What is the Difference between Welding, Soldering, and Brazing?

Welding, soldering, and brazing are three distinct processes used to join metal parts together. They differ primarily in terms of the temperatures involved and the types of filler materials used.

What is the Difference between Welding, Soldering, and Brazing?

वेल्डिंग (Welding)

Welding

वेल्डिंग प्रक्रिया (Welding Process)

वेल्डिंग में जोड़ पर धातुओं को पिघलाने के लिए गर्मी का सीधा उपयोग किया जाता है|
यह आम तौर पर एक विद्युत आर्क, एक गैस लौ, एक लेजर, या यहां तक कि घर्षण का उपयोग करके किया जाता है।

वेल्डिंग तापमान (Welding Temprature)

वेल्डिंग करने में अत्यधिक उच्च तापमान का प्रयोग होता है, जो की लगभग 3800 डिग्री सेल्सियस तक किया जाता है।
आधार धातुएँ स्वयं पिघलती हैं और एक साथ जुड़ती हैं।

वेल्डिंग भराव सामग्री (Welding Filler Material)

कुछ मामलों में, जोड़ को मजबूत करने के लिए एक भराव सामग्री (वेल्डिंग रॉड या तार) का उपयोग किया जा सकता है।
भराव सामग्री का गलनांक वेल्डिंग करने वाले धातुओं के अनुकूल होना चाहिए।

वेल्डिंग जोड़ की ताकत (Welding Strength of Joint)

वेल्डेड जोड़ आम तौर पर बहुत मजबूत होते हैं और अक्सर मूल सामग्री के समान या उससे भी अधिक मजबूत हो सकते हैं।

वेल्डिंग अनुप्रयोग (Welding Application):

वेल्डिंग का उपयोग हेवीड्यूटी अनुप्रयोगों में किया जाता है जहां उच्च संरचनात्मक मजबूती महत्वपूर्ण होती है, जैसे निर्माण, जहाज निर्माण, ऑटोमोटिव विनिर्माण और एयरोस्पेस उद्योग इत्यादि में।

वेल्डिंग के प्रकार (Types of Welding):

  • MIG (मेटल इनर्ट गैस) वेल्डिंग: एक तार इलेक्ट्रोड और एक इनर्ट गैस शील्ड का उपयोग किया जाता है।
  • TIG (टंगस्टन अक्रिय गैस) वेल्डिंग: एक गैरउपभोज्य टंगस्टन इलेक्ट्रोड और एक अक्रिय गैस शील्ड का उपयोग किया जाता है।
  • SMAW (शील्डेड मेटल आर्क वेल्डिंग): फ्लक्स में लेपित एक उपभोज्य इलेक्ट्रोड का उपयोग किया जाता है|

Definition of Welding in Hindi

Fitter Welding Mock Test

Soldering Mock Test

MRAC Welding Mock Test

सोल्डरिंग (Soldering)

Soldering

प्रक्रिया (Soldering Process)

सोल्डरिंग में जोड़ को ऐसे तापमान पर गर्म करते है जहां सोल्डर (भराव सामग्री) पिघल जाती है और जोड़ में प्रवाहित होती है।
वेल्डिंग के विपरीत, मूल धातुएँ पिघलती नहीं हैं।

तापमान (Soldering Temprature)

सोल्डरिंग कम तापमान पर होती है, आमतौर पर 450 डिग्री सेल्सियस (840 डिग्री फ़ारेनहाइट) से नीचे।

सोल्डरिंग भराव सामग्री (Soldering Filler Material)

भराव सामग्री, जिसे सोल्डर के रूप में जाना जाता है, का गलनांक आधार धातुओं की तुलना में कम होता है।
सामान्य सोल्डर सामग्री में टिन-लेड मिश्र धातु, सीसा रहित मिश्र धातु और विशेष प्रकार का मिश्र धातु शामिल हैं।

सोल्डरिंग जोड़ की ताकत (Soldering Strength of Joint)

वेल्डेड जोड़ों की तुलना में सोल्डर वाले जोड़ अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं, लेकिन वे कई अनुप्रयोगों के लिए पर्याप्त होते हैं।
इनका उपयोग आमतौर पर उन अनुप्रयोगों में किया जाता है जहां विद्युत चालकता महत्वपूर्ण है लेकिन इसका उपयोग उच्च यांत्रिक शक्ति में नहीं किया जा सकता है|

सोल्डरिंग अनुप्रयोग (Soldering Application):

सर्किट बोर्ड पर घटकों को जोड़ने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स में, साथ ही पाइप और फिटिंग को जोड़ने के लिए प्लंबिंग में सोल्डरिंग का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।

सोल्डरिंग के प्रकार:

  • इलेक्ट्रिकल सोल्डरिंग: इलेक्ट्रॉनिक्स में सर्किट बोर्डों को सोल्डरिंग घटकों के लिए उपयोग किया जाता है।
  • प्लंबिंग सोल्डरिंग: तांबे के पाइप और फिटिंग को जोड़ने के लिए प्लंबिंग में उपयोग किया जाता है।
  • आभूषण सोल्डरिंग: धातु के टुकड़ों को जोड़ने के लिए आभूषण बनाने में उपयोग किया जाता है।

टांकना (Brazing)

Brazing

टांकना प्रक्रिया (Brazing Process)

टांकना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक धातुओं को जोड़ने के लिए एक भराव सामग्री, अक्सर पीतल मिश्र धातु का उपयोग किया जाता है।
भराव धातु टांका लगाने की तुलना में उच्च तापमान पर पिघलती है लेकिन आधार धातुओं के पिघलने बिंदु से नीचे होती है।

टांकना तापमान (Brazing Temperature)

टांकना 450 से 1,150 डिग्री सेल्सियस (840 से 2,100 डिग्री फ़ारेनहाइट) के बीच तापमान पर होता है।

टांकना भराव सामग्री (Brazing Filler Material)

ब्रेज़िंग में भराव सामग्री आम तौर पर 450 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के पिघलने वाली बिंदु के साथ एक मिश्र धातु होती है।
सामान्य भराव सामग्री में पीतल, कांस्य और चांदी आधारित मिश्र धातु शामिल हैं।

टांकना जोड़ की ताकत (Strength of brazed joint)

ब्रेज़्ड जोड़, सोल्डर किए गए जोड़ों की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं, हालांकि वेल्डेड जोड़ों जितने मजबूत नहीं होते हैं।
वे अच्छी ताकत प्रदान करते हैं और अक्सर उन अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं जहां मध्यम ताकत की आवश्यकता होती है।

टांकना अनुप्रयोग (brazing applications)

ब्रेज़िंग का उपयोग आमतौर पर प्लंबिंग, एचवीएसी सिस्टम और एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव उद्योगों में धातु भागों को जोड़ने में किया जाता है।
इसका उपयोग उपकरण, हीट एक्सचेंजर्स और विभिन्न प्रकार की मशीनरी के निर्माण में भी किया जाता है।

इन प्रक्रियाओं में से प्रत्येक की अपनी ताकत होती है और इन्हें अनुप्रयोग की विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर चुना जाता है, जिसमें सामग्री अनुकूलता, संयुक्त ताकत और परिशुद्धता की आवश्यकता शामिल है।

Final Conclution of Diffrence Between Welding Soldering and Brazing

Stepsवेल्डिंग (Welding)सोल्डरिंग (Soldering)टांकना (Brazing)
प्रक्रियावेल्डिंग में जोड़ पर आधार धातुओं को पिघलाने के लिए ऊष्मा का सीधा उपयोग किया जाता हैसोल्डरिंग को जोड़ तापमान पर गर्म किया जाता है जहां सोल्डर (भराव सामग्री) पिघल जाती है और जोड़ में प्रवाहित होती है।टांकना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक धातुओं को जोड़ने के लिए एक भराव सामग्री, अक्सर पीतल मिश्र धातु का उपयोग किया जाता है।
तापमान3800°C450°C450 – 1150 °C
मजबूतीबहुत ज्यादाकमवेल्डिंग की तुलना में कम मजबूत
भराव सामग्रीवेल्डिंग रॉड या तारटिन-लेड मिश्र धातु, सीसा रहित मिश्र धातुपीतल, कांस्य और चांदी आधारित मिश्र धातु
उपयोगनिर्माण, जहाज निर्माण, ऑटोमोटिव विनिर्माण और एयरोस्पेस उद्योगइलेक्ट्रॉनिक्स में, साथ ही पाइप और फिटिंग को जोड़ने के लिए प्लंबिंग मेंप्लंबिंग, एचवीएसी सिस्टम और एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव उद्योगों
कौशलउच्च कौशल स्तरनिम्न कौशल स्तरउच्च कौशल स्तर परन्तु सोल्डरिंग से कम

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AC Frequency in Hindi: Sine Wave, Square Wave, Sawtooth Wave

विद्युत क्षेत्र में सर्वप्रथम यह जानना बहुत ही महत्वपूर्ण है की आवृत्ति कितने प्रकार की होती है,आवृत्ति (Types of Frequency in Hindi)की क्या भूमिका है विद्युत क्षेत्र में और इनसे हमारे विद्युत यंत्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है यह किस तरह से कार्य करती हैं सभी के बारे में गहराई से जानना बहुत जरूरी है आइए हम समझते हैं की आवृत्ति (Frequency) कितने प्रकार की होती है भारत में विद्युत की क्या आवृति ? है आवृत्ति क्या है चलिए विस्तार से समझते हैं जैसा कि हम जानते हैं भारत में 50 Hz की आवृत्ति उपलब्ध की जाती है|

Frequency of Alternating Current (A.C) and Types (हिंदी में)

विद्युत आवृत्ति क्या है ? (What is Electrical Frequency?)

प्रत्यावर्ती धारा में प्रति सेकंड पूर्ण चक्रो की संख्या को आवृत्ति कहते हैं इसका मात्रक चक्र प्रति सेकंड अथवा हर्ट्ज़ होता है

आवृत्ति (f)= 1/आवर्तकाल (T)

आवृत्ति के प्रकार (Types of frequency)

ज्यावक्रीय आवृत्ति (Sine Wave Frequency)

ज्यावक्रीय आवृत्ति (Sine Wave Frequency)

साइन वेब या जया वक्रीय तरंग (Sine Wave in Hindi)एक ऐसे प्रकार के तरंग हैं जो एक निश्चित समयांतराल पर ऊपर से नीचे की ओर गति करती है भारत में मानक विद्युत तरंग 50 हर्ट्ज़ प्रति सेकंड है साइन वेब या जया वक्रीय वेव विद्युत उपकरणों के लिए एकअच्छी तरंग मानी जाती है वर्तमान में जय्दातर इन्वर्टर भी साइन वेव में ही उपलब्ध है क्योंकि इस प्रकार के इन्वर्टर से विद्युत यंत्र (पंखे, मोटर आदि )ज्यादा शोर नहीं करते हैं एवं विद्युत उपकरणों को भी सुरक्षित रखते हैं|

साइन तरंगों के महत्व और उपयोग (The Essence of a Sine Wave)

तरंगों की जगत में, मूल साइन तरंग एक महत्वपूर्ण स्थिति में है। इसकी शानदारता न केवल उसके गणितीय सरलता में है, बल्कि इसके विविध उपयोग भी हैं, शक्ति इलेक्ट्रॉनिक्स से ऑडियो इंजीनियरिंग तक कई क्षेत्रों में। यह लेख मूल साइन तरंग की विशेषताओं, महत्व और व्यावहारिक उपयोगों पर परिपूर्ण होने की खोज में जा रहा है।

  1. साइन तरंग की गणितीय प्रतिनिधिता(Mathematical representation of the sine wave):
    मूल साइन तरंग के गणितीय समीकरण को इस प्रकार से प्रस्तुत किया जा सकता है:
    y(t)=A⋅sin(2πft+ϕ)
    जहाँ:
  • y(t) समय t पर तरंग का क्षणिक मान को प्रतिनिधित करता है
  • A तरंग की ऊंचाई है
  • f तरंग की आवृत्ति है
  • ϕ तरंग का चरण कोण है
  1. आवृत्ति और कालक संबंध:
    तरंग की आवृत्ति (f) और कालक (T) के बीच संबंध निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
    f=1/T
    T=1/f
  2. कोणीय आवृत्ति:
    कोणीय आवृत्ति ω को आवृत्ति (f) से निम्नलिखित सूत्र से जोड़ा जा सकता है:
    ω=2πf
  3. RMS ऊंचाई:
    RMS ऊंचाई Arms जिसमें पीक ऊंचाई (A) होती है, उसका सूत्र निम्नलिखित होता है:
    Arms​=A/√2

शुद्ध साइन तरंगों की विशेषताएँ (Characteristics of Pure Sine Waves)

मूल साइन तरंग एक तरंगफलक है जो चिकनी और सममित रूप से अपने केंद्र रेखा के चारों ओर अवसर्पित होती है, जो एक समान पैटर्न बनाती है जिसमें एक स्मूथ कर्व की तरह दिखता है। इसकी गणितीय प्रतिनिधिता एक साइनसॉइडल फ़ंक्शन है, जहाँ तरंग की आंच का जमाव समय के साथ साइनसॉइडल रूप से बदलता है। पेशावर या विकर्षित तरंगों की तुलना में, मूल साइन तरंग को उसके हारमोनियस और एकिक आवृत्ति से चिह्नित किया जाता है।

मूल साइन तरंग की विशेषताएँ

  1. नियमित आवृत्ति(Regular Frequency): मूल साइन तरंग की पहचानी विशेषता उसकी एक, स्थिर आवृत्ति है। यह विभिन्न उपयोगों में समक्रियता और सहमति को बनाए रखने के लिए उपयुक्त होती है।
  2. सममित्रता(Symmetry): मूल साइन तरंग अपनी केंद्र रेखा के चारों ओर सममित्र होती है। तरंग के सकारात्मक और नकारात्मक अर्धों की आदर्श छवि होती है।
  3. कम हारमोनिक विकर्षण(Low Harmonic Distortion): मूल साइन तरंगों में न्यूनतम हारमोनिक विकर्षण होता है, जिससे वे विशेष रूप से वे क्षेत्रों में उपयुक्त होते हैं जहाँ एक साफ, स्थिर सिग्नल महत्वपूर्ण होता है।
  4. पूर्वानुमाननीय चरण संबंध(Predictable Phase Relationship): विभिन्न मूल साइन तरंगों के बीच चरण संबंध निर्धारित होता है, जिससे वे विभिन्न सिग्नल प्रोसेसिंग कार्यों के लिए मूल्यवान होते हैं।

मूल साइन तरंगों के उपयोग(Applications of Pure Sine Waves)

  1. शक्ति इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्वर्टर(Power Electronics and Inverters): शक्ति प्रणालियों में, मूल साइन तरंगों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इन्वर्टर डायरेक्ट करंट (डीसी) को आल्टरनेटिंग करंट (एसी) में परिवर्तित करते हैं, और एक पूर्ण मूल साइन तरंग उत्पादन स्थिर और कुशल प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। कई घरेलू उपकरण, जैसे कंप्यूटर, टीवी और फ्रिज, सही तरीके से काम करने के लिए एक स्मूथ एसी आपूर्ति की आवश्यकता होती है।
  1. ऑडियो इंजीनियरिंग(Audio Engineering): उच्च गुणवत्ता वाले ऑडियो प्रतिरूपण के लिए साफ तरंग आवश्यक होते हैं। मूल साइन तरंग अक्सर ऑडियो उपकरण की परीक्षण, उपकरणों की पैमाने बदलने और ध्वनि प्रणालियों में समस्याओं का पता लगाने के लिए संदर्भ सिग्नल के रूप में उपयोग होते हैं।
  2. नवाचारी ऊर्जा प्रणालियाँ(Renewable Energy Systems): सौर पैनल और पवन चक्कियाँ डीसी विद्युत उत्पन्न करती हैं, जो फिर इन्वर्टर्स का उपयोग करके एसी में परिवर्तित किया जाता है। प्रदूषण के साथ शक्ति परिवर्तन और ग्रिड एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए, ये इन्वर्टर्स पूर्ण मूल साइन तरंग उत्पन्न करते हैं।
  3. चिकित्सा उपकरण(Medical Equipment): प्रेसिजन चिकित्सा उपकरण और नैदानिक उपकरण सटीक और स्थिर सिग्नलों पर आश्रित हैं। मूल साइन तरंगों का उपयोग बहुत सारे चिकित्सा उपकरणों को चालने और नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, सटीक मापन और निदान सुनिश्चित करते हुए।
  4. संचार(Communications): तथ्यसंचार प्रणालियाँ, जैसे कि वायरलेस नेटवर्क और उपग्रह संवाद, प्रदEfficient संकेत प्रेषण के लिए मूल साइन तरंगों का उपयोग करती है।
  5. वैज्ञानिक अनुसंधान(Scientific Research): मूल साइन तरंगों का उपयोग विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों में किया जाता है, जैसे कि आवलोकन, क्वांटम मैकेनिक्स और विद्युतचुंबकीय अध्ययन में।

शुद्धता की पुरस्कृति(The Pursuit of Purity)

यहाँ तक कि इसकी प्रतिभागिता सादगी में दिखाई देती है, मूल साइन तरंग अब तक गणनात्मक उपयोगों में परिपूर्णता की दिशा में एक आदर्श की तरह है। इसकी समानानुसारता, नियमित आवृत्ति और पूर्वानुमाननीयता विभिन्न उद्योगों में एक अविभाज्य उपकरण बनाते हैं। इंजीनियर और वैज्ञानिक निरंतर मूल साइन तरंगों का उत्पन्न करने और उपयोग करने के तरीकों को सुधारने में जुटे हैं, आधुनिक प्रौद्योगिकी की कुशलता और विश्वसनीयता को बेहतर बनाने के लिए नई और नई तकनीकों की सीमाओं को पहुंचाने के लिए।

निष्कर्ष में, मूल साइन तरंग तरंगों की जटिल दुनिया में सरलता की श्रृंगार के रूप में खड़ी है। उसका महत्व शक्ति, संचार, विज्ञान आदि क्षेत्रों में गूंजता है, जिससे यह साबित होता है कि वैज्ञानिक उन्नत समाज को आकार देने में उसका सदियों पुराना महत्व है।

वर्ग तरंग (Square Wave)

वर्ग तरंग: विशेषताएँ, उपयोग और प्रभाव की खोज

Square Wave Wave form

इलेक्ट्रॉनिक्स और सिग्नल प्रोसेसिंग की संगीतमय दुनिया में, वर्ग तरंग एक विशिष्ट खिलाड़ी के रूप में उभरती है जिसकी तेज़, प्रभावशाली मौजूदगी होती है। इसकी विशेषताएँ, उपयोग और आधुनिक प्रौद्योगिकी को आकर्षित करने वाली बनाती हैं। इस लेख में वर्ग तरंगों की दुनिया में खूबसूरती को समझाया जाएगा, उनकी विशेषताओं, उपयोगों और महत्व को प्रकाश में लाने का प्रयास किया गया है।

एक वर्ग तरंग की प्रोफाइल

वर्ग तरंग एक ऐसी अनुदेशिक तरंग है जिसकी विशेषता उसके दो विशिष्ट वोल्टेज स्तरों के बीच आकस्मिक परिवर्तन में होती है। ये परिवर्तन तुरंत होते हैं, जिससे एक तरंगफलक की तरह दिखने वाली तरंग उत्पन्न होती है। वर्ग तरंग की पहचान इसके उच्च और निम्न वोल्टेज स्तरों के बीच की स्पष्ट पहचान के रूप में होती है, जिनमें दोनों के बीच लाइन में लिखा होता है।

वर्ग तरंगों की विशेषताएँ

  1. अलग स्तर: वर्ग तरंग दो वोल्टेज स्तरों के बीच आवर्तन करती है: एक उच्च स्तर (अक्सर +V के रूप में दर्शाया जाता है) और एक निम्न स्तर (अक्सर -V के रूप में दर्शाया जाता है)।
  2. बराबर पल्स चौड़ाई: एक आदर्श वर्ग तरंग में उच्च और निम्न वोल्टेज चरणों की अवधि समान होती है। यह विशेषता तरंग को संतुलित और सममित्र दिखने वाले बनाती है।
  3. तेज परिवर्तन: वोल्टेज स्तरों के बीच के परिवर्तन तुरंत होते हैं, जिससे सिग्नल में एक तेज और आचानक परिवर्तन होता है।
  4. विषम सारी: वर्ग तरंग विषम सारिक में धन्य हैं, जिससे यहां उत्पन्न होने वाले विषम परिवर्तन और कुछ उपयोगों में चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

वर्ग तरंगों के उपयोग

  1. डिजिटल सिग्नल प्रेषण: वर्ग तरंग डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग में मौलिक घटक के रूप में काम करती हैं। वे डिजिटल संचार प्रणालियों में बाइनरी डेटा को प्रतिनिधित्व करने के लिए उपयोग होती हैं, जहां उच्च और निम्न वोल्टेज स्तरों को ‘1’ और ‘0’ के रूप में दर्शाया जाता है।
  2. पल्स विड्थ मॉड्युलेशन (PWM): PWM एक तकनीक है जिसमें वर्ग तरंगों का उपयोग लोड को संचालित करने के लिए किया जाता है। यह मोटर नियंत्रण, प्रकाशिक धीमा करने और शक्ति नियामक में उपयोग होता है।
  3. घड़ी संकेत: डिजिटल प्रणालियों में, वर्ग तरंग घड़ी संकेत के रूप में काम करती हैं जो विभिन्न घटकों के संचालन को समकालित करते हैं। घड़ी संकेत निर्धारित करते हैं कि कब डेटा को पढ़ा या लिखा जाना चाहिए, जिससे आदर्श प्रोसेसिंग सुनिश्चित होता है।
  4. परीक्षण और समस्या निवारण: वर्ग तरंगों का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स और घटकों की आवृत्ति प्रतिक्रिया, उठने और गिरने के समय और स्थानिक व्यवहार की परीक्षण के लिए किया जाता है।
  5. स्विचिंग सर्किट्स: डिजिटल लॉजिक गेट्स और फ्लिप-फ्लॉप्स जैसे इलेक्ट्रॉनिक स्विचिंग सर्किट्स में, वर्ग तरंगों का उपयोग उपकरणों की स्थिति परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
  6. ओस्सिलेटर्स: वर्ग तरंग ओस्सिलेटर्स का उपयोग घड़ी संकेतों, समय संदर्भों और आधिकारिक प्रणालियों में घटिका संकेत, आवृत्ति विभाजक उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

वर्ग तरंगों की विकासशीलता

हालांकि शुद्ध वर्ग तरंग एक आदर्श निरूपित आवश्यकता है, वास्तविक अंमलबज़ अनुपातों, गिरने और उठने के समयों, और विषम परिवर्तन से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने में उलझना देते हैं। इंजीनियर और वैज्ञानिक वर्ग तरंगों को उत्पन्न करने और उपयोग करने की विशेषता और कुशलता को सुधारने के लिए काम करते हैं, खासकर जब तकनोलॉजी विकसित हो रही है और तेज़, और विश्वसनीय सिग्नल प्रोसेसिंग की मांग बढ़ रही है।

डिजिटल युग में वर्ग तरंगें

एक डिजिटल प्रौद्योगिकी द्वारा चलाई जाती है जहां वर्ग तरंग एक मौलिक निर्माण ब्लॉक के रूप में उभरती है। उनके तेज परिवर्तनों और बाइनरी प्रकृति ने जानकारी की प्रतिनिधित्व और प्रक्रिया को बदलने की नींव बनाई है। चाहे डेटा प्रेषण, सिग्नल प्रोसेसिंग, या प्रणाली समकालन में, वर्ग तरंग की सीधी लेकिन शक्तिशाली स्वभाविकता ने हमारे डिजिटल संबंधित दुनिया को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संयोजन में, वर्ग तरंग एक नियामक निरूपकता का संकेत देती है जो मॉडर्न प्रौद्योगिकी को निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसकी तेज परिवर्तन और बाइनरी प्रकृति ने डेटा प्रेषण, शक्ति प्रसारण का नियंत्रण, और प्रक्रियाओं का समकालन की नींव को साकार किया है।

समापन में, वर्ग तरंग विभिन्न तरंगों की विविधता की पुष्टि करती है और आधुनिक प्रौद्योगिकी में उनके बहुपक्षीय योगदानों का परिचय देती है। उनकी योजना क्षमता, शक्ति वितरण को नियंत्रित करने, और प्रक्रियाओं को समकालन करने में उनका संप्रेरणशील किरदार दिग्गजों के बिना नहीं है जो हमारे डिजिटल संबंधित दुनिया को आकार देने में सहायक हैं।

कटिंग वेव (SawTooth Wave)

साइन, वर्गाकार और त्रिकोणीय तरंगों की दुनिया में, कटिंग वेव को कभी-कभी वह ध्यान नहीं मिलता जिसे वह प्राप्त करता है। कटिंग वेव, जिसकी अनूठी आकृति एक बुज़्दिल सीरी के दांतों की तरह होती है, एक सेट के रूपरेखा पाती है जो विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोग पाती है। संगीत संश्लेषण से सिग्नल उत्पन्न करने तक और भी, कटिंग वेव की विशेष विशेषताएँ उसे आधुनिक प्रौद्योगिकी और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम का एक महत्वपूर्ण घटक बनाती हैं।

Sawtooth Wave form

कटिंग वेव की परिभाषा:

कटिंग वेव एक आवृत्तिक तरंग होती है जिसमें शून्य से एक उच्चतम मूल्य तक एक गतिमान वृद्धि होती है, फिर तेजी से वापस शून्य की ओर घटती है, और फिर यह साइकिल दोहराता है। इस तरंग की आकृति एक बुज़्दिल के दांतों की तरह होती है, इसलिए इसका नाम। साइन या वर्गाकार तरंग की तुलना में, कटिंग वेव की तेज उच्चतम और अचानक कमी उसे विशिष्ट और गतिशील दिखने की देती है।

गणितीय प्रतिनिधित्व:

कटिंग वेव का गणितीय प्रतिनिधित्व बहुत सरल होता है। इसे एक सरल सूत्र का उपयोग करके परिभाषित किया जा सकता है:

f(t)=TA​⋅(tkT),

जहाँ:

  • (f(t)) समय (t) पर तरंग का मूल्य प्रतिनिधित करता है,
  • (A) तरंग की ऊंचाई है,
  • (T) तरंग की आवृत्ति है,
  • (k) एक पूरे आवृत्ति की संख्या को प्रतिनिधित करने वाला पूर्णांक है।

विशेषताएँ और गुण:

  1. हारमोनिक सामग्री: कटिंग वेव में एक धरोहरमय स्पेक्ट्रम होता है। साइन तरंग की तुलना में, जिसमें केवल मूल आवृत्ति होती है, कटिंग वेव में विषम और सम धरोहर शामिल होते हैं। यह गुण संगीत संश्लेषण और ध्वनि उत्पन्न के लिए उपयुक्त बनाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार की तिमिंब्र की विस्तारण की जा सकती है।
  2. वृद्धि द्वार: कटिंग वेव की तेजी से बढ़ने वाली धारा उसे संगीत उपकरणों में विशिष्ट आक्रमण ध्वनियों की रूपरेखा बनाने के लिए मूल्यवान बनाती है। यह गुण बांसुरी या कुछ प्रकार की पर्कशिता की आवाज़ की तरह की ध्वनियाँ बनाने में मदद करता है।
  1. संगीत संश्लेषण में एकीकरण: इलेक्ट्रॉनिक संगीत संश्लेषण में, कटिंग वेव अधिकांश सिंथेसाइज़र में उपलब्ध एक मौलिक तरंग है। उसकी विविधता में संश्लेषण ध्वनि डिज़ाइन में व्यापारिक उपयोग करने के लिए इसे एक बुनाई बनाने में सहायक बनाती है।
  2. आवृत्ति परिवर्तन: कटिंग वेव को अक्सर आवृत्ति परिवर्तन (FM) संश्लेषण में एक मात्राकार तरंग के रूप में उपयोग किया जाता है। जब यह एक मात्राकार के रूप में प्रयुक्त होता है, तो यह कैरियर तरंग के लिए जटिल धरोहर और तिम्ब्र विविधता को प्रस्तुत करता है, जिससे अनूठी और विकसित ध्वनियाँ पैदा होती हैं।
  3. सिग्नल उत्पन्न करना: कटिंग वेव संगीत के बाहर भी अनुप्रयोग पाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार में टेस्ट और मिलान के उद्देश्यों के लिए सिग्नल उत्पन्न करने में इसका उपयोग किया जा सकता है।
  4. एनालॉग बनाम डिजिटल: एनालॉग सिंथेसाइज़र में, कटिंग वेव को अक्सर इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का उपयोग करके उत्पन्न किया जाता है। डिजिटल सिंथेसाइज़र में, इसे संख्यात्मक ऍल्गोरिदम का उपयोग करके आकृति के गुणों पर पूरी निगरानी रखते हुए उत्पन्न किया जा सकता है।

50 Most Important Questions for ITI Electrician CBT Exam

These questions cover various aspects of NCVT MIS ITI electrical theory, components, devices, and their applications. Make sure to thoroughly understand the concepts behind each question and its correct answer. According To the latest NIMI Pattern.

50 Most Important Questions for ITI Electrician CBT Exam

50 Most Important Electrician Questions

  1. What is the SI unit of electric charge?
    • a) Ampere
    • b) Volt
    • c) Coulomb (Correct answer)
    • d) Ohm
  2. What is the function of a circuit breaker in an electrical circuit?
    • a) To regulate voltage
    • b) To store electrical energy
    • c) To interrupt the flow of current (Correct answer)
    • d) To convert AC to DC
  3. Which of the following materials is a good conductor of electricity?
    • a) Glass
    • b) Rubber
    • c) Copper (Correct answer)
    • d) Plastic
  4. What is the purpose of an inductor in an electrical circuit?
    • a) To store electrical energy
    • b) To regulate the current flow
    • c) To provide mechanical support
    • d) To oppose changes in current flow (Correct answer)
  5. What is the unit of electric potential difference?
    • a) Ampere
    • b) Ohm
    • c) Volt (Correct answer)
    • d) Watt
  6. What is the purpose of a diode in an electrical circuit?
    • a) To amplify electrical signals
    • b) To store electrical energy
    • c) To control the direction of current flow (Correct answer)
    • d) To regulate voltage
  7. What is the function of a capacitor in an electrical circuit?
    • a) To measure electrical resistance
    • b) To store electrical energy (Correct answer)
    • c) To regulate the current flow
    • d) To amplify electrical signals
  8. What is the SI unit of electrical power?
    • a) Ampere
    • b) Volt
    • c) Watt (Correct answer)
    • d) Ohm
  9. Which device is used to measure electrical resistance?
    • a) Ammeter
    • b) Voltmeter
    • c) Ohmmeter (Correct answer)
    • d) Multimeter
  10. What is the purpose of a fuse in an electrical circuit?
    • a) To regulate current flow
    • b) To store electrical energy
    • c) To provide insulation
    • d) To protect against overcurrent (Correct answer)
  11. What is the function of a relay in an electrical circuit?
    • a) To convert AC to DC
    • b) To amplify electrical signals
    • c) To control high-power circuits using low-power circuits (Correct answer)
    • d) To regulate voltage
  12. What is the unit of electrical resistance?
    • a) Ampere
    • b) Ohm (Correct answer)
    • c) Volt
    • d) Watt
  13. What does the term “AC” stand for in AC power supply?
    • a) Alternating Current (Correct answer)
    • b) Ampere Current
    • c) Applied Current
    • d) Active Current
  14. What does the term “DC” stand for in DC power supply?
    • a) Direct Current (Correct answer)
    • b) Double Current
    • c) Discharge Current
    • d) Dynamic Current
  15. What is the main function of a transformer?
    • a) To convert AC to DC
    • b) To store electrical energy
    • c) To regulate voltage (Correct answer)
    • d) To provide insulation
  16. Which type of motor is commonly used in household appliances?
    • a) Induction motor
    • b) DC motor
    • c) Universal motor (Correct answer)
    • d) Synchronous motor
  17. What is the unit of electrical energy?
    • a) Ampere
    • b) Volt
    • c) Watt
    • d) Joule (Correct answer)
  18. Which device is used to measure electrical voltage?
    • a) Ammeter
    • b) Voltmeter (Correct answer)
    • c) Ohmmeter
    • d) Multimeter
  19. What is the purpose of an insulator in an electrical circuit?
    • a) To regulate current flow
    • b) To store electrical energy
    • c) To provide mechanical support
    • d) To prevent the flow of electric current (Correct answer)
  20. Which material is commonly used as a good insulator of electricity?
    • a) Copper
    • b) Silver
    • c) Aluminum
    • d) Rubber (Correct answer)
  21. What is the purpose of an earth wire in an electrical circuit?
    • a) To regulate voltage
    • b) To store electrical energy
    • c) To provide insulation
    • d) To protect against electric shock (Correct answer)
  22. What is the purpose of a three-pin plug in an electrical circuit?
    • a) To convert AC to DC
    • b) To regulate voltage
    • c) To provide mechanical support
    • d) To ensure proper grounding and safety (Correct answer)
  23. What is the purpose of a resistor in an electrical circuit?
    • a) To amplify electrical signals
    • b) To store electrical energy
    • c) To regulate current flow
    • d) To control the amount of current in a circuit (Correct answer)
  24. Which component is used to step up or step down voltage in a circuit?
    • a) Transistor
    • b) Transformer (Correct answer)
    • c) Capacitor
    • d) Inductor
  25. What is the purpose of a ground fault circuit interrupter (GFCI) in electrical installations?
    • a) To regulate voltage
    • b) To store electrical energy
    • c) To provide mechanical support
    • d) To protect against electric shock (Correct answer)
  26. Which component is used to convert mechanical energy into electrical energy?
    • a) Transformer
    • b) Capacitor
    • c) Generator (Correct answer)
    • d) Inductor
  27. What is the function of an oscilloscope in electrical measurements?
    • a) To measure voltage
    • b) To measure current
    • c) To visualize waveforms (Correct answer)
    • d) To measure resistance
  28. What is the purpose of a surge protector in an electrical circuit?
    • a) To regulate voltage
    • b) To store electrical energy
    • c) To provide mechanical support
    • d) To protect against voltage spikes (Correct answer)
  29. What is the function of a solenoid in an electrical circuit?
    • a) To amplify electrical signals
    • b) To store electrical energy
    • c) To convert electrical energy into mechanical motion (Correct answer)
    • d) To regulate voltage
  30. What is the unit of electric current?
    • a) Ampere (Correct answer)
    • b) Volt
    • c) Ohm
    • d) Watt
  31. What is the purpose of a rectifier in an electrical circuit?
    • a) To convert AC to DC (Correct answer)
    • b) To amplify electrical signals
    • c) To store electrical energy
    • d) To regulate voltage
  32. What is the function of a potentiometer in an electrical circuit?
    • a) To measure current
    • b) To measure voltage
    • c) To control the flow of current (Correct answer)
    • d) To regulate voltage
  33. Which component is used to convert electrical energy into mechanical motion?
    • a) Transformer
    • b) Capacitor
    • c) Motor (Correct answer)
    • d) Inductor
  34. What is the purpose of a varistor in an electrical circuit?
    • a) To regulate voltage
    • b) To store electrical energy
    • c) To protect against voltage surges (Correct answer)
    • d) To amplify electrical signals
  35. What is the purpose of a thyristor in an electrical circuit?
    • a) To convert AC to DC
    • b) To store electrical energy
    • c) To control the flow of current (Correct answer)
    • d) To regulate voltage
  36. Which component is used to protect electrical equipment from excessive current?
    • a) Transformer
    • b) Capacitor
    • c) Fuse (Correct answer)
    • d) Inductor
  37. What is the purpose of a motor starter in an electrical circuit?
    • a) To convert AC to DC
    • b) To amplify electrical signals
    • c) To control the starting and stopping of a motor (Correct answer)
    • d) To regulate voltage
  38. What is the unit of power factor?
    • a) Amperes
    • b) Volts
    • c) Ohms
    • d) None of the above, power factor is a dimensionless quantity (Correct answer)
  39. What is the purpose of a power factor correction capacitor in an electrical circuit?
    • a) To regulate voltage
    • b) To store electrical energy
    • c) To improve the power factor (Correct answer)
    • d) To protect against overcurrent
  40. Which type of motor is commonly used in electric fans?
    • a) Induction motor (Correct answer)
    • b) DC motor
    • c) Universal motor
    • d) Synchronous motor
  41. What is the function of a phase sequence indicator in electrical installations?
    • a) To measure voltage
    • b) To measure current
    • c) To identify the sequence of phases (Correct answer)
    • ) To measure resistance
  42. What is the purpose of a surge arrester in an electrical circuit?
    • a) To regulate voltage
    • b) To store electrical energy
    • c) To protect against voltage surges (Correct answer)
    • d) To amplify electrical signals
  43. Which type of motor is commonly used in elevators?
    • a) Induction motor
    • b) DC motor
    • c) Synchronous motor
    • d) Traction motor (Correct answer)
  44. What is the purpose of a power transformer in electrical systems?
    • a) To convert AC to DC
    • b) To store electrical energy
    • c) To step up or step down voltage (Correct answer)
    • d) To regulate current flow
  45. What is the function of a lightning arrester in electrical installations?
    • a) To regulate voltage
    • b) To store electrical energy
    • c) To protect against lightning strikes (Correct answer)
    • d) To amplify electrical signals
  46. Which component is used to control the speed of an electric motor?
    • a) Transformer
    • b) Capacitor
    • c) Variable frequency drive (Correct answer)
    • d) Inductor
  47. What is the purpose of a motor protection relay in an electrical circuit?
    • a) To convert AC to DC
    • b) To amplify electrical signals
    • c) To protect the motor from overload and faults (Correct answer)
    • d) To regulate voltage
  48. What is the function of a phase sequence relay in electrical installations?
    • a) To measure voltage
    • b) To measure current
    • c) To monitor the correct sequence of phases (Correct answer)
    • d) To measure resistance
  49. Which component is used to measure electrical frequency?
    • a) Transformer
    • b) Capacitor
    • c) Frequency meter (Correct answer)
    • d) Inductor
  50. What is the purpose of a shunt capacitor in power factor improvement?
    • a) To regulate voltage
    • b) To store electrical energy
    • c) To compensate for reactive power (Correct answer)
    • d) To protect against overcurrent

Electrician Chapter Wise Mock Test

Different Types of Primary Cells in Electrical

There are many types of primary cells, let us understand in detail how many types of primary cells are there, which cell is used where and what it is made of, and which electrolyte is used in which cell.

Types of Primary Cells in Electrical

प्राथमिक सेल की परिभाषा

वे सेल इन्हें पुनः आवेशित नहीं किया जा सकता है, प्राथमिक सेल (Defination of Primary Cell) कहलाते हैं| यह रासायनिक ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा प्राप्त करने का एक साधन इनके विसर्जित होने पर विद्युत अपघट्य और इलेक्ट्रॉन दोनों का व्यय होता है संपूर्ण इलेक्ट्रान या विद्युत अपघटन के व्यय होने पर यह सेल बेकार हो जाते हैं तथा फिर से इन्हे काम में लाने के लिए इलेक्ट्रोड या विद्युत अपघटन या दोनों को बदलना पड़ता है प्राथमिक सेल में दो सामान चालक प्लेटे एनोड तथा कैथोड विद्युत अपघट्ये में डूबी रहती हैं विद्युत अपघटन एक प्लेट के साथ अधिक रसायनिक क्रिया करता है और परिपथ को बंद करने पर इलेक्ट्रान एक प्लेट से दूसरे प्लेट पर जाने लगता है जिससे दोनों इलेक्ट्रानो के बीच विभवांतर स्थापित होता और परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है इन सैलो से बनी बैटरी को प्राथमिक बैटरी कहते हैं|

प्राथमिक सेल के प्रकार

प्राथमिक सेल निम्नलिखित प्रकार(Types of Primary Cell) के होते हैं आइए जानते हैं कि कितने प्रकार के प्राथमिक सेल होते हैं और उनका क्या प्रयोग है तथा उनके रासायनिक प्रतिक्रिया को समझते हैं

वोल्टेइक सेल

यह एक कांच के बर्तन का बना होता है जिसमें तनु सल्फ्यूरिक एसिड का विलयन भरा होता है और इसमें कॉपर तथा जिंक की छड़ इलेक्ट्रोड का काम करती हैं इसमें कॉपर की छड़ धनात्मक तथा जिंक की छड़ ऋणात्मक इलेक्ट्रोड का कार्य करती हैं अगर इलेक्ट्रॉड को किसी तार द्वारा जोड़कर परिपथ पूरा किया जाए तो इसमें धारा बहने लगती है क्योंकि सल्फ्यूरिक एसिड के आयन हाइड्रोजन और सल्फेट आयन में टूट जाते हैं

H2SO4 → 2H++SO4-2

हाइड्रोजन आयन धारा की दिशा में जाने लगते हैं और कॉपर की प्लेट पर छोटे-छोटे बुलबुले के रूप में जम जाते हैं सल्फेट आयन जिंक की प्लेट की तरफ जाकर जिंक से क्रिया करते हैं और जिंक सल्फेट बनाते हैं

Zn+2+SO4-2 → ZnSO4+2e

सैल के अंदर धारा जिंक प्लेट से कॉपर प्लेट की ओर तथा बाहर कॉपर प्लेट से जिंक प्लेट की ओर बहती है यही कारण है, कि कॉपर प्लेट एनोड तथा जिंक प्लेट कैथोड का कार्य करती है इस प्रकार के सेल में लोकल एक्शन तथा पोलराइजेशन द्वारा कुछ कमियां पैदा हो जाती हैं जिससे यह अधिक समय तक काम नहीं कर पाती है

वोल्टेइक सेल Voltaic cell Diagram

डेनियल सेल

इस प्रकार के सेल में तांबे की छड़ (+एनोड इलेक्ट्रोड) कॉपर सल्फेट (CuSO4) के घोल से भरे कांच के बर्तन में डूबी रहती है यह गोल डि-पोलेराइजर का कार्य करता है इस कांच के बर्तन के मध्य एक छिद्र युक्त कांच का बर्तन रखा होता है उसमें अमलगमेटेड जिंक (कैथोड इलेक्ट्रोड) हल्के H2SO4 इलेक्ट्रोलाइट में डूबी रहती है| जब ऋणात्मक व धनात्मक के सिरों पर छोटा लैंप लगाया जाता है तब धारा बहने लगती है जो कि तांबे की छड़ से जस्ते की छड़ की ओर बहती है तब निम्न रासायनिक क्रियाएं होती है

Zn+2+H2SO4 → ZnSO4+2H+

2H++CuSO4 → H2SO4+Cu+2

Daniell-Cell Diagram

कॉपर सल्फेट इस सेल में डि-पोलेराइजर का कार्य करता है| यह सेल 1.08 वोल्ट विद्युत वाहक बल प्रदान करता है इसमें जस्ते की छड़ पर मरकरी का लेप चढ़ा होता है

जब सेल को कार्य में नहीं लेना हो तब जस्ते की छड़ को कांच के बर्तन से बाहर निकाल कर रख देना चाहिए

लेक्लांची सेल

एक कांच के खुले मुंह वाले बर्तन में अमोनियम क्लोराइड का घोल भरा होता है जिसमें जिंक की छड़ स्थापित की जाती है जो कैथोड का कार्य करती है इस बर्तन के मध्य में एक छिद्रदार कांच का बर्तन जिसमें मैग्नीज डाई ऑक्साइड तथा कार्बन का चूर्ण भरा होता है यह डी-पोलेराइजर का कार्य करता है एवं इसके बीच में कार्बन की छड़ रखी जाती है जो एनोड का कार्य करती है यदि एक छोटे लैंप को कार्बन व जिंक इलेक्ट्रोड के सिरों से जोड़ा जाए तो सेल में निम्न रासायनिक क्रियाएं होती हैं|

Leclanche Cell Diagram

Zn+2+2NH4Cl → ZnCl2+2NH+3+H2

हाइड्रोजन आयन छिद्रदार बर्तन में से कार्बन इलेक्ट्रॉन की ओर जाते हैं व कार्बन को आवेशित करके स्वयं निरावेशित हाइड्रोजन परमाणुओ में बट जाते हैं जब H2 के परमाणु MnO2 मैंगनीज डाइऑक्साइड से क्रिया करते हैं तो इनका अक्सीकरण हो जाता है

H2+2MnO2 → Mn2O3+H2O

इस सेल का विद्युत वाहक बल 46 वोल्ट होता है जहां निरंतर धारा प्रयोग की आवश्यकता नहीं होती है वहां यह सेल काम में लेते हैं द्रव्य होने व कांच का होने के कारण इनको प्रत्येक स्थान पर ले जाने में परेशानी रहती है इसे टेलीफोन विद्युत घंटी तथा टॉर्च आदि में प्रयोग किया जाता है|

ड्राई सेल

ड्राई सेल को हम पुनः आवेशित नहीं कर सकते इसमें पूरा खोल जस्ते का बना होता है जिसमें जस्ता कैथोड इलेक्ट्रॉन का कार्य करता है वह कार्बन की छड़ इसमें मध्य में लगी होती है जो एनोड इलेक्ट्रोड का कार्य करती है कार्बन की छड़ के ऊपर पीतल की गोल बेलनाकार कैप लगी होती है या सेल आकृति में गोल बेलनाकार बना होता है इसमें अमोनियम क्लोराइड का पेस्ट भरा जाता है इसमें जस्ते के बर्तन में एक बारीक़ कपड़े की थैली में मैंगनीज डाइऑक्साइड तथा कार्बन के छोटे-छोटे कण भरे रहते हैं इस थैली में कार्बन की छड़ रखी जाती है जो थैली के कारण अमोनियम क्लोराइड के पेस्ट से फ्री तक रहती है इस थैली को ऊपर से कोलतार पेस्ट से पैक किया जाता है इसमें ऊपर पीवीसी की कैप होती है जिसमें रासायनिक क्रिया से उत्पन्न हुई गैस आदि निकलने हेतु छेद बने होते हैं

Dry Cell Diagram

इस सेल का आंतरिक प्रतिरोध 0.2 ओम से 0.3 ओम होता है अनेक प्रकार के पोर्टेबल उपकरण एवं टॉर्च में इसका बहुत अधिक उपयोग किया जाता है इसकी एक निश्चित आयु होती है|

मरकरी सेल

मरकरी सेल आकार में छोटा लेकिन अधिक ऊर्जा देने वाला होता है इसका वोल्टेज डिस्चार्ज लगभग एक समान रहता है यह अधिक तापमान सामने वाला तथा अधिक जीवनकाल वाला होता है

Mercury Cell Diagram


यह सेल पोटैशियम हाइड्रोक्साइड तथा मरक्यूरिक ऑक्साइड की लेइ से तैयार किए जाते हैं इनमें यह पेस्ट ही इलेक्ट्रोलाइट का कार्य करते हैं कैथोड इलेक्ट्रोड जस्ते तथा मरकरी के योगिक का बनाया जाता है एनोड इलेक्ट्रोड मरक्यूरिक ऑक्साइड का बनाया जाता है
इनका प्रयोग गाड़ियों अलार्म सिस्टम टेस्टिंग उपकरणों आदि में किया जाता है इन सेल का विद्युत वाहक बल 1.35 से 1.45 वोल्ट होता है यह सेल बटन की आकृति के 12.5 मिलीमीटर x 3 मिलीमीटर मोटाई में होते हैं जंग से बचाने के लिए सेल का कंटेनर निकल पेटिड स्टील का बनाया जाता है इन मरकरी सेल के बीच का इलेक्ट्रोड ऋणात्मक होता है
मरकरी सेल दो प्रकार के होते हैं एक वह जिनका वोल्टेज 1.35 होती है और दूसरा 1.4 वोल्ट का होता है साधारणतः 1.35 वोल्ट वाले सेल का प्रयोग और साइंटिफिक और मेडिकल उपकरणों में होता है जबकि 1.4 वोल्ट को साधारण उपभोक्ता द्वारा प्रयोग किए जाते हैं

जिंक क्लोराइड सेल

जिंक क्लोराइड सेल हेवी ड्यूटी सेल होता है क्योंकि इससे प्राप्त धारा का मान अधिक होता है और यह अधिक धारा के लिए काफी समय तक प्रयोग में लाया जा सकता है

Zinc chloride cell diagram

जिंक क्लोराइड सेल की बनावट शुष्क सेल से मिलती जुलती है इन दोनों में केवल इलेक्ट्रोलाइट का ही फर्क होता है इसमें अमोनियम क्लोराइड नहीं होता है बल्कि जिंक क्लोराइड का उपयोग इलेक्ट्रोलाइट के रूप में होता है सेल में क्रिया होते समय पानी का प्रयोग होता रहता है नहीं तो वह पूरी ही सूख जाता है इसलिए सेल कम तापमान पर प्रयोग में लाया जाता है

सिल्वर ऑक्साइड सेल

सिल्वर ऑक्साइड सेल इस प्रकार के सेल बहुत कुछ मरकरी सेलो से मिलते जुलते होते हैं यह कम लोड पर उच्च वोल्टता प्रदान करते हैं मरकरी सेल की भांति सिल्वर ऑक्साइड सेल में उत्तम ऊर्जा तथा चपटी निर्गत वोल्टता अभिलक्षण होते हैं

इनकी बनावट व मरकरी सेल की बनावट में कोई विशेष अंतर नहीं होता है इसमें एनोड इलेक्ट्रोड सिल्वर ऑक्साइड व कैथोड इलेक्ट्रोड जिंक पाउडर का बना होता है

बुनसेन सेल

यह सेल कांच के बर्तन का बना होता है इसमें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल इलेक्ट्रोलाइट के रूप में प्रयोग होता है तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में मरकरी की परत चढ़ी जस्ते की बनी छड़ रखी जाती है जो कि कैथोड इलेक्ट्रोड का कार्य करती है इस बड़े बर्तन के अंदर छिद्र युक्त एक कांच का बर्तन और रखा जाता है वह उसके मध्य कार्बन छड़ रखी जाती है जो एनोड इलेक्ट्रॉन का कार्य करती है इस बर्तन में नाइट्रिक अम्ल भरा होता है

bunsen cell Diagram

जिंक की छड़ तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से क्रिया करके जिंक सल्फेट व हाइड्रोजन आयन बनाती है हाइड्रोजन जब नाइट्रिक अम्ल से क्रिया करता है तब पानी तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड बनती है इस सेल का विद्युत वाहक बल 1.9 वोल्ट होता है

निकिल कैडमियम सेल

इसका कैथोड इलेक्ट्रोड कैडमियम तथा एनोड इलेक्ट्रोड निकिल हाइड्रोक्साइड का बनाया जाता है निकिल हाइड्रोक्साइड का प्रयोग निकिल आयरन सेल में भी करते हैं कैडमियम के उपयोग से सेल का आंतरिक प्रतिरोध कम हो जाता है इसका प्रयोग फ्लोटिंग प्रकार की बैटरीओं के लिए अच्छा होता है बड़े डीजल इंजन की बैटरी बनाने में इसका प्रयोग होता है

nickel cadmium cell diagram structure

लिथियम सेल

यह भी प्राथमिक सेल है यह अनेक आमापो और विन्यास में उपलब्ध होते हैं लिथियम के साथ प्रयुक्त रसायनों पर आधारित सेल की वोल्टेज 2.5 से 3.6 वोल्ट के बीच होती है यह अन्य प्रायमरी सेल से उच्च वोल्टेज रखते हैं इसकी आयु 10 वर्ष होती है तथा इनकी उच्च ऊर्जा और भार अनुपात 350Wh/Kg होता है यह सेल -50 से +75 डिग्री सेंटीग्रेड ताप परास पर कार्य करते हैं ये सेल घड़ियों हृदय संबंधित पेस मेकर, टॉर्च इत्यादि में प्रयोग किए जाते हैं

प्राथमिक सेल से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न

प्राथमिक सेल किसे कहते हैं?

वे सेल जिन्हे पुनः आवेशित नहीं किया जा सकता है प्राथमिक सेल कहलाते हैं

प्राथमिक सेल कितने प्रकार के होते है

प्राथमिक सेल निम्नलिखित प्रकार के होते हैं जैसे लिथियम सेल, निकेल कैडमियम सेल, बुनसेन सेल, सिल्वर ऑक्साइड सेल, जिंक क्लोराइड सेल, मरकरी सेल, ड्राई सेल, लेक्लांची सेल, डेनियल सेल, क्षारीय सेल इत्यादि |

शुष्क सेल का प्रयोग ज्यादातर कहां किया जाता है

शुष्क सेल का प्रयोग ज्यादातर टॉर्च में किया जाता है


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प्रतिरोध की गणना : Resistance Value in Hindi ?

Any Resistance/Resistor (प्रतिरोध) Calculate Resistance Value a very simple Register is a very important component for electronic and electrician trade whose unit is ohm. About the value of register is represented by color code of 4 or 6 bands. Let us understand what is meant by color code of resistance. and find the value of resistance from its color code

Calculate Resistance Value in Hindi

प्रतिरोध (Resistance) क्या होता है?

जब किसी विद्युत परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो यह धारा के प्रवाह का विरोध करती है, किसी पदार्थ का यह गुण “प्रतिरोध” कहलाता है, यह विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा में परिवर्तित करता है, इसलिए विद्युत ऊर्जा का मान न्यूनतम होता है। प्रतिरोध की इकाई ओम (Ω) होती है|

प्रतिरोधों में रंगीन बैंड (Color Band) क्या होता है?

जिन प्रतिरोधो का आकार बड़ा होता है उनका मान प्रतिरोधक बॉडी पर प्रिंट कर दिया जाता है परंतु वे प्रतिरोधक जिनका आकार बहुत छोटा है उन पर प्रतिरोधक के मान को प्रिंट करना आसान नहीं होता साथ ही सर्किट में लगे प्रतिरोधक का मान किसी कारणवश मिट जाने के कारण उनके मान को पढ़ पाना आसान नहीं होता है अतः इन्हीं कारणों से प्रतिरोध को की कलर कोडिंग(Resistance Color Coding in Hindi) की आवश्यकता होती है भिन्न-भिन्न उपयोगी विद्युत परिपथ में भिन्न-भिन्न मान के प्रतिरोधक प्रयोग किए जाते हैं प्रतिरोध को की कलर कोडिंग निम्न तथ्यों को ध्यान में रखकर की जाती है|

  • पहला रंग कभी भी काला गोल्डन या सिल्वर नहीं होता है|
  • गोल्डन या सिल्वर रंग हमेशा दो या तीन रंगों के पश्चात आते हैं|
  • किसी भी प्रतिरोधक पर अधिकतम 6 व कम से कम तीन रंग हो सकते हैं|

प्रतिरोध का पहला व दूसरा कलर बैंड क्या दर्शाता है?

किसी प्रतिरोधक का पहला रंग और दूसरा रंग प्रतिरोधक के मान के प्रथम और द्वितीय अंक को दर्शाता है जैसे कलर चार्ट से समझते हैं

जैसे माना कि किसी प्रतिरोध का प्रथम रंग लाल एवं द्वितीय रंग भूरा है सारणी अनुसार प्रथम बैंड का लाल रंग 2 अंक को दर्शाता है वही प्रतिरोध का दूसरे बैंड भूरा कलर 1 अंक को दर्शाता है

प्रतिरोध का तृतीय कलर बैंड क्या दर्शाता है?

प्रतिरोध का तृतीय कलर(Third Color Band of Resistance) बैंड गुणांक को दर्शाता है जैसे किसी प्रतिरोध का तीसरा रंग बैंड पीला है तो यह उस प्रतिरोध के गुणांक के मान को दर्शाता है चार्ट के अनुसार पीले रंग के लिए गुणांक 104 है अर्थात 10,000

प्रतिरोध का चौथा कलर बैंड क्या दर्शाता है?

किसी प्रतिरोध का चौथा बैंड उस प्रतिरोध की सहनशीलता अर्थात टोलरेंस को दर्शाता है जैसे यदि किसी प्रतिरोध का चौथा रंग सुनहरा है तो उस प्रतिरोध का सहनशीलता 5% होगी यदि प्रतिरोध पर चौथे बैंड में कोई कलर नहीं है अर्थात इसका अर्थ होगा की प्रतिरोध का सहनशीलता 20% है|

प्रतिरोध के मान को ज्ञात करने का सूत्र

प्रतिरोध के मान को ज्ञात करने के लिए सर्वप्रथम प्रथम रंगीन बैंड के रंग को देखे जैसे प्रथम बैंड लाल रंग का है तो चार्ट के अनुसार लाल रंग फर्स्ट बैंड में 2 अंक को दर्शाता है तथा प्रतिरोध का दूसरा रंगीन बैंड पीला है तो या चार्ट के अनुसार 4 अंक को दर्शाता है एवं तीसरा रंगीन बैंड लाल है जोकि गुणांक को दर्शाता है वह चार्ट के अनुसार 102 है|

प्रतिरोध के मान को ज्ञात करने का सूत्र = प्रथम बैंड द्वितीय बैंड x चार्ट के अनुसार तीसरे बैंड का मान ±सहनशीलता (Tolerance)

24 x 102 = 2400 Ohm = 2.4KΩ

चुकी प्रतिरोध के मान वाले तालिका को याद करना अत्यंत जटिल है इसलिए आप इसे एक छोटे ट्रिक से याद रख सकते हैं आइए समझते हैं

प्रतिरोध के मान तालिका को याद करने का ट्रिक

प्रतिरोध के बैंड के कलर कोड को याद रखने के लिए ट्रिक

BB ROY Great Britain Very Good Wife

यहाँ

B :- Black

B :- Brown

R :- Red

O :- Orange

Y :- Yellow

G :- Green

B :- Blue

V :- Violet

G :- Grey

W :- White

प्रतिरोध के महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. 1 किलो ओम प्रतिरोध में कौन-कौन से रंग होते हैं?

Answer :- 1 किलो ओम प्रतिरोध के लिए प्रथम रंग भूरा द्वितीय काला और तृतीय रंग लाल होगा|

Q2. एक प्रतिरोध में रंगों के बैंड का क्रम भूरा काला हरा और सुनहरा है प्रतिरोध का मान कितना होगा?

Solve :- Brown = 1, Black = 0, Green = 105, Golden Tolerance = ± 5%

10×105= 1000000 = 1M Ohm

Q3. प्रतिरोध के मान सारणी को याद करने का तरीका क्या है ?

Answer :- BB ROY Great Britain Very Good Wife

SDSC SHAR Technician B Question Paper June 2022

SHAR – SDSC Satish Dhawan Space Research Technician -B (Electrician) ISRO June 2022 CBT Examination Question Paper in Hindi Most important Question of All Type Technical CBT Examination.

SDSC SHAR ISRO Technician B Question Paper June 2022

Q1. प्रतिरोधक का मान ओम में निकालिए?

220 Ohm Resistor Colour Code

A. 22 Ohm
B. 220 Ohm
C. 2.2K Ohm
D. 2.2 m Ohm

Solve :- (B) 220 Ohm

प्रतिरोध के मान को निकालने से पहले आइए समझते हैं प्रतिरोध तालिका को

प्रतिरोध तालिका के अनुसार

Red Value :- 2

Red Value:- 2

Brown Value :- 101

प्रतिरोध निकालने का सूत्र अनुसार

1st Colour add second colour

22×101 = 220 ohm.

Q2. एक विद्युत भार 3 किलोवाट वास्तविक शक्ति और 2KVAR प्रेरणिक प्रतिक्रियाशील शक्ति खींचता है। यूनिटी लोड पावर फैक्टर प्राप्त करने के लिए आवश्यक कैपेसिटर बैंक की रेटिंग होगी? (SDSC SHAR PYQ Paper)

A. 3KVAR
B. 2 KVAR
C. 5 KVAR
D. 1.5 KVAR

Answer :- (B) 2KVAR

Q3. कोरोना शब्द किस विद्युत प्रणाली से संबंधित है?

A. HVAC
B. UG Cable
C. HVDC
D. LV

Answer :- (A) HVAC

HVAC ट्रांसमिशन लाइन में जब ज्यादा वोल्टेज को एक जगह से दूसरी जगह पर भेजते है, तब कंडक्टर के आस पास वोल्वेट रंग की लाइट उत्पन्न होती है। उस लाइट के बनने को कोरोना इफेक्ट कहा जाता है।

Q4. निम्नलिखित में से किस लैंप में अन्य की तुलना में कम से कम स्ट्रोबोस्कोपिक प्रभाव होता है?

A. HPSV
B. HPMV
C. Metal Halide
D. LED

Answer :- (D) LED

Q5. कौन सा ट्रांसफार्मर का मुख्य भाग नहीं है?

A. लैमिनेटेड कोर
B. प्राथमिक वाइंडिंग
C. द्वितीयक वाइंडिंग
D. दिक् परिवर्तक (कमयुटेटर)

Answer :- (D) दिक् परिवर्तक (कमयुटेटर)

क्योंकि कमयुटेटर मोटर में प्रयोग किया जाता है आर्मेचर में विद्युत सप्लाई देने के लिया यह एक चलित भाग होता है ट्रांसफार्मर में किसी भी प्रकार का चलित भाग नहीं होता है|

Q6. एक लैंप द्वारा उत्सर्जित प्रदीप्त फ्लक्स और लैंप द्वारा उपयोग की गई ऊर्जा का अनुपात है?

A. प्रदीप्त
B. लक्स
C. कैंडेला
D. ज्योति तीव्रता

Answer :- (D) ज्योति तीव्रता

Q7. निम्नलिखित लैंप में से किसका अन्य की तुलना में बेहतर C.R.I है?

A. HPSV
B. HPMV
C. Metal Halide Lamp
D. LED

Answer :- (D) LED

Q8. किसी उपस्कर में सुरक्षा का स्तर IP 54 दर्शाता है ?

A. द्रव से सुरक्षा
B. ठोस धातुओं से सुरक्षा
C. A तथा B
D. शॉर्ट सर्किट से सुरक्षा

Answer :- (C) A तथा B

Q9. यदि एलईडी की दक्षता 80 लुमेन/वाट है, तो 20 वाट एलईडी ट्यूबलाइट का आउटपुट क्या होगा?

A. 1600 लक्स
B. 1600 कैंडेला
C. 1600 लुमेन
D. 1600 वाट

Answer :- (A) 1600 लुमेन

80lm Per Watt = 20 x 80lm = 1600lm

Q10. विद्युत रेगुलेटर में मुख्य कंपोनेंट कौन सी है?

A. उच्च वाट प्रतिरोध
B. IGBT
C. ट्रायक और डायोड
D. ट्रांजिस्टर और डायोड

Answer :- (C) ट्रायक और डायोड

Q11. फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम के अनुसार अंगूठे की उंगली इंगित करती है?

A. कंडक्टर पर बल की दिशा
B. टार्क की दिशा
C. प्रेरित ईएमएफ की दिशा
D. करंट प्रवाह की दिशा

Answer:- (A) कंडक्टर पर बल की दिशा

Q12. मोटर अनुप्रयोग के अलावा विद्युत प्रणाली में तुल्यकाली मोटर का प्रयोग होता है?

A. वोल्टता सुधार में
B. विद्युत सुधार में
C. आवृत्ति सुधार में
D. शक्ति गुणांक सुधार में

Answer :- (D) शक्ति गुणांक सुधार में

Q13. प्रेरण मोटर में सर्पिल वलय (स्लिप रिंग) आमतौर पर धातु की बनी होती है?

A. सिलिकॉन स्टील
B. कार्बन
C. फॉस्फर कांस्य
D. एलुमिनियम

Answer :- (C) फॉस्फर कांस्य

Q14. क्यों स्टार रेटेड घरेलू उपकरणों की विशेष रूप से अनुशंसा की जाती है और इसे बढ़ावा दिया जाता है?

A. क्योंकि भारत में 3 फेज युक्त बिजली वितरण स्टार अभिन्यास में होता है
B. क्योंकि स्टार संबंधन में लाइन धारा एवं फेस समान होता है
C. क्योंकि वह उच्च क्षमता वाला होता है और ऊर्जा की बचत करता है
D. क्योंकि वह अधिक वोल्टेज विभिनताओ को बहन कर सकता

Answer :- (C) क्योंकि वह उच्च क्षमता वाला होता है और ऊर्जा की बचत करता है

Q15. इनमें से कौन सा विद्युत उपकरण जल के भीतर काम कर सकते हैं?

A. IP64 सुरक्षा युक्त उपकरण
B. IP68 सुरक्षा युक्त उपकरण
C. IP54 सुरक्षा युक्त उपकरण
D. IP20 सुरक्षा युक्त उपकरण

Answer :- (B) IP68 सुरक्षा युक्त उपकरण

Q16. निम्नलिखित में से किस एक में सबसे अधिक लागू परिपथ भंजन क्षमता होती है?

A. MCB
B. ELMCB
C. OLR
D. MCCB

Answer :- (D) MCCB

Q17. एक पावर लाइन में तड़ित निवर्तक _____के प्रयोजन हेतु प्रदान किया जाता है?

A. पावर लाइन पर बिजली गिरने से रोकने
B. पावर लाइन में बिजली सर्ज को भु में स्थानांतरण करने
C. अधिक वोल्टेज से सुरक्षा
D. नजदीकी बादल से बिजली गिरने से रोकने

Answer :- (B) पावर लाइन में बिजली सर्ज को भु में स्थानांतरण करने

Q18. 3 कोर पावर तार को YFY के रूप में अभिहित किया गया है यह क्या इंगित करता है ?

A. तांबा चालक Y गोल कवचित PVC से संबंधित है
B. एल्युमीनियम चालक PVC विद्युतरोधी सपाट स्ट्रिप PVC कवचित बाह्य आवरण
C. तांबा चालक LXPE विद्युतरोधी सपाट कवचित PVC आवरण
D. तांबा चालक PVC विद्युतरोधी सपाट स्ट्रिप PVC कवचित बाह्य आवरण

Answer :- (D) तांबा चालक PVC विद्युतरोधी सपाट स्ट्रिप PVC कवचित बाह्य आवरण

Q19. क्या होगा यदि किसी एकल फेज वाटर हीटर को सामान वोल्टता निर्धार वाली डीसी आपूर्ति से जोड़ दिया जाए ?

A. यह अर्ध ताप पर कार्य करेगा
B. यह कार्य नहीं करेगा
C. यह तत्सम जल जाएगा
D. हीटर सामान्य तरीके से कार्य करेगा

Answer :- (D) हीटर सामान्य तरीके से कार्य करेगा

Q20. ब्राइट लैंप पद्धति में कौन सी स्थिति है जिसमें अल्टरनेटर को बस से सामानांतर रखा जाता है?

A. जब सभी लैंप पूर्णतया प्रकाशमय हो
B. जब सभी लैंप पूर्णतया बंद हो
C. जब एक लैंप को बंद कर दें और दूसरे को जलाए रखें
D. जब लैंप तरंग घड़ी की विपरीत दिशा में घूमता है

Answer :- (C) जब एक लैंप को बंद कर दें और दूसरे को जलाए रखें

Q21. निम्नलिखित में से किस अनुप्रयोग के चलते एसी मोटर की तुलना में डीसी मोटर को अधिक पसंद किया जाता है?

A. निम्न गति प्रचालन
B. उच्च गति परिचालन
C. परिवर्तनशील गति परिचालन
D. स्थिर गति प्रचालन

Answer :- (C) परिवर्तनशील गति परिचालन

Q22. संधारित्रों को __ तो को द्वारा अनावेशित करना चाहिए?

A. चालक द्वारा
B. एक ध्रुव भू संपर्क द्वारा
C. प्रतिरोधक
D. दो ध्रुव भू संपर्क द्वारा

Answer :- (C) प्रतिरोधक

Q23. डीसी मोटरो की स्थिति में कौन सा कथन सही है?

A. डीसी सीरीज मोटर हल्का भार पर अधिक गति से चलता है|
B. डीसी सीरीज मोटर का प्रारंभन बालाकुंड बलाघूर्ण कम होता है|
C. डीसी शंट मोटर का प्रारंभन बलाघूर्ण अधिक होता है|
D. डीसी सीरीज मोटर अधिक या काम स्थरांक गति से चलती है|

Answer :- (A) डीसी सीरीज मोटर हल्का भार पर अधिक गति से चलता है|

Q24. 10 स्क्वायर मिमी पीवीसी विद्युत रोधी एकल फेज केबल _______एंपियर (लगभग) की संस्तुत धारा का वहन करेगी?

A. 10 Amps
B. 100 Amps
C. 40 Amps
D. 16 Amps

Answer :- (C) 40 Amps

Q25. जब इन्सुलेशन टेस्टर का उपयोग करके सामान्य इन्सुलेशन माप के दौरान रीडिंग को नोट किया जाना है, तो समय अवधि का पालन किया जाता है?

A. 10 मिनट
B. 10 सेकंड के भीतर
C. 1 मिनट
D. 15 मिनट

Answer :- (C) 1 मिनट

Q26. घरेलू वायरिंग में मानक सीलिंग फैन पॉइंट के लिए प्रयुक्त तार का माप क्या होगा?

A. 1.5 Sq. mm
B. 0.5 Sq. mm
C. 0.75 Sq. mm
D. 4 Sq. mm

Answer :- (A) 1.5 Sq. mm

Q27. एक एसी सर्किट द्वारा खींची गई प्रत्यक्ष शक्ति 5 केवीए है और सक्रिय शक्ति 4 किलोवाट है। केवीए में सर्किट में प्रतिक्रियाशील शक्ति है?

A. 5
B. 3
C. 2
D. 1

Answer :- (B) 3

Q28. एसी को डीसी में बदलने के लिए उपयोग की जाने वाली एक सामान्य विधि कौन सी नहीं है?

A. मोटर जनरेटर सेट
B. रोटरी कनवर्टर
C. मरकरी आर्क रेक्टिफायर
D. इन्वर्टर

Answer :- (D) इन्वर्टर

Q29. दिए गए समकोण त्रिभुज में Sine Ø का मान क्या होगा?

A. a/c
B. a/b
C. b/c
D. a/b

Answer :- (C) b/c

Q30. मोटर सर्किट में थर्मल ओवरलोड रिले _____ सिद्धांत पर काम करता है?

A. मोटर कुंडली तापमान के माप के आधार पर
B. मोटर के बॉडी के तापमान संवेदन के आधार पर
C. द्विधातु स्ट्रिप के द्वारा मोटर करंट से उत्पन्न होने वाली गर्मी को
D. परिवेश के तापमान में वृद्धि के आधार पर

Answer :- (C) द्विधातु स्ट्रिप के द्वारा मोटर करंट से उत्पन्न होने वाली गर्मी को

Q31. पूर्ण लोड के बावजूद भी ट्रांसफार्मर निम्न में से कौन-सी हानि शुन्य है?

A. कोर हानि
B. घर्षण हानि
C. भँवर धारा हानि
D. हिस्टेरेसिस हानि

Answer :- (B) घर्षण हानि

Q32. आईइसी के अनुसार H रोधन श्रेणी का डिग्री सेल्सियस में तापमान सीमा क्या होता है?

A. 120 डिग्री से
B. 130 डिग्री से
C. 155 डिग्री से
D. 180 डिग्री से

Answer :- (D) 180 डिग्री से

Q33. 40 वाट एवं 100 वाट रेटिंग वाले तो प्रदीप्त लैंप को 230 वोल्ट प्रत्यावर्ती धारा आपूर्ति से समांतर क्रम में जोड़ा जाता है निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

A. 40 वाट वाला लैंप 100 वाट वाले लैंप से ज्यादा प्रकाश देगा|
B. 100 वाट वाला लैंप 40 वाले लैंप से ज्यादा प्रकाश देगा|
C. दोनों लैंप एक समान प्रकाश देंगे|
D. दोनों लैंप प्रकाश नहीं देंगे|

Answer :- (B) 100 वाट वाला लैंप 40 वाले लैंप से ज्यादा प्रकाश देगा|

Q34. एक औद्योगिक वर्कशॉप 10 घंटे के लिए 415 वोल्ट 50hz एलटी सप्लाई पर कार्य कर रहा है | भार में, R फेज पर 1 किलो वाट @0.9 pf पश्चगामी प्रकाशीय भार, Y फेज पर 2Kw@UPF का तापक भार और 3 फेज एस सी आई एम का भार 10kW@0.8 पश्चगामी शामिल है वर्कशॉप द्वारा उपयोग की जा रही है उर्जा कितनी है?

A. 130 यूनिट
B. 100 यूनिट
C. 13 यूनिट
D. 65 यूनिट

Answer :- (A) 130 Units

Q35. प्रतिरोध का व्युत्क्रम है?

A. आग्राहिता
B. चालकत्व
C. प्रतिबाधा
D. प्रतिघात

Answer :- (B) चालकत्व

Q36. निम्नलिखित में से किस मोटर का भार पर प्रारंभिक टार्क सर्वाधिक होता है?

A. डीसी सीरीज मोटर
B. एसी सीरीज मोटर
C. तुल्यकाली मोटर
D. स्क्विरल केज प्रेरण मोटर

Answer :- (A) डीसी सीरीज मोटर

Q37. भू मेगर के विषय में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

A. विभव इलेक्ट्रोड की अपेक्षा विद्युत धारा इलेक्ट्रोड, गड्ढे (भू पिट) से अधिक दूरी पर रखे जाते हैं
B. विभव इलेक्ट्रोड की अपेक्षा धारा इलेक्ट्रोड, गड्ढे (भू पिट) से कम दूरी पर रखे जाते हैं
C. विभव इलेक्ट्रोड और विद्युत धारा इलेक्ट्रोड दोनों, गड्ढे (भू पिट) से समान दूरी पर किंतु विपरीत दिशा में रखे जाते हैं
D. मापन के लिए भू मेगर DC विद्युत धारा का प्रयोग करता है

Answer :- (A) विभव इलेक्ट्रोड की अपेक्षा विद्युत धारा इलेक्ट्रोड, गड्ढे (भू पिट) से अधिक दूरी पर रखे जाते हैं

Q38. निम्न में से किसका प्रयोग बिजली आपूर्ति को स्टेप अप करने के लिए नहीं किया जाता है?

A. स्टेप अप ट्रांसफार्मर
B. स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर
C. इन्सुलेशन ट्रांसफार्मर
D. उपकरण ट्रांसफार्मर

Answer :- (D) उपकरण ट्रांसफार्मर

Q39. अधिकतम आयु दक्षता के लिए 120 AH, 12 V, 20C लेड एसिड बैटरी से उत्सर्जन विद्युत धारा की सिफारिश की जाती है?

A.120 एंपियर
B. 6 एंपियर
C. 12 एंपियर
D. 20 एंपियर

Answer :- (B) 6 एंपियर

Q40. डीसी शंट मोटर में टार्क होता है?

A. T α Ia2
B. T α Ia
C. T α 1/I
D. T α 1/Ia2

Answer :- (B) T α Ia

Q41. 220/6V, 50Hz के ट्रांसफार्मर की प्राथमिक कुंडली को 110V, 60Hz की विद्युत आपूर्ति की जाती है द्वितीय आउटपुट वोल्टेज ______होगा?

A. 6.0 V
B. 3.6 V
C. 3.0 V
D. 2.5 V

Answer :- (C) 3.0 V

Q42. 3000 एंपियर से ज्यादा करंट रेटिंग के लिए स्विचिंग तथा सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा कौन सा उपयुक्त है?

A. ACB
B. MCB
C. MCCB
D. ELMCB

Answer :- (A) ACB

Q43. एक को उदीप्ति लैम्प 15 वाट 230 वोल्ट दूसरे उद्दीप्त लैंप 100 वाट , 230 वोल्ट के साथ एक श्रृंखला में जुड़ा है तथा 230 वोल्ट का सप्लाई दिया गया है तब लैम्पो की स्थिति होगी?

A. दोनों लैंप का प्रकाश एक समान होगा|
B. अपनी रेटिंग के अनुसार दोनों लैंपो का प्रकाश पूरा होगा|
C. 100 वाट लैंप की रोशनी ज्यादा होगी|
D. 15 वाट लैंप की रोशनी ज्यादा होगी|

Answer :- (D) 15 वाट लैंप की रोशनी ज्यादा होगी

Q44. कोर प्रकार के ट्रांसफार्मर के लिए क्या सही नहीं है?

A. इसमें एक चुंबकीय पथ होता है|
B. क्षरण अभिवाह कम होता है|
C. अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल अधिक होता है अतः कम टर्न की आवश्यकता होती है|
D. उच्च वोल्टता तथा निम्न शक्ति रेटिंग के लिए उपयोग होता है|

Answer :- (C) अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल अधिक होता है अतः कम टर्न की आवश्यकता होती है|

Q45. कांगन एवं क्रोलिंग परिघटना ______ से संबंधित है?

A. स्क्विरल केज प्रेरण मोटर
B. सोपानक मोटर
C. डीजी सेट
D. तुल्यकाली मोटर

Answer :- (A) स्क्विरल केज प्रेरण मोटर

Q46. निम्नलिखित में से कौन सा ब्रेकर 220 केवी पावर सिस्टम के लिए उपयुक्त नहीं है?

A. SF6
B. VCB
C. MOCB
D. ABCB

Answer :- (B) VCB

Q47. दो विभिन्न स्थलों से एक लैंप को नियंत्रित करने के लिए कितने 5 एंपियर 250 वोल्ट स्विचो की आवश्यकता होती है?

A. एकल पोल स्विचों की संख्या 3
B. 3 पोल स्विचों की संख्या 2
C. 2 पथ स्विचों की संख्या 2
D. तीन पोल तथा उदासीन स्विचों की संख्या 1

Answer :- (C) 2 पथ स्विचों की संख्या 2

Q48. मानक विशिष्ट निर्वहन स्थिति के तहत उपयोग की जाने वाली 200AH 12 V बैटरी से कितनी यूनिट ऊर्जा वितरित की जा सकती है?

A. 2.4 Units
B. 200 Units
C. 12 Units
D. 20 Units

Answer :- (A) 2.4 Units

Q49. निम्नलिखित में से कौन-सी आवृत्ति व्यापक तौर पर वायुयान में विद्युत उपकरणों के लिए प्रयुक्त की जाती है?

A. 50 हर्ट्ज
B. 400 हर्ट्ज
C. 60 हर्ट्ज
D. DC

Answer :- (B) 400 हर्ट्ज

Q50. शिरोपरी (ओवरहेड) लाइन प्रणाली के लिए कौन सा विकल्प गलत है?

A. ओवरहेड चालक रोधन रहित अनावृत है
B. अनुरक्षण आसान है
C. फाल्ट की संभावना अधिक है
D. आकाशीय बिजली नहीं गिरती

Answer :- (D) आकाशीय बिजली नहीं गिरती

Electrician 2nd year MCQ Mock Test in Hindi

आईटीआई इलेक्ट्रीशियन द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह जिसमें 25 प्रश्न है आपको प्रश्नों को हल करने के लिए 15 में मिनट का समय दिया जाएगा आईटीआई NIMI MOCK मॉक टेस्ट आईटीआई इलेक्ट्रिशियन छात्रों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्नों को संग्रहित किया गया|

Time Left (Second)

900

Q1. एक उच्च दाब मरकरी वाष्प लैंप देता है
Q2. एक 3 फेज 4 तार प्रणाली में एक फेज लैप लोड को फीड कर रहा है 3 फेस की मोटर उस सप्लाई पर चलाने से क्या होगा
Q3. जब टरबाइन पर वाष्प छोड़ी जाती है तो तब टरबाइन पैदा करते हैं
Q4. बस बार में प्रयोग की जाने वाली धातु है
Q5. अनुत्तेजित सिंगल फेज तुल्यकालिक मोटर हैा
Q6. तुल्यकाली मोटर होती हैं
Q7. समुन्नत ध्रुव रोटर का प्रयोग निम्नलिखित में से किसके लिए किया जाता है
Q8. एम.सी.बी का पूर्ण रूप है
Q9. प्रदाय का आमाप निम्न में से किस पर निर्भर करता है
Q10. साधारणतया तापन उपकरणों में प्रयुक्त केबल में विद्युत शक्ति की कुछ छति हो जाती है जिसका कारण है
Q11. यदि ट्यूबलाइट में चोक नहीं लगाया जाए तो वह
Q12. आर्मेचर वाइंडिंग में किसी एक कुंडली में लपेटो के पारस्परिक शॉर्ट सर्किट परीक्षण के लिए सर्वोत्तम विधि है
Q13. एकल फेज मोटर में प्रारंभिक कुंडल और द्रितीय कुंडल के बीच कितनी अंश का अंतर होता है
Q14. कैपेसिटर स्टार्ट मोटर मे कपैसिटर निम्नलिखित के साथ श्रेणी में लगा होता है
Q15. तुल्यकालिक गति का अभिप्राय है
Q16. इंडक्शन मोटर में रोटर धारा की आवृत्ति के द्वारा व्यक्त की जाती है
Q17. डी.ओ. एल स्टार्टर लगी हुई बहूफेजीय प्रेरण मोटर में लघुपथन किसके द्वारा बचाया जाता है
Q18. स्टार/डेल्टा स्टार्टर का प्रयोग निम्न में किया जाता है
Q19. प्रत्यागामी पंप जिसको भर के आधीन चालू करने की आवश्यकता होती है, मैं मोटर प्रयोग की जाती है
Q20. 3 फेज DOL स्टार्टर में न्यूनतम निम्न संख्या में संयोजक होने चाहिए
Q21. कपैसिटर स्टार्ट सिंगल फेज मोटर में स्टार्टिंग बल आघूर्ण होता है
Q22. यूनिवर्सल मोटर के घूर्णन की दिशा निम्नलिखित द्वारा उल्टी जा सकती है
Q23. नो लोड की स्थिति में अतिउत्तेजकता से चलित समकालीक मोटर की आर्मेचर धारा
Q24. यदि रिवाइंडिंग के पश्चात या पाया जाता है की कैपेसिटी प्रकार की टेबल फैन मोटर की घूर्णन दिशा परिवर्तित हो गई है तो घूर्णन दिशा को पुनः परिवर्तित करने के लिए
Q25. कैंडेला निम्न में से किसकी इकाई है

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Important DC Circuits Questions Answers in Hindi

Important MCQ questions and answers of series combination and parallel combination of DC circuit combination for the students of ITI Electrician, which are asked in all types of competition exams and for the students of ITI Electrician, what are these questions from DC circuit every year? There are all types of questions in DC circuit whether it is from series circuit or parallel circuit or mixed circuit, we are answering all types of questions in one line which is very important.

DC Circuits Short Questions Answers in Hindi

DC Circuits Question Answer

  • प्रश्न – एक 0.4 ओम प्रतिरोध के तार की लंबाई दोगुनी करने पर प्रतिरोध हो जाएगा
  • उत्तर – 0.8 ओम
  • प्रश्न – लीनियर डिवाइस है
  • उत्तर – हिटर एलिमेंट
  • प्रश्न – किरचॉफ का नियम लागू नहीं होते
  • उत्तर – डिसटीब्युटेड पैरामीटर नेटवर्क में
  • प्रश्न – कैपेसिटर में परावैद्युत हानियों का कारण होता है
  • उत्तर – क्षरण धारा
  • प्रश्न – कुंडली का Q बढ़ाने के लिए कुंडली में प्रयुक्त किया जाना चाहि
  • उत्तर – मोटा तार
  • प्रश्न – यह नियम डी सी परिपथ में विद्युत धारा विभवांतर तथा प्रतिरोध संबंध में स्थापित किया गया है” इस कथन में किस नियम के विषय में बताया गया है
  • उत्तर – ओम का नियम
  • प्रश्न – एक 2 पोर्ट नेटवर्क में हाइब्रिड पैरामीटर प्रदर्शित करते हैं
  • उत्तर – U2 तथा 11 के पदों में U1, I2 को
  • प्रश्न – 1 कैपेसिटर पूर्णतः आवेशित हो जाता है
  • उत्तर – 5T में
  • प्रश्न – “इस उपकरण का प्रयोग व्हीटस्टोन ब्रिज में अज्ञात महान वाले प्रतिरोध का मान ज्ञात करने के लिए किया जाता है” इस कथन में किस उपकरण की ओर संकेत किया गया है
  • उत्तर – पोस्ट ऑफिस बॉक्स
  • प्रश्न – व्हीटस्टोन ब्रिज में कितने प्रतिरोध लगाए जाते हैं
  • उत्तर – 4
  • प्रश्न – जटिल दिष्ट धारा परिपथ के लिए किस रूसी वैज्ञानिक ने 2 नियम प्रतिपादित किया
  • उत्तर – किरचॉफ
  • प्रश्न – किसी चालक का प्रतिरोध उसकी लंबाई के
  • उत्तर – अनुक्रमानुपाती होता है
  • प्रश्न – विशिष्ट प्रतिरोध का विपरीत प्रभाव क्या कहलाता है
  • उत्तर – विशिष्ट चालकता
  • प्रश्न – जब किसी चालक में से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तब वह चालक
  • उत्तर – गर्म हो जाता है
  • प्रश्न – “यह किसी विद्युत उपकरण में आउटपुट का इनपुट से अनुपात होता है” इस कथन में किस पद की ओर संकेत किया गया है
  • उत्तर – वैद्युतिक दक्षता
  • प्रश्न – नॉर्टन में से प्राप्त होता है
  • उत्तर – धारा स्रोत एवं एक प्रतिबाधा समांतर क्रम में
  • प्रश्न – किसी परिपथ में अधिकतम पावर ट्रांसफर के समय पावर ट्रांसफर की दक्षता क्या होती है
  • उत्तर – 50%
  • प्रश्न – एक Constant-K के बैंड स्टाप फिल्टर में सेंट एलिमेंट होता है
  • उत्तर – श्रेणी परिपथ
  • प्रश्न – विशिष्ट प्रतिरोध किसे कहते हैं
  • उत्तर – किसी पदार्थ के इकाई धन आवेश के आमने-सामने के सिरे के मध्य के प्रतिरोध को उस पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध कहा जाता है इसे rho (ρ) से प्रदर्शित किया जाता है
  • प्रश्न – व्हीटस्टोन सेतु का उपयोग किसमें किया जाता है
  • उत्तर – पोस्ट ऑफिस बॉक्स में, मीटर सेतु में
  • प्रश्न – 1800 ओम प्रतिरोधक का प्रतिरोध मान दर्शाया जाता है
  • उत्तर – 1.8K

डीसी जनरेटर क्या है DC Generator in Hindi

डीसी जनरेटर क्या है (What is DC Generator In Hindi) ?डीसी जनरेटर कितने प्रकार के होते हैं ? वह उनका कार्य सिद्धांत क्या है ? हम इसके बारे में विस्तार से जानते हैं

डीसी जनरेटर क्या है ? (DC Generator In Hindi)

चुंबक के प्रयोग के आधार पर व फराडे के नियमों के आधार पर विद्युत उत्पन्न करने वाली मशीन विद्युतीय कार्यों के लिए बहुत उपयोगी बन गई है यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने वाली मशीन को डीसी जनरेटर कहते है यह डीसी धारा उत्पन्न करती है|

DC Generator In Hindi

डीसी जनरेटर का कार्य सिद्धांत क्या है?

डीसी जनरेटर में एक स्प्लिट रिंग लगी होती है आर्मेचर के चालको के कनेक्शन किए जाते हैं जनरेटर जिसमें स्प्लिट रिंग लगी होती है वह प्रत्यावर्ती धारा सप्लाई देता है यह ध्यान रखें कि फैराडे के नियमानुसार उत्पन्न होने वाला EMF हमेशा प्रत्यावर्ती ही होता है|

DC Generator In Hindi
चित्र 1

चित्र एक के अनुसार उत्तर (N) व दक्षिण (S) दो चुंबकत्व ध्रुवो के मध्य चालक को लूप में दिखाया गया है यदि यह चालक बाई और घूम रहा है तो स्प्लिट रिंग भी घूमती है ब्रुश व पोल स्थिर रहते हैं जब चालक जो घूमने वाला है छितिज अवस्था में है तो उत्पन्न EMF ABCD में घटक B (सेगमेंट) से धनात्मक ब्रुश से प्रवाहित होती है व ऋणात्मक ब्रुश A से लोड को ले जाती है|

चित्र 2

चित्र संख्या 2 में जब चालक इस स्थिति में घूम कर आता है कि वह ऊर्ध्वाधर स्थिति में रहे तो ब्रुश दोनों भागों को लघुपत कर देते हैं जिससे उत्पन्न EMF शुन्य हो जाता है कुछ क्षणो के लिए लगे हुए भार में धारा प्रवाहित नहीं होती है|

चित्र 3

चित्र संख्या 3 में जब चालक घूम कर चित्र की स्थिति में आता है तो चालक की भुजा AB दक्षिण ध्रुव (S) क्षेत्र में प्रवेश करती है और उत्पन्न EMF उस दिशा की तुलना में जब उत्तर (N) ध्रुव के क्षेत्र में गतिमय था तो चित्र संख्या 1 के अनुसार EMF उत्पन्न करती है लेकिन इस स्थिति में स्प्लिट रिंग A व B भी अपनी स्थितियों को परिवर्तित करते हैं क्योंकि वह चालक के साथ घूमती हैं जब चालक में AB और CD भुजाएं में EMF उत्पन्न होती है तो स्प्लिट रिंग के भागों से जुड़े संबंध एक साथ स्थिर ब्रुशों के अंतर्गत अपनी स्थितियों को परिवर्तित करते हैं इस प्रकार ब्रुशों की ध्रुवता स्थिर रहती है चित्र संख्या 1 व चित्र संख्या 3 में भार में धारा की दिशा समान रहती है|

चित्र 4

चित्र संख्या 4 के अनुसार दिष्ट धारा की उत्पत्ति को दर्शाया गया है यदि एक चालक की अपेक्षा कई चालकों से वाइंडिंग करके उसके कनेक्शन कमयुटेटर पर किए जाए तो उत्पन्न e.m.f. को बढ़ाकर स्थिर दिष्ट धारा को अच्छे रूप में प्राप्त किया जा सकता है इसके लिए क्षेत्र ध्रुवो की संख्या में वृद्धि व आर्मेचर में विभिन्न क्वाइलों के द्वारा वाइंडिंग करना अर्थात क्वायल संख्या अधिक हो तो दिष्ट धारा का उत्पादन अच्छे रूप में प्राप्त किया जा सकता है चित्र संख्या 4 में फुल वेव दिष्ट धारा दर्शाई गई है|

स्प्लिट रिंग का एक सेट चित्र 5
बाह्य वेब फॉर्म चित्र 5

चित्र संख्या 5 में दर्शाए अनुसार उत्तर व दक्षिण चुंबको के ध्रुवो के बीच चालक को घुमाया जाता है वह एक ही स्प्लिट रिंग लगाई जाती है वेबफॉर्म दिष्ट धारा चित्र में दर्शाई गई है

स्प्लिट रिंग का 2 सेट चित्र 6
बाह्य वेब फॉर्म चित्र 6

यदि दो क्वायल से वेंडिंग की जाती है और कुल घूमने वाले दो चालकों को स्प्लिट रिंग के दो सेटों से जोड़ा जाता है वह दोनों क्वाइलों में उत्पन्न EMF को स्प्लिट रिंग से कार्बन ब्रश लगाकर प्राप्त किया जाए तो चित्र संख्या 6 के अनुसार दिष्ट धारा की वेव फॉर्म बनती है

चित्र संख्या 7

एक कम्यूटेटर जिसमें कई सारी स्प्लिट रिंग (जो सेगमेंट नाम से भी जानी जाती है जो गोलाई में कमयुटेटर पर आपस में माइका द्वारा इंसुलेटेड होकर फिट होती हैं ) मैं कई क्वाइलों की वाइंडिंग के सिरों को कनेक्ट किया जाता है EMF दिष्ट धारा चित्र संख्या 7 के अनुसार वेव फॉर्म बनाते हैं

डीसी जनरेटर की बनावट व संरचना (Construction of dc generator in Hindi)

डीसी जनरेटर की रेटिंग किलो वाट में आती है यह नेम प्लेट पर कंपनी द्वारा दर्शाया जाता है नेम प्लेट जनरेटर का एक भाग होता है जिस पर यह लगी होती है वह भाग स्टेटर होता है

मुख्य रूप से डीसी जनरेटर की 2 भाग होते हैं

  1. स्टेटर
  2. रोटर

डीसी जनरेटर का स्टेटर (Stator of DC Generator)

Stator of DC Generator
डीसी जनरेटर का स्टेटर

वह भाग जो स्थिर रहता है इसमें घूमने वाला कोई अन्य भाग नहीं होता जैसा के चित्र में स्टेटर के बाहरी मुख्य भाग दिखाए गए हैं जो निम्न होते हैं

  1. लिफ्टिंग आई
  2. कास्ट आयरन की बनी बॉडी
  3. नेम प्लेट
  4. फीट
  5. फ्रेम
  6. योक
  7. टर्मिनल बॉक्स

डीसी जनरेटर के स्टेटर में आंतरिक मुख्य भाग निम्न होते हैं

  1. वाइंडिंग (शंट फील्ड वाइंडिंग या सीरीज फील्ड वाइंडिंग )
  2. इंटरपोल
  3. मेन पोल
  4. बेस प्लेट या फीट
  5. साइड कवर
  6. टर्मिनल बॉक्स

डीसी जनरेटर के मुख्य भागों के बारे में विस्तार से विवरण

योक या बॉडी (Yoke or Body)

यह कास्ट आयरन की बनी होती है यह कम किलो वाट के जरनेटर में होती है यदि अधिक किलो वाट की बड़ी जनरेटर है तो उसकी बॉडी नरम स्टील या प्लेटो को काटकर मोड़ कर वेल्डिंग करके तैयार करते हैं डी सी जनरेटर के योक या बॉडी में साइड कवर फिट होते हैं उनमें बेअरिंग का स्थान बना होता है जिससे आर्मेचर की सॉफ्ट घूम सके साइड कवर में जाली लगी होती है बॉडी के ऊपर टर्मिनल बॉक्स लगा होता है अंदर फील्ड पोल्स लगे होते हैं इन्हें बॉडी के साथ बोल्ट से कसा जाता है यह स्टेटर का मुख्य भाग है जो सारे भागों को ढक करता है|

फील्ड पोल्स (Field Pole)

DC Generator Field Pole
फील्ड पोल्स

इसके मुख्य भाग में पोल शू ,सॉलिड पोल कोर , रीविट्स आदि लगे होते हैं इन्हें बॉडी के अंदर मुख्य पोल के रूप में बोल्ट की सहायता से कसा जाता है फील्ड वाइंडिंग को इनके ऊपर ही लगाया जाता है पोल शू , पोल कोर का आगे का काट क्षेत्रफल बढ़ाते हैं वह आर्मेचर की तरह गोलाई देकर एयर गैप की मात्रा एक जैसी रखते हैं यह सिलीकान स्टील की लैमिनेटेड कोर द्वारा बनाया जाता है लैमिनेटेड कोर की मोटाई 1 मिलीमीटर से 0.2 मिली मीटर तक होती है|

रोटर या आर्मेचर (Rotor or Armature in DC Generator)

जनरेटर के घूमने वाले मुख्य भाग को आर्मेचर कहते हैं आर्मेचर के मुख्य भाग निम्न है

  1. सॉफ्ट
  2. कमयुटेटर
  3. लैमिनेटेड कोर (जिसमें स्लॉट बनी हो)
  4. बेअरिंग
  5. बेअरिंग प्लेट
  6. ब्रश होल्डर
  7. ब्रश रोकर
  8. आर्मेचर वाइंडिंग
  9. फैन ब्लेड

आर्मेचर बेलनाकार आकार की होती है इनमें एक नरम स्टील की सॉफ्ट को लेथ मशीन पर तैयार किया जाता है उस सॉफ्ट पर आर्मेचर के सारे भाग फिट किए जाते हैं व 0.064 मिली मीटर मोटी पत्तियों से गोल आकृति में लैमिनेटेड कोर को कई मात्रा में लेकर एक समूह बनाया जाता है उसके पश्चात उनमें वाइंडिंग करने के लिए खाचे बनाए जाते हैं जिन्हें स्लाइड कहते हैं आर्मेचर में की जाने वाली लेप या वेव वाइंडिंग सुपर इनिमेल तार द्वारा की जाती है

शाफ़्ट पर कम्यूटेटर फिट किया जाता है जिस पर कार्बन ब्रश, ब्रश होल्डर में फिट करके इनके संपर्क में रहते हैं इन कार्बन ब्रशके माध्यम से डीसी सप्लाई बाहर प्राप्त की जाती है आर्मेचर के घूमने के माध्यम में सहयोग भाग बेयरिंग होता है यह बाल बेयरिंग रोलर बेयरिंग के नाम से आती है इसके दोनों और बेअरिंग प्लेट लगी होती है व शाफ़्ट पर फैन ब्लेड लगी होती है आर्मेचर के घूमने के साथ यह भी घूमती है जिससे वाइंडिंग ठंडी रहती है

डीसी जनरेटर का आर्मेचर वाइंडिंग (DC Generator Armature Winding Hindi)

यह लेमिनेटेड कोर के खाँचो है जिन्हें स्लॉट कहते हैं पर की जाती है इसमें क्वायल SE तार द्वारा बनाकर डाली जाती है जिससे बाइंडिंग कहते हैं इस वाइंडिंग का कनेक्शन कम्यूटेटर के सेगमेंट पर किया जाता है यह लैप व वेब दोनों प्रकार की होती हैं लैप वाइंडिंग में जितने पोल होते हैं उतने समांतर पथ होते हैं व वेव वाइंडिंग में 2 पथ होते हैं A =2 , P = A होता है

डीसी जनरेटर का लैमिनेटेड कोर (DC Generator Laminated Core in Hindi)

इसे आर्मेचर कोर भी कहते हैं इसकी डाई द्वारा गोल आकृति में कटिंग की जाती है जिसमें से हवा गुजर सके इसके लिए वायु क्षेत्र होते हैं शाफ्ट के लिए गोल क्षेत्र व कि-वे बना होता है प्रत्येक लैमिनेटेड को आपस में इंसुलेटेड होते हैं जिससे एडी करंट या भंवर धाराएं हानि कम होती है आर्मेचर की कोर मुख्य रूप से चुंबकीय क्षेत्र को घुमावदार रखती है सूक्ष्म रेलेक्टेन्स पर चुंबकीय क्षेत्र फुलक्स का लघुपत प्रदान करता है जिससे चुंबकीय परिपथ योक एवं ध्रुव से पूर्ण होता है 0.5 मिलीमीटर मोटी सिलिकॉन स्टील की बनी लैमिनेटेड कोर होती है आर्मेचर को ठंडा रखने के लिए कोर के आर पार छिद्र किए जाते हैं लैमिनेटेड को जितनी पतली होगी उतना ही एडी करंट हानि कम होगा|

कमयुटेटर (DC Generator Commutator In Hindi)

कमयुटेटर का कार्य आर्मेचर के चालको में उत्पन्न धारा को संग्रह करने का होता है यह दिष्ट धारा देता है अर्थात फैराडे के नियम अनुसार चालकों में उत्पन्न होने वाले e.m.f. सदैव प्रत्यावर्ती धारा होता है बाहरी परिपथ के लिए कमयुटेटर दिष्ट धारा परिवर्तित करता है यह बेलनाकर होता है उच्च चालकता दृढ खींचे हुए ड्राफ फ़ोर्ज़े किए हुए तांबे (हार्ड ड्रन कॉपर) का बना होता है इसमें एक भाग को से सेगमेंट कहते हैं यह सेगमेंट आपस में अभ्रक द्वारा इंसुलेटेड रहती हैं अर्थात सेगमेंट से सेगमेंट के मध्य किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं होता है कमेंटेटर में लगने वाली प्रत्येक सेगमेंट एक दूसरे से इंसुलेटेड रहती हैं प्रत्येक सेगमेंट पर आर्मेचर में की गई वाइंडिंग के क्वाइलों के सिरे को सोल्डिंग द्वारा जोड़ा जाता है सेगमेंट की संख्या आर्मेचर क्वायल के समान होती है अभिकेंद्र बल के कारण चालकों को भागने से व सेगमेंट को भगाने से बचाने हेतु V खांचे बने होते हैं जो कोण आकार के मेकेनाईट अंगूठियों द्वारा इंसुलेटेड होता है|

फिल्ड क्वायल (DC Generator Filed Coil)

डीसी जनरेटर के स्टेटर भाग में योक या बाड़ी के आंतरिक भाग में लगे हुए ध्रुव के ऊपर सुपर इनेमल तार द्वारा पूर्ण तरह से इंसुलेटेड क्वायल सही आकृति में फर्मो पर बनाकर फिट की जाती है लैमिनेटेड पोल शु इसे रोके रखने का कार्य करते हैं क्योंकि ध्रुव के ऊपर ध्रुव शू की चौड़ाई व गोलाई इन्हे रोके रखती है डीसी जनरेटर की बनावट के आधार पर यदि श्रेणी जनरेटर है तो मोटे तार व शंट जनरेटर होंगे अतः पतले तार की क्वायल तैयार की जाती है दोनों क्वायल पर एंपायर टेप या काटन टेप से टैपिंग करके एक ही पोल पर दोनों को फिट किया जाता है यदि जनरेटर कंपाउंड जनरेटर है तो यह संभव है

  • डीसी सीरीज मोटर में फील्ड वाइंडिंग, सीरीज वाइंडिंग
  • डीसी शंट जनरेटर में शंट वाइंडिंग
  • डीसी कंपाउंड जनरेटर में सीरीज फील्ड व शंट फील्ड वाइंडिंग दोनों को फिट किया जाता है

कार्बन ब्रश (Carbon Brush)

ब्रश का मुख्य कार्य कमयुटेटर पर से धारा को एकत्रित करना होता है या कार्बन व ग्रेफाइट के बने होते हैं या आयताकार आकृति में होते हैं इनमें फ्लैक्सिबल तांबे की तार लगी होती है एक साइड में तांबे की अर्ध खुली तार लगी होती है जिससे ब्रश को होल्डर में अच्छी तरह से कसा जा सके|

ब्रश होल्डर (Brush Holder)

यह साइड कवर में लगे रोकर पर फिट होती है इसमें स्प्रिंग लगी होती है जो ब्रश पर दबाव बनाए रखती है स्प्रिंग तनाव के रूप में कमयुटेटर पर प्रेस की सही स्थिति बनाए रखती है एक नरम फ्लैक्सिबल तांबे का चालक जो धारा को ब्रश से रोकर पर लगे टर्मिनल तक लाता है वहां से धारा को टर्मिनल बॉक्स पर लगे टर्मिनलओ तक भेजा जाता है ब्रश होल्डर के निम्नलिखित भाग होते हैं

  • स्प्रिंग टेंशन एडजेस्टमेंट
  • ब्रश बॉक्स
  • कार्बन ब्रश
  • फ्लैक्सिबल लीड
  • स्पाइरल स्प्रिंग आदि

बेयरिंग (Bearing)

यह बाल या रोलर बेयरिंग के नाम से आते हैं यह प्रायः कठोर तेल से भरे होते हैं जिससे प्रक्रिया शांत हो एवं बेयरिंग का घिसना कम रहे या सॉफ्ट पर फिट होते हैं तथा आर्मेचर के घूमने पर घर्षण कम करते हैं|

टर्मिनल प्लेट (Terminal Plate)

यह टर्मिनल बॉक्स में फिट होती है यह बेकलाइट की बनी होती है इस पर पीतल के बने टर्मिनल फिट होते हैं|

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आर्मेचर रिएक्शन क्या होता है GNA MNA

आर्मेचर रिएक्शन क्या होता है

आर्मेचर रिएक्शन क्या होता है

आर्मेचर प्रतिक्रिया मुख्य ध्रुव से उत्पन्न चुंबकीय फ्लक्स व आर्मेचर के चालकों में उत्पन्न फ्लक्स के परस्पर विरोध के परिणाम को आर्मेचर प्रतिक्रिया कहते हैं|

प्रति चुंबकीय प्रभाव क्या होता है

जब आर्मेचर चालकों मे से कम भार धारा गुजर रही होती है तो आर्मेचर के चालक द्वारा उत्पन्न EMF मुख्य फील्ड फ्लक्स के साथ इस प्रकार की प्रतिक्रिया करता है कि मुख्य फील्ड क्षेत्र अपनी स्थिति बदल लेता है ऐसे प्रति चुंबकीय प्रभाव कहते हैं

आर्मेचर रिएक्शन क्या होता है
Picture 1

इस स्थिति को जनरेटर मे लगे ब्रुशों को आर्मेचर के घूमने की दिशा में आगे बढ़ाकर सही किया जा सकता है जब जेनरेटर को ओवरलोड करते हैं अर्थात अतिभार करते हैं तो ध्रुव के सिरे संतृप्त हो जाते हैं और मुख्य चुंबकीय फ्लक्स जो मुख्य ध्रुव से बना होता है उसे अचुंबकीय करते हैं इससे उत्पन्न EMF कम हो जाता है

डीसी मशीन में GNA MNA

  • GNA Full Form : Geometrical Neutral Axis (ज्यामिति उदासीन अक्ष)
  • MNA Full Form : Magnetic Neutral Axis (चुंबकीय उदासीन अक्ष)
आर्मेचर रिएक्शन क्या होता है
Picture 2

चित्र संख्या एक में मुख्य क्षेत्र से फ्लक्स वितरण को दिखाया गया है अभी आर्मेचर चालकों में धारा नहीं है फ्लक्स समरूप है GNA व MNA एक ही लाइन पर हैं चित्र दूसरे में नियोजित चुंबकीय फ्लक्स दिखाया गया है (N)उत्तर ध्रुव के अधीन धारा दिशा को (+) चिन्ह एवं दक्षिणी ध्रुव के अधीन धारा को (.) से दर्शाया गया है आर्मेचर की चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता, आर्मेचर धारा पर निर्भर करती है|

प्रति चुंबकन प्रभाव

आर्मेचर रिएक्शन क्या होता है
Picture 3

तीसरे चित्र में मुख्य चुंबकीय क्षेत्र एवं आर्मेचर के मैग्नेटिक मोटिव फोर्स के संयुक्त प्रभाव के फलस्वरूप वितरण को दर्शाया गया है विमुख ध्रुव परिणाम में क्षेत्र वर्धित हो गया है प्राप्त होता है और शिरो पर ध्रुव क्षेत्र कमजोर हो जाता है और चुंबकीय प्रभाव के कारण MNA – GNA से आर्मेचर के घूमने की दिशा में कोण Q के अनुसार विस्थापित हो जाता है अर्थात GNA से MNA आगे हो जाता है क्योंकि मुख्य प्लक्स के बदलाव के कारण ऐसा हो रहा है|

तीसरे चित्र में सदिशों द्वारा मुख्य पर इनफ्लक्स (FF) और आर्मेचर फ्लक्स (FA) का आपसी प्रभाव दर्शाया गया है चुंबकीय उदासीन अक्ष परिणामित फ्लक्स F के लंबवत होना चाहिए|

आर्मेचर रिएक्शन के प्रभाव को कैसे कम करे

आर्मेचर रिएक्शन को कम करने के लिए हम निम्न विधि को अपना सकते हैं आइए समझते हैं

  1. आर्मेचर रिएक्शन के कारण कमयुटेटर पर स्पार्किंग होती है इस इस स्पार्किंग को कम करने हेतु कार्बन ब्रुशों को MNA की नई स्थिति तक आर्मेचर के घूमने की दिशा में घूम आना जरूरी है
  2. आर्मेचर रिएक्शन से मुख्य फील्ड कमजोर होता है अतः फील्ड वाइंडिंग की टर्न बढ़ाकर इस प्रभाव को कुछ सीमा तक कम किया जा सकता है
  3. जनरेटर के फील्ड ध्रुव की कोर पर चुंबकीय फ्लक्स के लिए रिलक्टेंस बढ़ाई जाती है
  4. मुख्य ध्रुव की कोर में ध्रुव के शू बढ़ा दिया जाता है इसे ध्रुवो की स्टैगरिंग कहते हैं
  5. अधिक किलो वाट के जेनेरेटरो में अधिक आउटपुट होता है जनरेटर की लोड धारा लगातार बदलती रहती है अतः आर्मेचर रिएक्शन के प्रभाव भी कम अधिक होता रहता है इस प्रकार के जनरेटर किए ध्रुव शू पर कंपनसेटिंग वाइंडिंग कर दी जाती है इस वाइंडिंग में धारा की दिशा आर्मेचर के चालकों की दिशा के विपरीत रखी जाती है तथा इसे आर्मेचर के श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है कंपाउंड जनरेटर में इसके कनेक्शन आर्मेचर तथा सीरीज फील्ड वाइंडिंग के मध्य किए जाते हैं आर्मेचर रिएक्शन पर नियंत्रण रखने हेतु यह एक उत्तम विधि है

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