Basic Electricity Theory in Hindi

It is very important to have knowledge of basic electricity in the field of electricity, if you do not know basic electricity, then you cannot become a good electrician, for this it is most important that we carefully understand the units of basic electricity and all the parameters related to them. But will tell you all the units and measurements in detail

आईटीआई इलेक्ट्रीशियन (Electrician) थ्योरी

विद्युत का परिचय (Introduction to Electricity)

विद्युत एक अदृश्य ऊर्जा है जिसे ना देखा जा सकता है और ना ही छुआ जा सकता है लेकिन इसके विभिन्न प्रभावों द्वारा जाना वह देखा जा सकता है या
इलेक्ट्रॉनों के बहाव को ही विद्युत कहते हैं| ऊष्मा का प्रभाव लैंप, हीटर
चुंबकीय प्रभाव पंखे का चलना, विद्युत घंटी आदि

विद्युत का सिद्धांत (Principle of Electricity)

अब से लगभग 2500 से 2600 वर्ष पूर्व यूनान देश के वैज्ञानिक थेल्स अंबर ने देखा कि जब अंबर नामक पदार्थ को उन से रगड़ा जाता है तो उसमें हल्की वस्तु है जैसे कागज के टुकड़े तिनके को अपनी ओर आकर्षित करने का गुणा जाता है परंतु इस सिद्धांत को कई वर्षों तक कोई महत्व नहीं दिया गया


सन 1600 में इंग्लैंड के वैज्ञानिक डॉ गिलबर्ट ने प्रयोग के द्वारा पता लगाया कि अंबर की भांति अनेक अन्य पदार्थ जैसे कांच आबनूस गंधक लाख इत्यादि भी रगड़े जाने पर हल्की वस्तुओं को अपनी ओर खींचने लगते हैं इससे स्पष्ट होता है कि यह गुण घर्षण द्वारा उत्पन्न होता है इस गुण को प्राप्त कर लेने पर पदार्थ विद्युतमय कहलाते हैं


साइमर नामक वैज्ञानिक ने 1759 में पता लगाया कि इलेक्ट्रिफिकेशन विद्युत में दो इलेक्ट्रिक फ्लूड पॉजिटिव धनात्मक व ऋणात्मक के कारण होती है जब दो पदार्थ को रगड़े जाते हैं तो एक में ऋणात्मक तथा एक में धनात्मक चले जाते हैं इससे पता चलता है कि सामान आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा असमान आवेश एक दूसरे को आकर्षित करते हैं

विद्युत के प्रकार (Types of Electricity)

आधारभूत रूप से विद्युत दो प्रकार की होती हैं

  1. स्थिर विद्युत
  2. गतिशील विद्युत

स्थिर विद्युत (Static Electricity)

कांच की छड़ को जब रेशम के कपड़े पर रगड़ा जाता है तो यांत्रिक ऊर्जा के साथ स्वतंत्र इलेक्ट्रान काँच की छड़ में से रेशमी कपड़े की ओर विस्थापित हो जाते हैं इलेक्ट्रॉनों पर ऋण चार्ज होता है काँच की छड़ पर इलेक्ट्रॉनों की कमी से होने होने से धन चार्ज आता है अर्थात काँच की छड़ पर धन चार्ज व रेशमी कपड़े पर ऋण चार्ज होता है इस प्रकार इलेक्ट्रॉनों का असंतुलन उत्पन्न हो जाता है जब बराबर मात्रा में धन तथा ऋण आवेश को संपर्क में लाया जाता है तो आवेश विलोपित हो जाते हैं किस प्रकार वस्तु उदासीन हो जाती है इसलिए स्थिर विद्युत का उपयोग व्यापारिक रूप से नहीं किया जा सकता है

गतिशील विद्युत (Dynamic Electricity)

जिस विधुत को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से पहुंचाया जा सके किसी चालक द्वारा उसे गतिशील विद्युत ऊर्जा कहते है उदाहरण के लिए, तांबा एक कंडक्टर है जो विद्युत ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में सहायता करता है। ऊर्जा स्रोत, जैसे अल्टरनेटर, बैटरी या जनरेटर, इलेक्ट्रॉनों को गतिमान करना शुरू कर देता है।

इलेक्ट्रॉन सिद्धांत (Electron Theory)

प्रत्येक परमाणु में एक बीच का भारी भाग होता है जिसे नाभिक कहते हैं या प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन नामक कणो से मिलकर बना होता है प्रोटॉन पर धन आवेश होता है जबकि न्यूट्रॉन पर आवेशहीन होता है इस प्रकार नाभिक धन आवेशित होता है नाभिक के चारों ओर एक तीसरे प्रकार का कण विभिन्न कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते हैं इन कारणों को इलेक्ट्रॉन कहते हैं इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन के धन आवेश के बराबर ऋण आवेश उपस्थित होता है परमाणु में इलेक्ट्रॉन की संख्या नाभिक के प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है अतः परमाणु में धन आवेश तथा ऋण आवेश की मात्रा बराबर होती है इस प्रकार परमाणु विद्युत उदासीन होता है |

आवेश (Charge)

जब कोई वस्तु इलेक्ट्रानो का त्याग करती है अथवा इलेक्ट्रानो को ग्रहण करती है तब उसमे अतिरिक्त गुण आ जाता है अर्थात वस्तु विद्युतमय हो जाती है इसे आवेशन कहते है यह विद्युत आवेश दो प्रकार का होता है धन आवेश ऋण आवेश इलेक्ट्रॉनों को त्याग करने पर धन आवेश उत्पन्न होता है जबकि इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करने के ऋण आवेश उत्पन्न होता हैं

  1. धन तथा ऋण आवेश साथ-साथ होते हैं और परस्पर बराबर होता है
  2. सामान प्रकार के अर्थात सजातीय आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते है तथा विपरीत प्रकार के अर्थात विजातीय आवेश एक दूसरे को आकर्षित करते हैं
  3. किसी वस्तु के विद्युतीकरण के लिए इलेक्ट्रॉनिक उत्तरदाई होते हैं तथा आवेशन की क्रिया इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के फलस्वरूप होती है
  4. एक इलेक्ट्रॉन पर 1.60217662 × 10-19 coulombs आवेश होता है
  5. एक इलेक्ट्रान का द्रव्यमान 9.0 x 10 -31Kg होता है
  6. एक इलेक्ट्रान की त्रिज्या 1.9 x 10 -15 होता है |

मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free Electron)

किसी पदार्थ के परमाणु में इलेक्ट्रॉन नाभिक के समीप की कक्षाओं में होते हैं के नाभिक के धन आवेश के द्वारा प्रबल आकर्षण बल से बंधे रहते है परंतु नाभिक से दूर वाली कछाओ के इलेक्ट्रॉनों पर यह बल बहुत कम होता है अतः इन इलेक्ट्रानो को इनके स्थान से आसानी से हटाया जा सकता है निमे से अनेक इलेक्ट्रॉन अपने परमाणु से अलग होकर पूरे पदार्थ में स्वतंत्रता पूर्वक विचरण करते हैं इन्हे मुक्त इलेक्ट्रान कहते है यह इलेक्ट्रान ही आवेश को पदार्थ में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं अतः किसी ठोस पदार्थ की विद्युत चालकता उसमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है

विद्युत धारा (Electric current)

किसी परिपथ में इलेक्ट्रॉनों के एक ही दिशा में बहने की दर को विधुत धारा कहते हैं या किसी चालक पदार्थ में किसी दिशा में दो बिंदुओं के बीच आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते है “Flow of electron is called Electricity”

Electron and Current flow Direction

विद्युत धारा के अन्य परिभाषाएं (Other definitions of electric current ) :-

1 – किसी परिपथ में 1 सेकंड में प्रवाहित होने वाले आवेश को धारा कहते हैं |

धारा(i) = आवेश (q) / समय (t)

2 – किसी बंद परिपथ में इलेक्ट्रॉन के प्रवाह की दर को धारा कहते हैं

धारा (i) = इलेक्ट्रॉन की संख्या / समय

विद्युत धारा एक अदिश राशि होती है विद्युत धारा का एस आई मात्रक कूलाम / सेकंड या एंपियर होता है

1 एंपियर = 1 कूलाम / 1 सेकंड

यदि किसी चालक में किसी बिंदु से t सेकंड में n इलेक्ट्रॉन गुजरते हैं तो उस बिंदु से t सेकंड में गुजरने वाले कूल आवेश q=ne तथा चालक से गुजरने वाली धारा I = q/t=ne/t इलेक्ट्रान/सेकंड होती है|

विद्युत विभव (Electric Potential/Voltage)

जो बल किसी परिपथ में इलेक्ट्रॉन को बहने के लिए प्रेरित करता है विद्युत विभव कहलाता है

या

किसी एकांक धन आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य उस बिंदु पर विद्युत विभव कहलाता है विद्युत विभव एक अदिश अदिश राशि है
इसकी इकाई वोल्ट (V )है |

V= W/q

where , W = Work , q = charge

विभवांतर (Potential Difference)

किसी बंद परिपथ में किन्हीं दो बिंदुओं के मध्य के विभव या वोल्टेज को विभवांतर कहते है इसकी इकाई वोल्ट है और इसे P.D भी कहते हैं इसे V द्वारा प्रदर्शित करते हैं |

VA – VB = W/q

वोल्ट (Volt)

वोल्ट एक इलेक्ट्रोमोटिव फोर्स या विद्युत वाहक बल का पोटेंशियल डिफरेंस है तथा वोल्टेज की इकाई है इसे V द्वारा लिखा जाता है एक ओम प्रतिरोध में से 1 एंपियर की धारा गुजारने के लिए जितने विद्युत वाहक बल की आवश्यकता होती है उसे 1 वोल्ट कहते हैं

1 वोल्ट = 1 एंपियर X एक ओम

ओम (Ohm)

जब किसी परिपथ में 1 वोल्ट के प्रभाव अधीन 1 एंपियर की धारा गुजरे तो उस परिपथ का प्रतिरोध एक ओम होगा

एक ओम = 1 वोल्ट / 1 एंपियर यह प्रतिरोध की इकाई होती है इसे Ω से लिखा जाता है |

प्रतिरोध (Resistance)

किसी चालक का वह गुण जो चालक में प्रवाहित होने वाली धारा का विरोध करता है तो उसे चालक का प्रतिरोध करते हैं इसे R से प्रदर्शित किया जाता है प्रतिरोध की इकाई ओम ( Ω ) होती है जो ग्रीक अक्षर ओमेगा (Ω) का प्रतीक है। ओम का नाम जर्मन भौतिक विज्ञानी जॉर्ज साइमन ओम (1784-1854) के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने वोल्टेज, करंट और प्रतिरोध के बीच संबंधों का अध्ययन किया था।

लोड प्रतिरोध (Load Resistance) RL

इसमें तारों का प्रतिरोध और उन तारों से जुड़े किसी भी उपकरण का प्रतिरोध शामिल है। वह स्थान जहाँ करंट जाता है और वह स्थान जहाँ करंट आता है के बीच सब कुछ लोड प्रतिरोध कहलाता है |

कूलम्ब (Coulomb)

यह इकाई चार्ज की मात्रा है जब 1 एंपियर की धारा की मात्रा 1 सेकंड में किसी परिपथ में या चालक में से गुजरती है तो एक कूलाम चार्ज गुजरता है चार्ज को Q तथा कूलाम को C द्वारा लिखा जाता है

एक कूलाम = 1 एंपियर /सेकेंड

या

एक कूलाम = 6.242x 1018 इलेक्ट्रॉन प्रति सेकंड

वोल्टेज ड्रॉप (Voltage Drop)

करंट तथा प्रतिरोध का गुणनफल वोल्टेज ड्रॉप कहलाता है उदाहरण के तौर पर जिन तारों के बलों द्वारा विद्युत सप्लाई की जाती है उनकी अपनी प्रतिरोधकता के कारण भी वोल्टेज ड्रॉप होता है विद्युत व्यवस्था को उच्च गुणवत्ता का बनाए रखने के लिए वोल्टेज ड्रॉप कम होना चाहिए

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