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आईटीआई इलेक्ट्रीशियन थ्योरी के छात्रों को सबसे ज्यादा जरूरी है कि वह विद्युत उत्पादन (Hydro Power Plant) की प्रक्रिया को अच्छे से समझे आज के पोस्ट में हम यहां पर जल विद्युत ऊर्जा संयंत्र के बारे में आपको विस्तार से समझाएंगे एवं इसकी क्रियाविधि भी बताएंगे इस से होने वाले लाभ व हानि के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे
क्या आप को पता है विश्व में होने वाले कुल शक्ति उत्पादन का 20 प्रतिशत भाग जल संयंत्र द्वारा प्रदान किया जाता है अतः तापीय शक्ति संयंत्र के बाद शक्ति उत्पादन में जल विद्युत संयंत्र (हाइड्रो पावर प्लांट) का एक महत्वपूर्ण योगदान है|
जल विद्युत उत्पादन संयंत्र
हाइड्रो पावर प्लांट क्या है? आइए समझते हैं|
जल विद्युत ऊर्जा का उत्पादन नदियों तथा जिलों में स्वच्छ पानी के भाव से किया जाता है इसके अंतर्गत पानी को उच्च स्थान पर एकत्रित किया जाता है जहां इसके स्थितिज ऊर्जा होती है इस पानी को नीचे की ओर बढ़ाया जाता है जिसके कारण इसके स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है गुरुत्वाकर्षण के कारण पानी का बहाव नीचे की ओर होता है इस बहते हुए पानी में गतिज ऊर्जा होती है जिसका रूपांतरण यांत्रिक ऊर्जा में होता है जल विद्युत शक्ति केंद्रों में इस यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है जल विद्युत केंद्र में विद्युत शक्ति का उत्पादन बहुत ही निम्न दरों पर किया जा सकता है|
हाइड्रो पावर प्लांट का योजनाबद्ध प्रबंधन
हाइड्रो पावर प्लांट के लिए सर्वप्रथम एक नदिया झील पर बांध का निर्माण किया जाता है और भराव क्षेत्र से जल को एकत्रित करके बांध के पीछे जमा किया जाता है ताकि जलाशय बनाया जा सके इस जलाशय से एक दबाओ सुरंग निकाली जाती है और पेनस्टॉक के शीर्ष पर उपस्थित वॉल्व हाउस तक जल को पहुंचाया जाता हैइस वॉल्व हाउस में मुख्य जल गेट व स्वत: पृथककारी वॉल्व होते हैं यह वॉल्व पावर हाउस तक जल के बहाओ पर कंट्रोल करते हैं और जब पेनस्टॉक भर जाता है तो जल की सप्लाई बंद कर लेते हैं इन वॉल्व हाउस से एक बड़े स्टील पाइप जिसे पेनस्टॉक (जलद्वार) कहते हैं के द्वारा जल को टरबाइन तक पहुंचाया जाता है जल टरबाइन जो लिए जलीय ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है इस टरबाइन के द्वारा मुख्य प्रत्यावर्तन को चलाया जाता है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है इसमें एक सर्च टैंक भी होता है जिसे वॉल्व हाउस उसके ठीक पहले बनाया जाता है विद्युत लोड ना होने की स्थिति में जब टरबाइन गेट अचानक बंद हो जाते हैं तो पेनस्टॉक को हानि पहुंच सकती है अतिरिक्त जल सर्च टैंक में पहुंचकर पेनस्टॉक को छति होने से बचाया जा सकता है
जल विद्युत के फायदे और नुकसान
जल विद्युत ऊर्जा के लाभ
इसकी बनावट अति सरल रखरखाव बेहद कम ईंधन व्य्य तथा प्रदूषण रहित है|
इसमें सहायक उपकरण तापीय शक्ति स्टेशन की अपेक्षा कम काम आते हैं जिससे लागत में कमी होती है|
चुकी ईंधन व्य्य शुन्य है इसलिए इसे चलाना सस्ता पड़ता है|
जल शक्ति विद्युत संयंत्र की कार्यकारी 100 से 125 वर्ष होती है जबकि तापीय शक्ति स्टेशन में या मात्र 20 से 25 वर्ष की होती है|
चुकी यहां कोई ईंधन उपयोग नहीं होता इसलिए जो दिक्कतें तापीय शक्ति स्टेशनों में आती हैं जैसे धुआँ, राख या प्रदूषण हुआ इस संयंत्र में नहीं होती अर्थात इस संयंत्र से आदमी की सेहत को कोई नुकसान नहीं होता|
यह शक्ति विद्युत संयंत्र विद्युत शक्ति उत्पादन के साथ-साथ सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध कराते हैं|
इसका चालन बहुत कम होता है जो उपकरण उपयोग में लाए जाते हैं बता भी सकती स्टेशन की तुलना में ज्यादा मजबूत होते हैं तथा कम वेग से (300 – 400 RPM) घूमते हैं जबकि तापीय शक्ति स्टेशन में उपकरण अधिक वेग (3000 – 4000 RPM) से घूमते हैं इसलिए जल विद्युत शक्ति संयंत्र में उपयोग किए जाने वाले उपकरण जल्दी खराब नहीं होते है|
उचित अनुरक्षण होने पर इस शक्ति संयंत्र की दक्षता समय के साथ घटती नहीं है|
इस विद्युत शक्ति संयंत्र में आपाती हानि या नहीं होती हैं|
इस के प्रचलन के लिए अधिक कुशल इंजीनियर और टेक्नीशियनओं की आवश्यकता कम होती है|
यह शक्ति संयंत्र काफी स्वच्छ होता है क्योंकि किसी भी प्रकार के ईंधन का प्रयोग नहीं किया जाता है|
इन सयंत्रो को बिना समय गवाएं तत्काल प्रारंभ किया जा सकता है तथा मात्र 10 से 15 सेकंड में पूर्ण भार अपने ऊपर ले लेती है जिस कारण इस संयंत्र को शिखर भार के लिए भी काम में लिया जाता है|
इन सयंत्रो को दूरदराज के इलाकों में स्थापित करते हैं जहां जमीन सस्ते उपलब्ध होती है|
जल विद्युत ऊर्जा के हानि
इसमें शक्ति उत्पादन पानी की मात्रा पर निर्भर करती है जो कि उस क्षेत्र में हुई वर्षा पर निर्भर करती है इसलिए लंबे सूखे मौसम के कारण शक्ति उत्पादन प्रभावित होती है|
इसके निर्माण मुख्यता बांध के निर्माण में बहुत समय लगता है|
स्थान का चयन पानी के शीर्ष की उपलब्धता के अनुसार किया जाता है और ऐसे स्थान दूरदराज इलाकों में होते हैं जिससे इस संयंत्र की भार केंद्रों से दूरी बढ़ जाती है जिससे संचरण लाइन पर बहुत अधिक खर्च आता है|
बांध मशीनों तथा अन्य उपकरणों को मिलाकर संपूर्ण संयंत्र को खड़ा करने में बहुत खर्चा होता है इन सयंत्रों की प्रति किलो वाट लागत तापीय शक्ति स्टेशनों की तुलना में अधिक होती है|
बांध पर वॉटर हैमर इफेक्ट होता है अगर किसी प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप आदि से बांध टूट जाए तो यह बहुत बड़े क्षेत्र को डुबो सकता है जिससे जन-हानि की संभावना बढ़ जाती है|
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इस पोस्ट में हम जानेंगे कि रेजिस्टेंस कितने प्रकार के होते हैं, यह कैसे काम करता है और रेजिस्टेंस के कलर कोड को कैसे पहचाने की वह कितने ओम का है और रेजिस्टेंस का उपयोग करने का सही तरीका क्या है प्रतिरोध और महत्वपूर्ण विषयों से संबंधित सभी प्रकार के प्रश्न। हम यहां आप सभी से चर्चा करेंगे। प्रतिरोध बहोत ही महत्वपूर्ण विषय है आईटीआई ट्रेड थ्योरी का आइये इसके बारे में विस्तार से समझते है|
इस पोस्ट की शुरुआत करने से पहले में आप सभी को बता दू की प्रतिरोध कहते किसे है जब किसी विद्युत परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो यह धारा के प्रवाह का विरोध करती है, किसी पदार्थ का यह गुण “प्रतिरोध” कहलाता है, यह विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा में परिवर्तित करता है, इसलिए विद्युत ऊर्जा का मान न्यूनतम होता है। प्रतिरोध की इकाई ओम (Ω) होती है
यदि पदार्थ के सिरों के बीच स्थापित विभवांतर V तथा उसमें प्रवाहित धारा का मान I है तो पदार्थ के प्रतिरोध का मान होगा
R = V/I
यदि पदार्थ के सिरों के बीच विभवांतर 1 वोल्ट हो तथा उसमें से 1 एंपियर की धारा प्रवाहित हो रही है तो पदार्थ का प्रतिरोध का मान एक ओम होगा
प्रतिरोधक को जानने के लिए हम एक चार्ट के जरिए समझ सकते हैं कि प्रतिरोधक कितने प्रकार के होते हैं आइए चार्ट को अच्छे से समझते हैं|
स्थिर मान प्रतिरोध कैसे बनता है और क्या होता है ?
को को बनाने के लिए कार्बन चूर्ण एवं बंधन पदार्थों से बनाए गए पेस्ट को पतले छड़ो के रूप में ढाल दिया जाता है और आवश्यक प्रतिरोध मान के अनुसार छोड़ को टुकड़ों में काट लिया जाता है प्रत्येक टुकड़े के दोनों और एक धात्विक टोपी लगाकर उसे एक संयोजक तार जोड़ दिया जाता है यह संयोजक तार टिन अलोपित तांबे का बना होता है इस प्रकार प्रतिरोधों 1 ओम से 50 किलो ओम तक प्रतिरोधक परास तथा 1/8 से 2 वाट शक्ति परास के बनाए जाते हैं |
परिवर्ती मान प्रतिरोधक क्या होता है ?
परिवर्ती मान प्रतिरोधों को को बनाने के लिए कार्बन चूर्ण एवं बंधक पदार्थों से बनाई गई लई को चंद्राकार पट्टी के रूप में डाल दिया जाता है इस पट्टी को उपयुक्त कुचालक आधार पर कसकर इसके दोनों सिरों पर एक-एक संयोजक जोड़ दिया जाता है पट्टी के ऊपर एक चल भुजा इस प्रकार लगाई जाती है कि उसका संबंध मध्य संयोजक से बना रहे मध्य संयोजक तथा किसी एक सिरे के संयोजक के बीच परिवर्तित प्रतिरोध का मान प्राप्त किया जा सकता है ये प्रतिरोधक 5 ओम से 5 मेगाओम तक प्रतिरोध परास तथा 0. 05 W से 0. 25 W तक के शक्ति पारस में बनाये जाते है
प्रतिरोधक की कलर कोडिंग
1 किलो ओम रजिस्टर
बाजारों एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में आपने देखा होगा की तरह तरह के रजिस्टेंस पर तरह-तरह की रंगो की धरियो द्वारा एक कोड किया जाता है आइए समझते हैं कि यह रंगो की धारिया किस प्रकार से किसी प्रतिरोधक का मान को दर्शाते हैं
जिन प्रतिरोधक का आकार बड़ा होता है उन पर उनका मान प्रतिरोधक बॉडी पर प्रिंट कर दिया जाता है परंतु है प्रतिरोधक जिनका आकार बहुत छोटा होता है उन पर प्रतिरोधक के मान को प्रिंट करना आसान नहीं होता साथ ही सर्किट में लगे प्रतिरोधक का मान किसी कारणवश मिट जाने के कारण उनका मान को पढ़ पाना आसान नहीं होता है अतः इन्हीं कारणों से प्रतिरोधक की कलर कोडिंग की आवश्यकता होती है भिन्न-भिन्न उपयोगी विद्युत परिपथों में भिन्न-भिन्न मान के प्रतिरोधक प्रयुक्त किए जाते हैं प्रतिरोधक की कलर कोडिंग निम्न तथ्यों को ध्यान में रखकर की जाती है|
प्रतिरोधक का मान निर्धारण करने के लिए प्रतिरोध की सतह पर चार रंगीन पटिया बनाई जाती हैं जिनमें प्रत्येक पट्टी का विशेष महत्व होता है पहला रंग प्रतिरोधक के सिरे के पास वाले रंग को मानते हैं प्रतिरोधक के सतह पर की गई कलर कोडिंग की सहायता से प्रतिरोधक का मान ज्ञात करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए|
पहला रंग कभी भी काला गोल्ड एंड सिल्वर नहीं होता है|
गोल्डन और सिल्वर रंग हमेशा दो या तीन रंगों के पश्चात आते हैं|
किसी भी प्रतिरोध का अधिकतम 6 व कम से कम 3 रंग के हो सकते हैं|
प्रतिरोधक पर पहला रंग और दूसरा रंग प्रतिरोधक के मान के प्रथम व द्वितीय अंत को दर्शाते हैं|
तीसरा रंग गुणांक को व चौथा रंग टोलरेंस को दर्शाता है|
यदि प्रतिरोधक पर टोलरेंस की चौथी रंगीन पट्टी नहीं हो तो टोलरेंस 20% माना जाता है|
प्रतिरोध की कलर कोड सारणी
रंग
प्रथम पट्टा
द्वितीय पट्टा
तृतीया पट्टा (गुणांक)
सहनशीलता (टॉलरेंस)
काला
–
0
100
–
भूरा
1
1
101
–
लाल
2
2
102
–
नारंगी
3
3
103
–
पीला
4
4
104
–
हरा
5
5
105
–
नीला
6
6
106
–
बैंगनी
7
7
107
–
धूसर
8
8
108
–
सफेद
9
9
109
–
सुनहरा
–
–
10-1
± 5%
चांदी
–
–
10-2
± 10%
बिना कलर
–
–
–
± 20%
निष्कर्ष
आज के विषय में हमने सीखा प्रतिरोधक किसे कहते हैं वह कितने प्रकार के होते हैं उनके प्रयोग वह प्रतिरोधक से जुड़े महत्वपूर्ण सूत्र साथ ही साथ हम लोगों ने यहां पर प्रतिरोधक के कलर कोड को भी अच्छे से समझा जिससे हमें कभी भी किसी भी प्रतिरोधक को पहचानने में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना ना करना पड़े आशा करता हूं मेरे द्वारा लिखे गए इस पोस्ट से आपको काफी सहायता प्राप्त होगी यदि किसी भी प्रकार का प्रश्न हो तो आप नीचे कमेंट कर सकते हैं साथ ही साथ हमारे साथ जुड़े फेसबुक पेज को भी फॉलो कर सकते है|
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आजकल के सभी कंप्यूटर से जुड़े प्रतियोगी परीक्षाओं व ITI में अक्सर इनपुट यूनिट से जुड़े प्रश्न (input unit kya hai) आते हैं आइए यहां पर हम आपको पूरे विस्तार से input unit in hindi इनपुट यूनिट के बारे में समझाते हैं यह कितने प्रकार के होते हैं इनका क्या प्रयोग है वही ने किस नाम से जानते हैं हम यहां पर आपको पूरी जानकारी देने का प्रयत्न करेंगे
input unit kya hai और यह कितने प्रकार के होते हैं ?
इनपुट ऐसे उपकरण है जिनके द्वारा सूचना कंप्यूटर के CPU में भेजी जाती है यह सूचना टेक्स्ट आवाज या पिक्चर के रूप में हो सकती है अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग इनपुट उपकरण होते हैं इनपुट उपकरणों द्वारा कंप्यूटर प्रयोग करता से संपर्क करता है यह पेरीफेरल उपकरण भी कहलाते हैं पेरीफेरल उपकरण ऐसे उपकरण होते है जो CPU से बाहरी रूप से जुड़े रहते हैं इनपुट उपकरणों को हम तीन श्रेणियों में बांट सकते हैं|
ऑनलाइन इनपुट उपकरण
सोर्स डाटा इनपुट उपकरण
ऑफलाइन इनपुट उपकरण
ऑनलाइन इनपुट यूनिट (Online input unit in hindi)
ऑनलाइन इनपुट उपकरण का प्रयोग real-time प्रोसेसिंग में किया जाता है रियल टाइम प्रोसेसिंग में इनपुट किए गए डाटा की तुरंत प्रोसेसिंग होती है एवं परिणाम तुरंत ही यूजर को प्रदान किया जाता है यद्यपि इस प्रकार के इनपुट उपकरण को एक समय में एक ही यूज़र उपयोग में ले सकता है इस प्रकार के इनपुट उपकरण निम्न है|
डंब टर्मिनल इनपुट यूनिट
यह उपकरण किसी भी प्रकार की सूचना को संग्रह करने में सक्षम नहीं होते एवं नाही प्रोसेसिंग का कार्य संपन्न कर सकते हैं या मुख्य कंप्यूटर से जुड़े रहते हैं जिसे सरवर कहते हैं जो भी सूचनाएं चाहिए यह सर्वर से प्राप्त कर यूजर को आउटपुट के रूप में दर्शाता है|
इंटेलिजेंट टर्मिनल इनपुट यूनिट in Hindi
यह सिस्टम डाटा को संग्रह व प्रोसेस करने की क्षमता रखते हैं इनकी कार्य करने की गति बेहतर होती है |
वॉइस रिकॉग्निशन इनपुट यूनिट
वॉइस रिकॉग्निशन उपकरण का प्रयोग आवाज को पहचानने में किया जाता है इसमें एक माइक्रोफोन या टेलीफोन होता है जो आवाज को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदल देता है जब यह सिग्नल कंप्यूटर में ट्रांसलेट होते हैं तो कंप्यूटर में संग्रहित पैटर्न के आधार पर इनकी तुलना कर ली जाती है जिससे आवाज की पहचान कर ली जाती है यह पैटर्न सिस्टम का शब्दकोश का लाते हैं|
टच टोन टर्मिनल इनपुट यूनिट in Hindi
इस उपकरण द्वारा प्रयोग करता है इस स्क्रीन मॉनिटर को छू कर सिस्टम से संवाद कर सकता है इसमें स्क्रीन पर अनेक विकल्प उपलब्ध और रहते हैं जिन्हें प्रयोग करता छूकर चुन सकते हैं इस प्रकार के उपकरण ए.टी.एम मशीन रेलवे स्टेशन पर पूछताछ में बहुतायत में काम लिया जा रहे हैं|
माउस माउस
Mouse
एक पॉइंटिंग उपकरण है और यह जी. यू.आई (ग्राफिकल यूजर इंटरफेस) मैं बहुतायत से काम लिया जा रहा है |
की-बोर्ड
Keyboard
यह इनपुट का महत्वपूर्ण उपकरण है जो टाइपराइटर के समान होता है किसी भी टेक्स्ट डाटा या निर्देश को इसी के द्वारा कंप्यूटर को दिए जाते हैं या सीपीयू में मदरबोर्ड के की-बोर्ड से तार के द्वारा जुड़ा रहता है इस पर अक्षर अंक और संकेत लिखे होते हैं जिन्हें “कीज” कहते हैं इन कीज को दबा कर या टाइप करके कंप्यूटर में संकेत या डाटा पहुंचा जाता है|
सोर्स डाटा इनपुट यूनिट in Hindi
स्केनर
यह एक इनपुट उपकरण है इसके द्वारा किसी भी लिखित दस्तावेज आकृति को कंप्यूटर में इनपुट किया जा सकता है जिस दस्तावेज है चित्र को स्कैन करना हो उसे स्केनर की समतल सतह पर रख दिया जाता है तथा इस चैनल पर लगे लेंस व प्रकाश स्रोत द्वारा चित्र को फोटो लंच करके पानेरी आंकड़ों में बदलकर कंप्यूटर की मेमोरी में पहुंचा दिया जाता है और इस चित्र को मॉनिटर की स्क्रीन पर देखा जा सकता है किसी स्केनर की गुणवत्ता प्रति इकाई क्षेत्र में उपस्थित क्षेत्रों की संख्या पर निर्भर करती है जो रिजर्वेशन कहते हैं आजकल प्रचलित स्केनर की रेसोलुशन 600 डी.पी.आई (डॉट पर इंच) है सामान्यता दो प्रकार की स्केनर काम में लिए जाते हैं
फ्लैट बेड स्कैनर
हैंड होल्ड स्कैनर
ओ.एम.आर (ऑप्टिकल मार्क रीडर)
एक डिवाइस है जो किसी कागज की सीट पर पेंसिल या पेन के चिन्ह की उपस्थिति या अनुपस्थिति को दर्शाता है इसमें प्रकाश को प्रवाहित किया जाता है जिन स्थानों पर चिन्ह नहीं होते वहां से प्रकाश गुजर जाता है और चीनू स्थान पर चीन होते हैं वहां प्रकाश रुक जाता है इसका प्रयोग पराया प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिकाओं को जांच करने में किया जाता है|
ओ.सी.आर (ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर)
ओ.सी.आर में डाटा लिखने के लिए अक्षरों का एक मानक सेट होता है जिसे मशीन या मनुष्य द्वारा पढ़ा जा सकता है इन्हें ओ.सी.आर मानक कहा जाता है इसमें प्रत्येक अक्षर को एक प्रकाश स्रोत से प्रकाशित किया जाता है और ओ.सी.आर के नीचे रखी हुई फोटो सेंसेटिव मशीन पर प्राप्त कर पढ़ा जा सकता है
ओ.सी.आर की विशेषताएं
इनकी गति बहुत अधिक होती है
इसका प्रयोग करने पर डाटा पुनः तैयार नहीं करना पड़ता
डाटा मैनुअल फीड नहीं किया जाता है जिससे गलती होने की संभावना कम रहती है
एम. आई. सी. आर (मैग्नेटिक इंक कैरक्टर रीडर)
इस उपकरण का मुख्य का उपयोग बैंकों में किया जाता है बैंक के चेक के नीचे एमआईसीआर द्वारा बैंक की कोर्ट संख्याएं ग्राहक खाता संख्या तथा बैंक की राशि प्रदर्शित की जाती है इसमें एक विशेष प्रकार की चुंबकीय स्याही का प्रयोग किया जाता है जिसके चुंबकीय गुणों में आयरन ऑक्साइड लगा होता है किसी चेक को पढ़ने के लिए उसे एम आई सी आर के नीचे से गुजारते हैं यह रीडिंग हेड बड़े अंतराल को एक के रूप में व छोटे अंतराल को जीरो के रूप में पढता है|
एमआईसीआर की विशेषताएं
इसके द्वारा चेक को को पूर्ण शुद्धता के साथ पढ़ा जा सकता है| इसके द्वारा चेक की प्रोसेसिंग बड़ी तीव्रता से होती है| एमआईसीआर से पढ़े गए डाटा को सीधे कंप्यूटर में डाला जा सकता है| एम आई सी आर अक्षरों को मानक व मशीन दोनों द्वारा पढ़ा जा सकता है|
जॉयस्टिक
यह एक सतह पर चरणों में आकृति होती है जिसे हाथ से पकड़ कर घुमाने से उसके अंदर लगी हुई गेंद को घुमाया जाता है हैंडल को घुमाने से स्क्रीन पर चलते ही वस्तु की दिशा को आसानी से बदला जा सकता है इसलिए यह डिवाइस बच्चों के द्वारा कंप्यूटर पर वीडियो गेम्स खेलने में काम ली जाती है वैसे अधिकांशत की है कि बोर्ड द्वारा खेले जा सकते हैं परंतु जॉय स्टिक से खेलना सुविधाजनक होता है|
ट्रैकर बाल
ट्रैकर बाल या ट्रैक बाल भी माउस की तरह पॉइंटिंग डिवाइस है इसके ऊपर की तरफ एक बार होती है जिसे उंगलियों से पकड़ कर घुमाया जाता है इस बार को घुमाने से स्क्रीन पर उपस्थित कर सर को घुमाया जा सकता है गेंद जिस दिशा में घूमती है उसी दिशा में प्वाइंटर घूमता है उसमें भी माउस की तरह दो बटन होते हैं जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर क्लिक किया जा सकता है ट्रैकर बाल प्राय: लैपटॉप कंप्यूटर में लगी होती हैं इससे कार्य करना माउस की अपेक्षाकृत आसान हो जाता है|
लाइट पेन
यह डिवाइस दिखने में साधारण बाल पेन जैसी होती है इससे स्क्रीन पर सीधे ही कोई आकृति बनाई जा सकती है इसके एक सिरे पर पतली टिप होती है वह इसमें एक फोटो से लगा होता है इसका दूसरा सिरा कंप्यूटर के सीपीयू से जुड़ा होता है जब पेन की टीम से कंप्यूटर पर कोई आकृति बनाई जाती है तो इसकी पल्स स्क्रीन से ट्रांसमिट होकर कोड जनरेट कर लेती है एवं हमें कंप्यूटर स्क्रीन पर उसी रूप में दिखाई देता है इसका प्रयोग हम मानचित्र पर विशेष मार्ग लगाने के लिए जैसे क्रिकेट में दर्शकों को मैदान में गेंद की उपस्थिति वृत्त बनाकर दर्शाने के लिए आदि में किया जाता है|
ओ बी आर (ऑप्टिकल बार रीडर)
यह एक ऐसा इनपुट उपकरण है जो लाइनों के रूप में प्रदर्शित डाटा को पढ़ सकता है जिन्हें बार कहते हैं यह वर्टिकल बार अलग-अलग डाटा के लिए निश्चित किए होते हैं जो बार में किसी उत्पाद की विभिन्न सूचनाओं जैसे उत्पाद का मूल्य उत्पाद का नाम उत्पादन तिथि आदि अंकित हो सकती है यह कोड मानवीय रूप से पढ़े नहीं जा सकते यह डिवाइस का लाभ यह है कि बिल बनाते समय ऑपरेटर को उत्पाद संबंधी डाटा फीड करने नहीं पड़ते हैं वह भी आर स्वता ही इन डाटा को कंप्यूटर में फीड कर देता है जैसे गलती होने की संभावना नहीं रहती वह बीआर को शॉपिंग मॉल मेडिकल स्टोर आदि में काम में लिया जाता है|
ऑफलाइन इनपुट यूनिट
ऐसे इनपुट उपकरण होते हैं जो डाटा इनपुट बिना कंप्यूटर की सहायता से कर लेते हैं तथा बाद में इन डाटा को कंप्यूटर द्वारा प्रोसेस करवा लिया जाता है जहां डाटा एंट्री का कार्य अधिक है वहां इस प्रकार के डिवाइस को काम में लिया जाता है क्योंकि किसी कार्य को करने के लिए डाटा एंट्री में 90% समय लगता है एवं प्रोसेसिंग में 10% या इससे कम इसलिए इस 90% इनपुट को के कार्य को ऑफलाइन डिवाइस के द्वारा कर लिया जाता है एवं भविष्य में इस संग्रह डाटा को प्रोसेस करवा दिया जाता है|
की टू कार्ड
यह डाटा एंट्री का सबसे पुरानी ऑफलाइन इनपुट डिवाइस है या डाटा को पंच कार्ड के रूप में संग्रहित करती है इसके लिए इसमें 80 कॉलम एवं 96 कॉलम की की पंच मशीनें होती हैं इस मशीनों में अस्थाई संग्रह स्थान होते हैं जो डाटा को अस्थाई रूप से संग्रह कर लेते हैं जिससे प्रयोग करता अंतिम पंच करने से पहले डाटा में संशोधन कर सकें|
की टू फ्लॉपी
इन मशीनों का आविष्कार डाटा रिकॉर्डिंग की लागत को कम करने के लिए किया गया इनके द्वारा डाटा को सीधे ही डिस्क या फ्लॉपी में स्टोर किया जाता है या डिस्क कम खर्चीली वह बार-बार प्रयोग में ली जाने वाली होती हैं इसमें टाइपराइटर के सामान कीबोर्ड होता है जिसमें कुछ अतिरिक्त की भी होती हैं एवं एक डिस्पले स्क्रीन होता है जो दबाई गई कीज को प्रदर्शित करता है कीबोर्ड में अस्थाई संग्रह होता है जो डाटा को फ्लॉपी में संग्रह करने से पूर्व कोड के रूप में संग्रह कर लेते हैं प्रयोग करता है स्क्रीन पर डाटा की वैधता की जांच कर लेता है और यदि डाटा सही है तो उस फ्लॉपी में स्टोर कर लेता है|
निष्कर्ष
इस विषय में हमने सीखा कि इनपुट यूनिट कितने प्रकार के होते हैं वह उनके उदाहरण उनके उपयोग के साथ-साथ हमने उनके बारे में और भी तरह के विस्तृत जानकारियां हासिल की आशा करता हूं कि आप सभी को मेरे द्वारा दी गई जानकारी संतुष्टि जनक हो यदि आपको इसमें किसी भी तरह का प्रश्न या उससे जुड़े कोई भी सुझाव तो आप हमें मेल या नीचे कमेंट भी कर सकते है अधिक जानकारी के लिए हमारे फेसबुक पेज को भी फॉलो करिए |
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Engineering Drawing Perfection is based on representations Representation of a large object, sentence or action as a sign is called a convention. These conventions have been approved by ISI by IS 696 – 1972
Materials Conventions Representation Symbol According to IS 696 – 1972
Materials
Convention or Symbol
Steel Cast Iron Copper and its alloys Aluminum and its alloys
Lead Zinc Tin White Metal
Brass Bronze Gun Metal
Glass
Porcelain Stone Ware Marble Slate
Asbestos Fiber Felt Synthetic Resin Product Paper Cork Linoleum Rubber Leather Wax Insulating and Filling Material
Wood Plywood
Earth
Brick Work Masonry Fire Bricks
Concrete
Water Oil Petrol Kerosene
By not writing the name of the cut material on the intersecting surface of the object, it is displayed only in the sign of the substance by its ball.