फिटिंग को जोड़ने के लिए प्लंबिंग मेंप्लंबिंग, एचवीएसी सिस्टम और एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव उद्योगों
कौशलउच्च कौशल स्तरनिम्न कौशल स्तरउच्च कौशल स्तर परन्तु सोल्डरिंग से कम

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What is Welding Definition Types and Process In Hindi

Explore the world of welding (Types of Welding in Hindi)with this in-depth guide. Learn the definition, various processes, and different types of welds. Get insights into the fundamental techniques that make welding an indispensable skill across industries.

What is Welding

Definition of Welding (वेल्डिंग की परिभाषा)

वेल्डिंग (Definition of Welding in Hindi) एक उपकरण या तकनीक है जिसका उपयोग धातु या उनके आपसी जुड़ाव के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में धातु के दो या दो से अधिक टुकड़ों को एक साथ जोड़ा जाता है, जिससे वे सजीव रूप से एक हो जाते हैं। वेल्डिंग से उत्पन्न जोड़ काफी मजबूत और स्थिर होता है, और यह विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग हो सकता है, जैसे कि इमारत निर्माण, उपकरण निर्माण, उड़ान जहाजों का निर्माण, ऑटोमोटिव उद्योग आदि।

Types of Welding (वेल्डिंग के प्रकार)

आर्क वेल्डिंग(Arc Welding):

Arc Welding

Shielded Metal Arc Welding (SMAW) शील्डेड मेटल आर्क वेल्डिंग :

इसे स्टिक वेल्डिंग के रूप में भी जाना जाता है, यह इलेक्ट्रोड और वर्कपीस के बीच एक इलेक्ट्रिक आर्क बनाने के लिए फ्लक्स में लेपित एक उपभोज्य इलेक्ट्रोड का उपयोग करता है।

Gas Metal Arc Welding गैस मेटल आर्क वेल्डिंग (जीएमएडब्ल्यू):

इसे अक्सर एमआईजी (मेटल इनर्ट गैस) वेल्डिंग के रूप में जाना जाता है, यह वेल्ड को संदूषण से बचाने के लिए एक सतत तार इलेक्ट्रोड और एक परिरक्षण गैस का उपयोग करता है।

Flux Cored Arc Welding फ्लक्स-कोरेड आर्क वेल्डिंग (FCAW):

GMAW के समान लेकिन फ्लक्स से भरे एक ट्यूबलर तार का उपयोग करता है, जिससे बाहरी परिरक्षण गैस की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

गैस वेल्डिंग(Gas Welding):

गैस वेल्डिंग (Gas Welding) एक विशेष प्रकार की वेल्डिंग प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक धातु टुकड़ों को जोड़ने के लिए गैस के उपयोग की जाती है। इस प्रक्रिया में विद्वेष उपादानों को गरम करने और जलाने के लिए विभिन्न गैसेस जैसे कि एस्थिलीन, आर्गन, ऑक्सीजन, या इतर उपयुक्त गैसों का उपयोग किया जाता है।

गैस वेल्डिंग में, जलाने के लिए गैस तार का उपयोग किया जाता है जो गैस वेल्डिंग फ्लेम को उत्पन्न करता है। यह फ्लेम उच्च तापमान पर होता है और विद्वेष उपादानों को गरम करने के लिए उपयुक्त होता है, जिससे वे मेल हो जाते हैं और जुड़ जाते हैं।

गैस वेल्डिंग विभिन्न उद्योगों में उपयोग होती है और छोटे से बड़े परियोजनाओं के लिए समान्य रूप से उपयोग होती है, जैसे कि रूपांतरण काम, और धातु उत्पादन में।

Gas Welding

ऑक्सी-एसिटिलीन वेल्डिंग (OAW): वेल्डिंग के लिए उच्च तापमान वाली लौ उत्पन्न करने के लिए ऑक्सीजन और एसिटिलीन गैसों के मिश्रण का उपयोग करता है।

प्रतिरोध वेल्डिंग(Resistace welding):

प्रतिरोध वेल्डिंग (Resistance Welding) एक विशेष प्रकार की वेल्डिंग प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक धातु टुकड़ों को उनके विद्वेषता को परिवर्तित किए बिना जोड़ने के लिए काम में लाया जाता है। इस प्रक्रिया में विद्वेष उपादानों को बीच में दबाकर और उन्हें उच्च विद्वेष विद्वेषता वाले स्थितियों में गरम किया जाता है।

Resistace welding

स्पॉट वेल्डिंग (Spot Welding):

दबाव डालकर और उनमें विद्युत धारा प्रवाहित करके दो या दो से अधिक धातु सतहों को जोड़ना।

प्रोजेक्शन वेल्डिंग (Projection Welding):

स्पॉट वेल्डिंग के समान, लेकिन विशेष आकार के इलेक्ट्रोड की मदद से करंट को एक विशिष्ट क्षेत्र में केंद्रित करता है।
सीम वेल्डिंग: ओवरलैपिंग सामग्री की पूरी लंबाई के साथ एक सतत वेल्ड बनाता है।

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टंगस्टन अक्रिय गैस वेल्डिंग (Tungsten Inert Gas Welding (TIG)):

टंगस्टन अर्गन गैस वेल्डिंग (Tungsten Inert Gas Welding), जिसे TIG वेल्डिंग भी कहते हैं, एक विशेष प्रकार की वेल्डिंग प्रक्रिया है जिसमें एक निष्क्रिय गैस (जैसे कि आर्गन) का उपयोग होता है और एक विद्वेष उपादान को जोड़ने के लिए इस्तेमाल होता है।

Tungsten Inert Gas Welding

इस प्रक्रिया में, एक टंगस्टन इलेक्ट्रोड का उपयोग किया जाता है, जो विद्वेष उपादानों को गरम करने के लिए उपयोग होता है, लेकिन यह इलेक्ट्रोड अपने आप घुलता नहीं है। इसके बजाय, एक विद्वेष उपादान और वायर के बीच एक इलेक्ट्रिकल आर्क होता है, जो उपादान को गरम करता है और मेलता है।

TIG वेल्डिंग अक्सर उच्च गुणवत्ता वाली वेल्डिंग के रूप में जानी जाती है, खासकर वे स्थानों पर जहाँ छोटे और नूकीले जोड़ों की आवश्यकता होती है, जैसे कि कार के बनावट में और विभिन्न धातुओं के उपयोग के लिए।

गैस टंगस्टन आर्क वेल्डिंग (जीटीएडब्ल्यू) के रूप में भी जाना जाता है, यह वेल्ड का उत्पादन करने के लिए एक गैर-उपभोज्य टंगस्टन इलेक्ट्रोड का उपयोग करता है। एक अलग भराव सामग्री का उपयोग किया जा सकता है।

सबमर्ज्ड आर्क वेल्डिंग (Submerged Arc Welding) (SAW):

सबमर्ज्ड आर्क वेल्डिंग एक विशेष प्रकार की वेल्डिंग प्रक्रिया है जिसमें विद्वेष उपादानों को गरम करने और मेल करने के लिए इलेक्ट्रिकल आर्क का उपयोग किया जाता है, जो जल में समुद्र या अन्य तरल तत्वों के अंदर होता है। इस प्रक्रिया में विद्वेष उपादान जैसे कि लोहा या अल्यूमिनियम, विद्वेष बर्फ या लवण की बोटों, पाइप लाइन्स और अन्य अनुप्रयोगों को जोड़ने के लिए इस्तेमाल होते हैं।

Submerged Arc Welding

इस प्रक्रिया में, एक विद्वेष उपादान के बीच एक इलेक्ट्रिकल आर्क उत्पन्न किया जाता है, जिसके कारण उपादानों को गरम करके मेला जाता है। इस प्रक्रिया में, एक विशेष रोड या तार को विद्वेष उपादान पर लगाया जाता है और फिर उसे जगह जगह हिलाया जाता है ताकि वेल्डिंग जोड़ बन सके।

सबमर्ज्ड आर्क वेल्डिंग अक्सर जल में समुद्री स्थलों में और जलसंपर्क करने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कि जेटी, नौसेना जहाज़, जहाजों के पाइपलाइन, और अन्य उपकरणों के निर्माण में प्रयुक्त होती है।

इलेक्ट्रॉन बीम वेल्डिंग (Electron Beam Welding) (EBW):

इलेक्ट्रॉन बीम वेल्डिंग एक विशेष वेल्डिंग प्रक्रिया है जो धातु के टुकड़ों को एक साथ जोड़ने के लिए उच्च-ऊर्जा इलेक्ट्रॉन बीम का उपयोग करती है। यह विधि उन वेल्डिंग सामग्रियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जिन्हें पारंपरिक तरीकों या अत्यधिक प्रतिक्रियाशील सामग्रियों का उपयोग करके वेल्ड करना मुश्किल होता है।

इस प्रक्रिया में, उच्च-ऊर्जा इलेक्ट्रॉन उत्पन्न करने के लिए एक विशेष इलेक्ट्रॉन गन का उपयोग किया जाता है। इन इलेक्ट्रॉनों को धातु के वर्कपीस की ओर निर्देशित किया जाता है, जिससे वह गर्म हो जाता है। उच्च-ऊर्जा इलेक्ट्रॉन धातु को पिघली हुई अवस्था में लाते हैं, जिससे टुकड़े एक साथ जुड़ जाते हैं। इलेक्ट्रॉनों के बिखराव को रोकने के लिए यह वेल्डिंग प्रक्रिया वैक्यूम या कम दबाव वाले वातावरण में की जाती है।

इलेक्ट्रॉन बीम वेल्डिंग का उपयोग उच्च-गुणवत्ता वाले वेल्ड बनाने के लिए किया जाता है और इसका उपयोग विभिन्न उद्योगों जैसे एयरोस्पेस विनिर्माण, उच्च-प्रदर्शन उपकरण और अन्य विशेष अनुप्रयोगों में किया जाता है जहां सटीक और उच्च-गुणवत्ता वाले वेल्ड महत्वपूर्ण होते हैं।

लेजर वेल्डिंग (Lazer Welding):

Lazer Welding

लेजर वेल्डिंग एक वेल्डिंग प्रक्रिया है जो दो या दो से अधिक वस्तुओं को जोड़ने के लिए उच्च-ऊर्जा लेजर बीम का उपयोग करती है। यह वस्तुओं के छोटे और तंत्रिका संबंधों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।

लेजर वेल्डिंग प्रक्रिया में, असमान सामग्रियों को गर्म करने और वेल्ड करने के लिए एक उच्च ऊर्जा लेजर बीम का उपयोग किया जाता है। यह दो विभिन्न तत्वों को आपस में जोड़ती है.

लेजर वेल्डिंग विशेष रूप से उच्च गुणवत्ता वाले जोड़ बनाने में मदद करती है और आमतौर पर यांत्रिक कनेक्शन के साथ वस्तुओं को जोड़ने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। इसका व्यापक रूप से विमानन, बागवानी, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा उपकरणों के निर्माण जैसे उद्योगों में उपयोग किया जाता है।

प्लाज्मा आर्क वेल्डिंग (Plasma Arc Welding) (PAW):

प्लाज्मा आर्क वेल्डिंग एक विशेष वेल्डिंग प्रक्रिया है जो धातुओं को एक साथ जोड़ने के लिए उच्च तापमान वाले प्लाज्मा का उपयोग करती है। इस प्रक्रिया में, धातुओं को गर्म करने और पिघलाने के लिए एक उच्च-ऊर्जा प्लाज्मा आर्क बनाने के लिए एक विद्युत चाप का उपयोग किया जाता है। प्लाज़्मा आर्क वेल्डिंग का उपयोग अक्सर उच्च गुणवत्ता वाले वेल्ड के उत्पादन के लिए किया जाता है और इसका उपयोग एयरोस्पेस, समुद्री, ऑटोमोटिव और धातु विज्ञान जैसे उद्योगों में किया जाता है।

इस प्रक्रिया के लिए एक विशेष प्लाज्मा आर्क वेल्डिंग मशीन की आवश्यकता होती है, जो वेल्डिंग के लिए आर्क के रूप में प्लाज्मा का उत्पादन और उपयोग करती है। यह विधि विशेष रूप से स्टेनलेस स्टील, अलौह धातुओं और उनके मिश्र धातुओं जैसी वेल्डिंग सामग्री के लिए उपयुक्त है।

घर्षण वेल्डिंग(Friction Welding):

घर्षण वेल्डिंग एक ठोस-अवस्था वेल्डिंग प्रक्रिया है जो दो सामग्रियों के बीच यांत्रिक घर्षण के माध्यम से गर्मी उत्पन्न करके उन्हें जोड़ती है। पारंपरिक संलयन वेल्डिंग विधियों के विपरीत, जिसमें सामग्री को पिघलाना शामिल होता है, घर्षण वेल्डिंग आणविक स्तर पर संचालित होती है। यह सामग्रियों को उनके गलनांक तक पहुंचे बिना प्लास्टिक अवस्था में गर्म करके एक बंधन बनाता है।

इस प्रक्रिया में दो सामग्रियों को दबाव में एक साथ रगड़ना शामिल है, जो घर्षण के कारण गर्मी उत्पन्न करता है। जैसे-जैसे सामग्री गर्म होती है, वे नरम हो जाती हैं और उन्हें एक साथ जोड़कर एक मजबूत, टिकाऊ जोड़ बनाया जा सकता है। एक बार जब वांछित तापमान पहुंच जाता है, तो घूमना बंद हो जाता है और दबाव तब तक बना रहता है जब तक सामग्री ठंडी होकर एक साथ मिल नहीं जाती।

घर्षण वेल्डिंग का उपयोग ऑटोमोटिव, एयरोस्पेस, विनिर्माण और निर्माण सहित विभिन्न उद्योगों में किया जाता है, क्योंकि इसमें धातुओं और कुछ थर्मोप्लास्टिक्स सहित सामग्रियों की एक विस्तृत श्रृंखला में उच्च शक्ति वाले जोड़ बनाने की क्षमता होती है। यह न्यूनतम सामग्री विरूपण, तीव्र वेल्डिंग गति और असमान सामग्रियों को जोड़ने की क्षमता जैसे लाभ प्रदान करता है।

अल्ट्रासोनिक वेल्डिंग(Ultrasonic Welding):

अल्ट्रासोनिक वेल्डिंग एक वेल्डिंग प्रक्रिया है जो सामग्री, विशेष रूप से प्लास्टिक, को एक साथ जोड़ने के लिए उच्च आवृत्ति वाले अल्ट्रासोनिक कंपन का उपयोग करती है।

इस प्रक्रिया में, अल्ट्रासोनिक कंपन सामग्रियों के बीच घर्षण गर्मी उत्पन्न करते हैं, जिससे वे पिघल जाते हैं और एक साथ जुड़ जाते हैं। थर्मोप्लास्टिक घटकों में मजबूत और सटीक वेल्ड बनाने के लिए इस तकनीक का व्यापक रूप से ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा उपकरण निर्माण जैसे उद्योगों में उपयोग किया जाता है। अल्ट्रासोनिक वेल्डिंग अपनी गति, सटीकता और चिपकने वाले या फास्टनरों जैसी अतिरिक्त सामग्री की आवश्यकता के बिना उच्च गुणवत्ता वाले वेल्ड का उत्पादन करने की क्षमता के लिए जानी जाती है।

थर्मिट वेल्डिंग (Thermit Welding):

थर्मिट वेल्डिंग, जिसे एक्सोथर्मिक वेल्डिंग के रूप में भी जाना जाता है, एक विशेष वेल्डिंग प्रक्रिया है जो दो धातु के टुकड़ों को एक साथ जोड़ने के लिए उच्च तापमान वाली रासायनिक प्रतिक्रिया बनाती है। इस प्रक्रिया में धातु पाउडर, आमतौर पर एल्यूमीनियम, और धातु ऑक्साइड, जैसे आयरन ऑक्साइड (आमतौर पर जंग के रूप में जाना जाता है) के मिश्रण का उपयोग करना शामिल है। प्रज्वलित होने पर, यह मिश्रण एक ऊष्माक्षेपी प्रतिक्रिया से गुजरता है, जिससे बड़ी मात्रा में गर्मी निकलती है।

प्रतिक्रिया से उत्पन्न तीव्र गर्मी जोड़ों पर धातुओं को पिघला देती है, जिससे वे एक साथ फ्यूज हो जाती हैं। थर्मिट वेल्डिंग का उपयोग आमतौर पर उन स्थितियों में किया जाता है जहां धातुओं के बीच एक मजबूत, टिकाऊ और स्थायी बंधन की आवश्यकता होती है। इसका उपयोग रेलवे ट्रैक निर्माण, पाइपलाइनों को जोड़ने और भारी मशीनरी घटकों की मरम्मत जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।

थर्मिट वेल्डिंग को विभिन्न वातावरणों और परिस्थितियों में मजबूत कनेक्शन बनाने की क्षमता के लिए पसंद किया जाता है, जिससे यह भारी उद्योग और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक मूल्यवान तकनीक बन जाती है।

प्रेरण वेल्डिंग(Induction Welding):

इंडक्शन वेल्डिंग, जिसे उच्च-आवृत्ति इंडक्शन वेल्डिंग के रूप में भी जाना जाता है, एक वेल्डिंग प्रक्रिया है जो दो या दो से अधिक सामग्रियों को गर्म करने और जोड़ने के लिए विद्युत चुम्बकीय प्रेरण का उपयोग करती है। यह प्रक्रिया विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर निर्भर करती है, जहां एक उच्च आवृत्ति प्रत्यावर्ती धारा (एसी) को तांबे के तार के माध्यम से पारित किया जाता है, जिससे एक विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

जब एक प्रवाहकीय सामग्री को इस विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र के भीतर रखा जाता है, तो यह सामग्री के भीतर भंवर धाराओं को प्रेरित करता है। विद्युत धारा प्रवाह के प्रति सामग्री के प्रतिरोध के कारण ये एड़ी धाराएं गर्मी पैदा करती हैं। परिणामस्वरूप, पदार्थ जोड़ पर गर्म हो जाता है, जिससे वह पिघल जाता है और बाद में संलयन होता है।

इंडक्शन वेल्डिंग का उपयोग आमतौर पर धातुओं को जोड़ने के लिए किया जाता है, खासकर उन अनुप्रयोगों में जहां उच्च परिशुद्धता और गति की आवश्यकता होती है। यह ऑटोमोटिव विनिर्माण, एयरोस्पेस और पाइप निर्माण जैसे उद्योगों में कार्यरत है। यह विधि समान हीटिंग, हीटिंग प्रक्रिया पर सटीक नियंत्रण और उन सामग्रियों को जोड़ने की क्षमता जैसे लाभ प्रदान करती है जिन्हें अन्य तरीकों का उपयोग करके वेल्ड करना मुश्किल हो सकता है।

वेल्डिंग के दौरान सुरक्षा सावधानियां (Safety Precautions during welding)

वेल्डिंग के दौरान सुरक्षा सावधानियां खुद को और दूसरों को संभावित खतरों से बचाने के लिए आवश्यक हैं। यहां सुरक्षा उपायों की एक विस्तृत सूची दी गई है:

व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (Personal Protective Equipment) (PPE):

  • वेल्डिंग हेलमेट(Welding Helmet): आपके चेहरे और आंखों को चिंगारी, यूवी विकिरण और उड़ने वाले मलबे से बचाता है।
  • सुरक्षा चश्मा या चश्मा(Safety Glasses or Goggles): आंखों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करें।
  • वेल्डिंग दस्ताने(Welding Gloves): अपने हाथों को जलने, चिंगारी और बिजली के झटके से बचाएं।
  • आग प्रतिरोधी कपड़े(Fire-resistant Clothing): चिंगारी और गर्म धातु से बचाने के लिए चमड़े या कपास जैसी सामग्री से बने आग प्रतिरोधी कपड़े पहनें।
  • रेस्पिरेटर(Respirator): यदि किसी बंद जगह पर वेल्डिंग हो रही है या जहां वेंटिलेशन खराब है तो धुएं और गैसों से बचाने के लिए रेस्पिरेटर का उपयोग करें।
  • स्टील-टो जूते(Steel-toed Boots): अपने पैरों को गिरने वाली वस्तुओं और गर्म धातु से बचाएं।

वेंटिलेशन और धूआं निष्कर्षण(Ventilation and Fume Extraction):

  • वेल्डिंग से हानिकारक धुंआ और गैसें निकलती हैं। हवा से इन प्रदूषकों को हटाने के लिए उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करें या निकास प्रणाली का उपयोग करें।

कार्य क्षेत्र सुरक्षा(Work Area Safety):

  • साफ़ कार्यस्थल (Clear Workspace): वेल्डिंग क्षेत्र से अव्यवस्था, ज्वलनशील सामग्री और ट्रिपिंग के खतरों को हटा दें।
  • अग्नि सुरक्षा(Fire Safety): पास में एक अग्निशामक यंत्र रखें और सुनिश्चित करें कि हर कोई जानता है कि इसका उपयोग कैसे करना है।
  • हॉट वर्क परमिट(Hot Work Permit): यदि आपके कार्यस्थल द्वारा आवश्यक हो, तो वेल्डिंग कार्य शुरू करने से पहले परमिट प्राप्त करें।

विद्युत सुरक्षा(Electrical Safety):

  • ग्राउंडिंग(Grounding): सुनिश्चित करें कि बिजली के झटके को रोकने के लिए वर्कपीस और वेल्डिंग मशीन ठीक से ग्राउंडेड हैं।
  • केबलों का निरीक्षण करें(Inspect Cables): नियमित रूप से केबलों की टूट-फूट, टूट-फूट या क्षति के लिए निरीक्षण करें।

गैस सिलेंडरों का सुरक्षित संचालन(Safe Handling of Gas Cylinders:):

  • वाल्वों को पलटने या क्षति से बचाने के लिए गैस सिलेंडरों को सीधी स्थिति में रखें और सुरक्षित रखें।
  • वाल्व असेंबलियों की सुरक्षा के लिए कैप या कवर का उपयोग करें।

वेल्डिंग क्षेत्र डिज़ाइन(Welding Area Design):

  • आसपास के अन्य लोगों के लिए जोखिम को कम करने के लिए वेल्डिंग क्षेत्र निर्दिष्ट करें।

प्रशिक्षण और ज्ञान(Training and Knowledge):

  • सुनिश्चित करें कि वेल्डर सुरक्षित वेल्डिंग प्रथाओं में उचित रूप से प्रशिक्षित है और संभावित खतरों से अवगत है।

आपातकालीन कार्यवाही(Emergency Procedures):

  • आपातकालीन निकास, आईवॉश स्टेशन और सुरक्षा शॉवर का स्थान जानें।
  • आपात्कालीन स्थिति में स्पष्ट निकासी योजना रखें।

अकेले काम करने से बचें(Avoid Working Alone):

  • जब भी संभव हो, पास में एक सहकर्मी रखें जो आपात्कालीन स्थिति में सहायता कर सके।

नियमित रखरखाव(Regular Maintenance):

  • उपकरण विफलता के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए वेल्डिंग उपकरण और औज़ारों को अच्छी कार्यशील स्थिति में रखें।

यूवी और आईआर विकिरण से बचाव(Protect Against UV and IR Radiation):

  • दर्शकों को हानिकारक पराबैंगनी और अवरक्त विकिरण से बचाने के लिए पर्दे या स्क्रीन का उपयोग करें।

वेल्डिंग के बाद की सफ़ाई(Post-Welding Cleanup):

  • ट्रिपिंग के खतरों को रोकने के लिए स्लैग, स्क्रैप और किसी भी बचे हुए पदार्थ को हटा दें।

याद रखें, वेल्डिंग करते समय सुरक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इन सावधानियों का पालन करने से इसमें शामिल सभी लोगों के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।


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वाइस (Vice) किसे कहते है| कार्य प्रकार एवं सावधानियाँ

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वाइस क्या है (Vice)

कार्यशाला में किसी भी कार्य अर्थात जॉब को पकड़ने के लिए जो साधन काम में लिए जाते हैं उसे वाइस कहते हैं जॉब को वॉइस में बांधकर विभिन्न ऑपरेशन किए जाते हैं जैसे फाइलिंग, चिपिंग, रिमिंग, टैपिंग, सइंग, बैंडिंग, एवं अन्य मशीनी क्रियाये आदि| Vice types in Hindi वाइस का साइज के जॉ चौड़ाई से लिया जाता है|

Vice types in Hindi

वाइस के भाग (Parts of Vice)

  • फिक्स्ड जॉ
  • मूवेबल जॉ
  • जॉ प्लेट्स
  • स्पिंडल
  • बॉडी
  • हैंडल
  • गाइड नट या बॉक्स नट
  • स्प्रिंग
  • वॉशर

वॉइस में एक मूवेबल जॉ दूसरा फिक्स जॉ होता है जो कास्ट आयरन के बने होते हैं जॉ पर जो प्लेट लगी होती है जो जॉ को पकड़ने का कार्य करती है मूवेबल जॉ में से एक स्पिंडल अंदर तक गुजरता है जो माइल्ड स्टील का बना होता है इस पर स्क्वायर थ्रेड कटी होती है स्पिंडल को रोकने के लिए मूवेबल जॉ के अंदर स्प्रिंग वॉशर पीन आदि लगे रहते हैं गाइड या बॉक्स नट फिक्स्ड जॉ में बोल्ट द्वारा कसा रहता है बॉक्स नट गन मेटल ब्रोज़ या कास्ट आयरन से बना होता है स्पिंडल में माइल्ड स्टील हैंडल लगा होता है हैंडल को घुमाने से मूवेबल जॉ, फिक्स जा के में आगे पीछे खिसकता रहता है अर्थात चलता है|

वॉइस के प्रकार (Vice types in Hindi)

वॉइस निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

बेंच वाइस (Bench Vice)

बेंच वाइस (Bench Vice)

बेंच वाइस को पैरेलल जॉ बेंच वाइस भी कहते हैं इस वॉइस को बैंच पर फिट किया जाता है तथा इस वाइस पर जॉब को बांधकर अनेक ऑप्रेशन किए जाते हैं जैसे फाइलिंग, चिपिंग, रिमिंग, टैपिंग, सइंग, बैंडिंग, इत्यादि इस वाईस का साइज इसके जॉ के चौड़ाई से लिया जाता है यह वॉइस फिटिंग शॉप में काम ली जाती है प्रायः 75 से 150 mm साइज में की वाईस होती है|

बेंच वाइस प्रकार (Types of Bench Vice)

बेंच वाइस निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं

  1. क्विक रिलीज वॉइस :- यह साधारण बेंच वाइस की भांति ही होती है लेकिन इसमें मूवेबल जॉ को खोलने के लिए ट्रिगर/लीवर लगा होता है|
  2. कॉन्बिनेशन वॉइस :- यह बेंच वॉइस तथा पाइप वॉइस का संयुक्त रूप होता है|
  3. स्विवेल वॉइस :- जिसके आधार को वांछित कोण पर घुमाया जा सके|

हैंड वाइस (Hand Vice)

Hand Vice

इस वॉइस को हाथ में पकड़ कर प्रयोग किया जाता है इसके जबड़े लेग वाईस की तरह गोलाई में खुलते हैं इस वाईस को खोलने व बंद करने के लिए स्क्रू और विंग नट का प्रयोग किया जाता है इसके दोनों जोड़ों के बीच एक पतली स्प्रिंग की पत्ती लगी होती है इस वॉइस की बाड़ी कास्ट आयरन से बनी होती है इसका साइज रिवेट के सेंटर से (जहां दोनों जबड़े नीचे मिले होते है ) जा तक की सीधी दूरी में मापा जाता है|

मशीन वाइस (Machine Vice)

यह वॉइस मशीन शॉप की अति महत्वपूर्ण वाईस से इसे मशीन के टेबल से “T” बोल्ट द्वारा कसा जाता है इस वाईस की बॉडी कास्ट आयरन तथा हैंडल माइल्ड स्टील का बना होता है इसका साइज जा की चौड़ाई से लिया जाता है इसका प्रयोग मशीन टेबल पर चाप को पकड़कर डीलिंग इत्यादि ऑपरेशन करने के लिए किया जाता है कई मशीनें अपने आधार पर किसी भी कोण में घूम सकती हैं जिससे मशीनिंग क्रिया करने में सुविधा रहती है मशीन वॉइस निम्नलिखित चार प्रकार की होती हैं

प्लेन मशीन वाइस (Plain Machine Vice)

प्लेन मशीन वाइस (Plain Machine Vice)

छोटे जॉब को मशीन पर बांधने के लिए प्रयोग किया जाता है|

यूनिवर्सल मशीन वॉइस (Universal Machine Vice)

यूनिवर्सल मशीन वॉइस (Universal Machine Vice)

इसे किसी जॉब को उर्ध्व, क्षैतिज अथवा वांछित कोणीय दिशा में मशीन पर बांधने के लिए प्रयोग किया जा सकता है|

स्विवेल बेस मशीन वाइस (Swivel Base Machine Vice)

इसके आधार को वांछित कोण पर घुमाया जा सकता है|

वर्टिकल वाइस मशीन (vertical Vice Machine)

वर्टिकल वाइस मशीन (vertical Vice Machine)

लेग वाइस (Leg Vice)

लेग वाइस (Leg Vice)

इस वाइस का अधिकतर प्रयोग ब्लैक स्मिथी वर्कशॉप में किया जाता है इस वॉइस पर गर्म जॉब को बांधकर फ्रोज़िंग, बैंडिंग आदि ऑपरेशन किए जाते हैं इस वॉइस की एक लेग लंबी होती है तथा मूवेबल जा की छोटी लेग जा की छोटी लेग फिक्स जॉ की बड़ी लेग के साथ एक लोहे की प्लेट द्वारा कब्जे पर जुड़ी होती है यह फ्लैट स्प्रिंग की सहायता से खुलती है यह हैमर की चोट सहन करती है इस वाईस के जबड़े गोलाई में खुलते हैं इसका साइज इसके जॉ प्लेट की चौड़ाई से लिया जाता है|

पाइप वाइस (Pipe Vice)

इस वॉइस में गोलाकार जॉब, गोल रॉड, पाइप आदि पकड़े जाते हैं इस वाइस के जॉ “V”ग्रुप में 90 डिग्री के कोण पर बने होते हैं इसकी बॉडी कास्ट आयरन की तथा स्पिंडल माइल्ड स्टील का बना होता है इसका साइज इसके जॉ द्वारा पकड़े जाने वाले बड़े से बड़े व्यास के पाइप से लिया जाता है|

पिन वाइस (Pin Vice)

इस वॉइस में पतले व्यास के तार रॉड घडियो के पुर्जे पकड़े जाते हैं इस वाईस का जो ड्रिल चक की भांति होता है इसमें आगे की तरफ चक और पीछे तरफ हैंडल होता है इसके द्वारा जितने बड़े साइज की तार पकड़ी जाती है वहीं इसका साइज होता है

टूल मेकर वाइस (Tool Maker Vice)

इस वाइस की बॉडी स्टील की बनी होती है इसके जॉ में दाँते कटे हुए नहीं होते हैं इसका प्रयोग टूल रूम में छोटे-छोटे फिनिश्ड पर्टो को पकड़ने के लिए किया जाता है ताकि पार्ट पर दाग आदि ना पड़े इसे वर्क बेंच पर या हाथ में पकड़कर फाइलिंग पॉलिशिंग आदि की जाती है इसका साइज भी जॉ की चौड़ाई से लिया जाता है|

विशेष वाइस (Special Vice)

टूल मेकर्स क्लैंप (Tool Makers Clamp)

यह एक प्रकार का वाइसनुमा क्लैंप है इसमें पैरेलल जॉ होते है जिसमें एक जॉ में आर पार चूड़ियां कटी होती है जबकि दूसरा वाला ब्लाइंड होल होता है दूसरे जॉ के दोनों सुराखों में आर पर चूड़ी कटी होती है इन चूड़ी वाले सुराखों में दो स्क्रू एक दूसरे के विपरीत दिशा में फिट होते हैं एक स्क्रू के हेड को एक स्प्रिंग द्वारा एक जगह स्थिर कर लिया जाता है स्थिर वाले स्क्रु रॉड को दक्षिणावर्त घुमाए तो तो दोनों जॉ आपस में मिलते हैं अर्थात इनके बीच जॉब को क्लैंप किया जाता है

टूल मेकर्स क्लैंप (Tool Makers Clamp)

हाइड्रोलिक वाइस (Hydraulic Vice)

इस वाइस की जॉ हाइड्रोलिक प्रेशर से खुलता हुआ बंद होता है इसे खोलने व बंद करने के लिए वाल्व लगे होते हैं और वाल्व प्रेशर को कंट्रोल करते हैं यह आधुनिक मशीन है|

न्यूमेटिक वाइस (Pneumatic Vice)

आधुनिक कार्यशाला में इस वॉइस का प्रयोग होता है इसमें स्पिंडल नहीं होता तथा यह हवा के प्रेशर से खुलती व बंद होती है इसे खोलने और बंद करने के लिए वाल्व लगे होते हैं|

सी क्लैंप (C- Clamp)

यह अंग्रेजी के “C” अक्षर की आकृति का होता है इसकी बॉडी ड्राप फ़ोर्ज़े की हुयी कास्ट आयरन से ढलाई करके बनाई जाती है इसकी बॉडी के एक सिरे पर चूड़ीदार स्पिंडल लगा होता है जिसे घुमाने के लिए हैंडल लगा होता है यह दोनों माइल्ड स्टील के बने होते हैं इसका प्रयोग जॉब को पकड़ने के लिए होता है इसका साइज इसमें पकड़े जाने वाली बड़ी से बड़ी जॉब से लिया जाता है इसका प्रयोग दो या दो से अधिक पर्टो को क्लेम करने के लिए किया जाता है इस पर अत्यधिक दबाव नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे स्क्रू रॉड मुड़ सकती है

वाइस के प्रयोग में बरती जाने वाली सावधानियाँ

  • वाइस के बेस को किसी भी धातु से वेल्ड न करें।
  • वाइस के जॉ में तेल ग्रीस आदि न लगाए |
  • यदि वाइस किसी प्रकार से टूट गया है तो वेल्डिंग या ब्रेज़िंग द्वारा एक वाइस की मरम्मत न करें।
  • किसी भी जॉब को अच्छी तरह से कसे न जय्दा और न काम |
  • वाइस के जबड़े को नहीं काटना चाहिए
  • वाइस जॉ के कोने पर भारी दबाव न डालें।
  • अतिरिक्त क्लैंपिंग दबाव के लिए हैंडल स्पिंडल पर हथोड़े न मारें या पाइप से जबरजस्ती न कसे |
  • वाइस के थ्रेड स्पिंडल में हमेशा ग्रीसिंग या तेल अवश्य जाचे जरुरत पड़ने पर ऑइलिंग भी करे |
  • वाइस के बेस को अच्छी तरह से सतह पर कसे |
  • वाइस के दांत की सफाई समय समय पर जरूर करे |
Quiz about Vice Tools and its Types

वाइस टूल्स के पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न

वाइस क्या है ? वाइस टूल्स का क्या प्रयोग है?

कार्यशाला में किसी भी कार्य अर्थात जॉब को पकड़ने के लिए जो साधन काम में लिए जाते हैं उसे वाइस कहते हैं

बेंच वाइस का दूसरा नाम क्या है?

बेंच वाइस को पैरेलल जॉ बेंच वाइस भी कहते हैं|

बेंच वाइस कितने प्रकार के होते है?

बेंच वाइस निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं

  • क्विक रिलीज वॉइस :- यह साधारण बेंच वाइस की भांति ही होती है लेकिन इसमें मूवेबल जॉ को खोलने के लिए ट्रिगर/लीवर लगा होता है|
  • कॉन्बिनेशन वॉइस :-यह बेंच वॉइस तथा पाइप वॉइस का संयुक्त रूप होता है|
  • स्विवेल वॉइस :-जिसके आधार को वांछित कोण पर घुमाया जा सके|

वाइस किस धातु से बने होते हैं?

वाइस गन मेटल ब्रोज़ या कास्ट आयरन ,माइल्ड स्टील धातु से बने होते हैं|

वाईस कितने प्रकार के होते है ?

  1. वाईस निम्न प्रकार के होते है
    बेंच वाइस
  2. हैंड वाइस
  3. मशीन वाइस
  4. लेग वाइस
  5. पाइप वाइस
  6. पिन वाइस
  7. टूल मेकर वाइस

वॉइस को कैसे मापा जाता है?

वाइस का साइज के जॉ चौड़ाई से लिया जाता है


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