२२ सितम्बर 1791 को लन्दन में जन्मे वैज्ञानिक माइकल फैराडे ने सन 1834 में विद्युत अपघटन से सम्बंधित दो नियम प्रतिपादित किये थे जिसे फैराडे का प्रथम एवं द्वितीय नियम के नाम से भी जानते है फैराडे के विद्युत अपघटन का नियम बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है जिन्हे विभिन्न प्रतियोगी और आईटीआई की परीक्षाएं के साथ साथ मैट्रिक और इंटरमीडिएट में भी इससे प्रश्न आते है

विद्युत अपघट्य किसे कहते हैं (इलेक्ट्रोलिसिस परिभाषा)
फैराडे के नियमानुसार यदि रासायनिक विलियन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाए तो विलियन अलग-अलग अणुओ या आयनो में बट जाता है इस क्रिया को विद्युत अपघटन कहते हैं

विद्युत अपघटन के उत्पाद
जैसा के चित्र में दो प्लेटों को एक जार में रखा हुआ दर्शाया गया है इन प्लेटों को इलेक्ट्रोड कहते हैं जिस जार में विद्युत अपघटन किया जाता है उसे वोल्टमीटर कहते हैं वोल्टमीटर कई प्रकार के होते हैं जैसे कॉपर वोल्टामीटर, रजत वोल्टामीटर एवं जल वोल्टमीटर आदि कॉपर सल्फेट के विद्युत अपघटन के लिए कॉपर वोल्टामीटर में कांच का एक बर्तन होता है जिसमें कॉपर सल्फेट का घोल विद्युत अपघटन का कार्य करता है इसमें दो प्लेटें इलेक्ट्रोड्स का कार्य करती हैं धनात्मक प्लेट एनोड तथा ऋणात्मक प्लेट कैथोड होती है इन इलेक्ट्रोड को विद्युत परिपथ से जोड़ देते हैं
फैराडे के विद्युत अपघटन का प्रथम नियम
वैद्युत अपघटन की प्रक्रिया में किसी इलेक्ट्रोड से मुक्त हुए अथवा उस पर जमे हुए पदार्थ की कुल मात्रा विद्युत अपघटन में होकर प्रवाहित आवेश की कुल मात्रा के समानुपाती होता है|
m∝q ……….(i)
यदि इस प्रकार यदि i एंपियर की विद्युत धारा से वोल्ट मीटर में L सेकंड में मुक्त हुए पदार्थ की मात्रा m किलोग्राम हो तो आवेश q = i x t
समीकरण (1) से,
m∝it
Faraday’s first law of electrolysis formula
m = z x i x t
यहाँ,
z= मुक्त हुए पदार्थ का विद्युत रासायनिक तुल्यांक
i = विद्युत धारा एंपियर में
t = समय सेकंड में
इसमें नियतांक मुक्त हुए पदार्थ को विद्युत रासायनिक तुल्यांक(Electro-chemical Equivalent) या E.C.E कहलाता है
भिन्न-भिन्न तत्वों के लिए इसका मान भी भिन्न-भिन्न होता है
यदि i = 1 एंपियर, t = 1 सेकंड हो तो
z=m
फैराडे का विद्युत अपघटन का द्वितीय नियम
यदि भिन्न-भिन्न इलेक्ट्रोलाइटओ में समान विद्युत धारा समान समय के लिए प्रवाहित की जाए, तो मुक्त पदार्थों की मात्राएं उनके रासायनिक तुल्यांकओं के समानुपाती होती है
मान लीजिए कि तो इलेक्ट्रोड में समान विद्युत धारा समान समय के लिए प्रवाहित करने पर मुक्त हुए तत्वों का द्रव्यमान m1व m2 है, यदि इन तत्वों के रासायनिक तुल्यांक क्रमशः z1 व z2 हो तो इस नियम के अनुसार
Faraday’s second law of electrolysis formula
m1/m2 = z1/z2
यहाँ,
z= मुक्त हुए पदार्थ का विद्युत रासायनिक तुल्यांक
m = मुक्त हुए तत्वों का द्रव्यमान
प्रबल तथा दुर्बल विद्युत अपघट्य की व्याख्या उदाहरण सहित
प्रबल विद्युत अपघटन क्या है
वह विद्युत अपघट्य जिनको हम जब जल मे घोलते हैं तो वहां पूरी तरह से वे ऋण आयन तथा धनायन में टूट जाते हैं इस प्रकार के अपघट्य को हम प्रबल विद्युत अपघट्य कहते हैं।
प्रबल विद्युत अपघटन के उदाहरण
- सोडियम क्लोराइड
- पोटेशियम क्लोराइड
- हाइड्रोजन क्लोराइड
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड
- सोडियम क्लोराइड
- अमोनियम क्लोराइड
- सोडियम एसीटेट
दुर्बल विद्युत अपघटन क्या है
वह विद्युत अपघट्य जिसको जल में घोले जाने पर वह आंशिक रूप से या कम मात्रा में धनायन तथा ऋणायन में टूट जाता है ऐसे विद्युत अपघट्य को हम दुर्बल विद्युत अपघट्य कहते हैं
दुर्बल विद्युत अपघटन के उदाहरण
- अमोनियम एसीटेट
- अमोनियम हाइड्रोक्साइड
- कार्बनिक अम्ल
- एसिटिक अम्ल
विद्युत अपघटन के उपयोग
धातुओं को शुद्ध करने में
अशुद्ध या मिश्रित धातुओं को विद्युत अपघटन के द्वारा शुद्ध किया जाता है इस विधि में मिश्रित धातु को एनोड के रूप में तथा कैथोड को शुद्ध धातु की पतली स्ट्रिप के रूप में लिया जाता है इसमें मिश्रित धातुओं का लवण के साथ विलयन बनाया जाता है जब इस विलयन में धारा प्रवाहित की जाती है तब शुद्ध धातु कैथोड पर जमा हो जाती है तथा अशुद्ध एनोड पर जमा हो जाती है|
संधारित का निर्माण
उच्च धारिता के संधारित बनाने में बनाने हेतु इलेक्ट्रोलिसिस (विद्युत अपघटन) के द्वारा संधारित में दो प्लेटों के मध्य विद्युत परत तैयार की जाती है इस तरह के संधारित एलेक्ट्रोलाइटिक कहलाते हैं|
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