ITI Electrician Most Important Units Symbol and Sign

ITI Electrician Most Important Electrical Symbol and their sign for ITI Electrician 1st Year 2nd, 3rd,4th Year Candidate for CBT Examination and Practical Examination of All State

Important Units Symbol and Sign

Mostly asked symbols, Units and Sign for ITI Electrician exam.

QuantitiesSignUnit
CurrentIAmpere
VoltageVVolt
E.M.FEVolt
ResistanceROhm
InductanceGMho
SusceptanceBMho
InductanceLHenry
CondenserCFarad
Inductive ReactanceXLOhm
Capacitive ReactanceXCOhm
ReactanceXOhm
ImpedanceZOhm
AdmittanceYMho
FluxɸWeber
FrequencyHzCycle Per Second
Specific ResistanceρMicro Ohm Per C.M
Temperature CoefficientαOhm
PowerPWatt
Kilowatt HourK.Wh.Kilo Watt Hour
Voltage DropV.DVolt
Potential DifferenceP.DVolt
Power FactorCos ɸ

Given table is the most important table for ITI Electrician students because every year one to four or five questions are asked from this table so you can see and understand the above table carefully.

Alternating Current (AC) Most Important Terms

विद्युत धारा से संबंधित प्रमुख शब्दावली जैसे चक्र आवृति आवर्तकाल वर्ग माध्य मूल मान शिखर मान शिखर से शिखर मान क्षणिक मान औसत मान फॉर्म फैक्टर पीक फैक्टर फेज इन फेज आउट ऑफ पेज भेज अंतर इंडक्टेंस इंडक्टिव रिएक्टेंस कैपेसिटिव रिएक्टेंस एमपी डांस एडमिटेंस कंडक्टेंस लेगिंग धारा लीडिंग धारा साइन वेब आदि के बारे में विस्तार से जानेंगे इनके व्याख्या एवं ग्राफ के साथ सूत्र को भी समझेंगे|

चक्र (Cycle)

Terms of Alternating Current (A.C)

प्रत्यावर्ती धारा की दिशा और मान के पूर्ण जयावक्रीय परिवर्तन को चक्र (Cycle) कहा जाता है।

आवृत्ति (Frequency)

प्रत्यावर्ती धारा में प्रति सेकंड पूर्ण चक्रो की संख्या को आवृत्ति कहते हैं इसका मात्रक चक्र प्रति सेकंड अथवा हर्ट्ज़ जो होता है

आवृत्ति का सूत्र = आवृत्ति(f) = 1/आवर्तकाल (T)

आवर्त काल किसे कहते हैं (Time Period)

Terms of Alternating Current (A.C)

प्रत्यावर्ती धारा में एक चक्र को पूर्ण होने में लगा समय आवर्तकाल कहलाता है इसका मात्रक सेकंड होता है

आवर्तकाल का सूत्र :- आवर्तकाल (T) = 1/आवृत्ति(f)

प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल मान (Root Mean Square Value) R.M.S

प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current )का वर्ग माध्य मूल मान (RMS Full form is = Root Mean Square Value) ज्ञात करने के लिए एक चक्र में समय के कई बिंदुओं पर इसके क्षणिक मान लिए जाते हैं इसके बाद इन मान का वर्ग करके जोड़ते हैं और औसत निकालते हैं इस औसत मान का वर्गमूल करने पर प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल मान निकलता है

प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल मान सूत्र = Irms = √I12+I22+I32+…….In2/N

संक्षिप्त में धारा का वर्ग माध्य मूल मान 0.707 होता है

प्रत्यावर्ती धारा का शिखर मान (Peak Value)

Terms of Alternating Current (A.C)

प्रत्यावर्ती धारा सिग्नल की जयवक्रीय प्रकृति मे धनात्मक व ऋनात्मक चक्र में प्राप्त उच्चतम मान को शिखर मान कहते हैं|

शिखर से शिखर मान (Peak To Peak Value)

Peak To Peak Value

प्रत्यावर्ती धारा की ज्यावक्रिय प्रकृति में उच्च धनात्मक मान तथा उच्च ऋणात्मक मान के मध्य की दूरी को शिखर से शिखर मान कहते हैं|

क्षणिक मान (Instantaneous Value)

प्रत्यावर्ती धारा सिग्नल कि ज्यावक्रिय प्रकृति में किसी नियत समय पर लिए गए मान को उस सिग्नल का क्षणिक मान कहते हैं चित्र अनुसार T = t Sec सेकंड पर प्रत्यावर्ती धारा सिग्नल का क्षणिक मान होगा|

क्षणिक मान का सूत्र = I = I0 sin(ωt+ɸ)

औसत मान (Average Value)

औसत मान (Average Value)

प्रत्यावर्ती धारा की आधी वेव में तत्कालिक करंट या वोल्टेज के मानो का औसत प्रत्यावर्ती धारा वोल्टेज या करंट का औसत मान होता है आधी साइकिल के इंटरवल पर

औसत मान का सूत्र, Eavg = e1+e2+e3+……en/n

प्रत्यावर्ती धारा साइनसॉइडल करंट या वोल्टेज का औसत मान इसके पीक वैल्यू के 0.637 गुना के बराबर होता है

फॉर्म फैक्टर (Form Factor)

प्रत्यावर्ती धारा के आर.एम.एस तथा औसत मान का अनुपात फॉर्म फैक्टर कहलाता है इसका प्रतीक K है

फॉर्म फैक्टर = (RMS मान/औसत मान)

फॉर्म फैक्टर का सूत्र= 0.707 अधिकतम मान /0.637 अधिकतम मान = 1.11

पीक फैक्टर (Peak Factor)

प्रत्यावर्ती राशि के आर.एम.एस मान एवं उच्चतम मान के अनुपात को पीक फैक्टर कहते हैं

पीक फैक्टर = अधिकतम मान/R.M.S मान

पीक फैक्टर का सूत्र = Imax/Imax = √2 = 1.414

कला (Phase)

दो प्रत्यावर्ती धारा के घटक के बीच में जो सापेक्ष स्थिति होती है वह फेज (कला) कहलाती है|

इनफेज (In Phase)

इनफेज (In Phase)

जब फेज में वोल्टेज व धारा एक ही समय में शून्य से शुरू होकर एक ही दिशा में अपनी उच्चतम व न्यूनतम मान पर पहुंचती है तो उसे इनफेज कहते हैं

आउट ऑफ़ फेज (Out of Phase)

आउट ऑफ़ फेज (Out of Phase)

जब प्रत्यावर्ती राशियां (वोल्टेज व धारा) एक ही समय पर शुरू नहीं होती ना ही एक ही दिशा में अपने उच्चतम और न्यूनतम मान पर पहुंचते हैं तो इस स्थिति को आउट ऑफ़ फेज कहा जाता है|

फेज अंतर (Phase Difference)

जब प्रत्यावर्ती राशियां अलग-अलग समय अंतराल पर शुन्य से अधिकतम मान्य न्यूनतम मान को प्राप्त करती हैं तो इस समय के अंतर को फेज अंतर कहते हैं इसे ɸ से दर्शाते हैं

इंडक्टेंस (Inductance)

परिपथ में कवाईल का हुआ गुण जिसके कारण e.m.f. उत्पन्न हो जाता है इंडक्टेंस कहलाता है इसे L से प्रदर्शित करते हैं इसकी इकाई हेनरी होती है|

इंडक्टिव रिएक्टेंस (Inductive Reactance)

किसी इंडक्टिव क्वायल के प्रभावशाली प्रतिरोध को इंडक्टिव रिएक्टेंस कहते हैं इसकी इकाई ओम (Ω) है इसे XL से प्रदर्शित करते हैं

XL = 2πfL

जहां,

f = Frequency

L = इंडक्टेंस हेनरी में

कैपेसिटिव रिएक्टेंस (Capacitive Reactance)

यह किसी संधारित द्वारा उत्पन्न किया गया प्रभावशाली प्रतिरोध है इसे XC से प्रदर्शित करते हैं इसकी इकाई ओम (Ω) है|

XC = 2πfc

जहां,

f = Frequency

C = कैपेसिटेंस माइक्रोफैरेड में

इम्पीडैन्स (Impedance)

किसी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रतिरोध कैपेसिटेंस व इंडक्टेंस जुड़े हो तथा इनके कुल प्रतिरोध को इम्पीडैन्स कहते हैं जिसे Z से प्रदर्शित करते हैं इसके इसकी इकाई ओम (Ω) है|

Z = √R2+(XL-XC)2

एडमिटेंस (Admittance)

इम्पीडैन्स के व्युत्क्रम को एडमिटेंस कहते हैं इसको से दर्शाया जाता है इसकी इकाई म्हो (℧) होती है

Y = 1/Z

या,

Y = G2+B2

कंडक्टेंस (Conductance)

प्रतिरोध के व्युत्क्रम को कंडक्टेंस कहते हैं इसे G से प्रदर्शित करते हैं इसके इकाई म्हो (℧) होती है|

G = 1/R

G = Ycosɸ

= 1/Z x R/Z=R/Z2 = R/R2+X2

सस्प्टेन्स (Susceptance)

रिएक्टेंस के व्युत्क्रम को सस्प्टेन्स कहते हैं

B = 1/X

B= Y sinɸ = 1/Z x X/Z

X/Z2= X/R2+X2

लग्गिंग धारा (Lagging Current)

परिपथ में धारा जो वोल्टेज से पीछे रह जाती है लग्गिंग धारा कहलाती है वह अपने उच्चतम और न्यनूतम मान पर वोल्टेज के उच्चतम को न्यूनतम मान को प्राप्त करने के समय के बाद पहुंचती है अर्थात वोल्टेज का मान धारा से आगे रहता है|

लीडिंग धारा (Leading Current)

इस परिपथ में धारा वोल्टेज से आगे निकल जाती है धारा अपने उच्चतम और न्यूनतम मान को वोल्टेज से पहले प्राप्त करती है|

RMS क्या होता है?

प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current )का वर्ग माध्य मूल मान (RMS Full form is = Root Mean Square Value) ज्ञात करने के लिए एक चक्र में समय के कई बिंदुओं पर इसके क्षणिक मान लिए जाते हैं इसके बाद इन मान का वर्ग करके जोड़ते हैं और औसत निकालते हैं इस औसत मान का वर्गमूल करने पर प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल मान निकलता है

आईटीआई इलेक्ट्रीशियन के महत्वपूर्ण विषय

Electrical Symbols In Hindi {विद्युत प्रतीक}

आईटीआई या किसी भी विद्युत के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण विद्युत प्रतीक (Electrical Symbols ) के बारे में जानकारी होना आवश्यक है इसके पूरी जानकारी नहीं होने पर किसी भी इलेक्ट्रीशियन को कार्य करने में कठिनाई होगी और वह सरलता पूर्वक नहीं कर पाएंगे यहां पर मैं आपको 100 से ज्यादा विद्युत सिंबल के बारे में बता रहा हूं आइए देखते हैं

Electrical Symbols In Hindi {विद्युत प्रतीक}

Electrical Symbols Chart

Sr. NoNameSymbols
1Aerial
2AC and DC Meter Circuit
3Ac Current Ammeter
4AC Meter Circuit
5AC Voltmeter
6Aerial Dipole
7Aerial Yagi
8Air Core Transformer
9Alternating Current (AC)
10Analog Meter
11Analog MultiMeter
12Balance Control Position
13Band Pass Filter
14Band Stop Filter
15Base Frequency
16Battery
17Black and White Picture Tube
18Cathode Ray Tube (C.R.T)
19Cell
20Choke
21Colour Picture Tube
22Condenser Microphone
23Convection Heater
24Crossed Wire
25DC Current Ammeter
26DC Current
27DC Meter Circuit
28DC Voltmeter
29Digital Meter
30Dynamic Microphone
31Ear Phone
32Electro Static Meter
33Energy Meter
34Equalizer
35Filter General
36Fire Alarm Indicator
37Fire Alarm Push
38Fire Alert Bell
39Fixed Capacitor
40Frequency Meter
41Galvanometer
42Gang Capacitor
43Gas Diode
44General Microphone
45Ground
46Head Phone
47High pass Filter
48Immersion Heater
49Joint
50Loud Speaker Socket
51Loudspeaker
52Low Pass Filter
53Magnetic Erase Head
54Magneto strictive Delay Line
55Master Clock
56Master Clock Outlet
57Negative (-Ve)
58Neutral Line
59Ohm Meter
60Oscilloscope
61PAL Delay Line
62Pentode
63Photo Diode
64Piezo Electric Buzzer
65Pilot Corridor Lamp
66Play Back, Record, Magnetic Head
67Positive (+Ve)
68Power Factor Meter
69Primary Tuned Transformer
70Record Player Pickup
71Recording Ammeter
72Recording Frequency Meter
73Recording Voltmeter
74Recording Wattmeter
75Saw Filter
76Self Confident Water Heater
77Shielded Wire
78Single Phase AC Current 50 Hz
79Stereo Record Player Pickup
80Tape Recorded
81Tachometer
82Tetrode
83Thermal Shut Down Circuit
84Thermocouple Meter
85Thermometer
86Thermostat
87Thyratron
88Treble Frequency
89Triode
90Triode-Pentode
91Tubular Heater
92V.D.R (Voltage Dependent Resistor)
93Vacuumed Diode
94Variable Capacitor Diode
95Variable Capacitor
96Volume Control Position
97Watt Meter
98Wave Meter
993 Phase AC Current 50 Hz
1003 Phase Line

Faraday’s law विद्युत अपघटन का प्रथम और द्वितीय नियम

२२ सितम्बर 1791 को लन्दन में जन्मे वैज्ञानिक माइकल फैराडे ने सन 1834 में विद्युत अपघटन से सम्बंधित दो नियम प्रतिपादित किये थे जिसे फैराडे का प्रथम एवं द्वितीय नियम के नाम से भी जानते है फैराडे के विद्युत अपघटन का नियम बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है जिन्हे विभिन्न प्रतियोगी और आईटीआई की परीक्षाएं के साथ साथ मैट्रिक और इंटरमीडिएट में भी इससे प्रश्न आते है

Faraday's law विद्युत अपघटन का प्रथम और द्वितीय नियम

विद्युत अपघट्य किसे कहते हैं (इलेक्ट्रोलिसिस परिभाषा)

फैराडे के नियमानुसार यदि रासायनिक विलियन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाए तो विलियन अलग-अलग अणुओ या आयनो में बट जाता है इस क्रिया को विद्युत अपघटन कहते हैं

विद्युत अपघट्य किसे कहते हैं

विद्युत अपघटन के उत्पाद

जैसा के चित्र में दो प्लेटों को एक जार में रखा हुआ दर्शाया गया है इन प्लेटों को इलेक्ट्रोड कहते हैं जिस जार में विद्युत अपघटन किया जाता है उसे वोल्टमीटर कहते हैं वोल्टमीटर कई प्रकार के होते हैं जैसे कॉपर वोल्टामीटर, रजत वोल्टामीटर एवं जल वोल्टमीटर आदि कॉपर सल्फेट के विद्युत अपघटन के लिए कॉपर वोल्टामीटर में कांच का एक बर्तन होता है जिसमें कॉपर सल्फेट का घोल विद्युत अपघटन का कार्य करता है इसमें दो प्लेटें इलेक्ट्रोड्स का कार्य करती हैं धनात्मक प्लेट एनोड तथा ऋणात्मक प्लेट कैथोड होती है इन इलेक्ट्रोड को विद्युत परिपथ से जोड़ देते हैं

फैराडे के विद्युत अपघटन का प्रथम नियम

वैद्युत अपघटन की प्रक्रिया में किसी इलेक्ट्रोड से मुक्त हुए अथवा उस पर जमे हुए पदार्थ की कुल मात्रा विद्युत अपघटन में होकर प्रवाहित आवेश की कुल मात्रा के समानुपाती होता है|

m∝q ……….(i)

यदि इस प्रकार यदि i एंपियर की विद्युत धारा से वोल्ट मीटर में L सेकंड में मुक्त हुए पदार्थ की मात्रा m किलोग्राम हो तो आवेश q = i x t

समीकरण (1) से,

m∝it

Faraday’s first law of electrolysis formula

m = z x i x t

यहाँ,

z= मुक्त हुए पदार्थ का विद्युत रासायनिक तुल्यांक

i = विद्युत धारा एंपियर में

t = समय सेकंड में

इसमें नियतांक मुक्त हुए पदार्थ को विद्युत रासायनिक तुल्यांक(Electro-chemical Equivalent) या E.C.E कहलाता है

भिन्न-भिन्न तत्वों के लिए इसका मान भी भिन्न-भिन्न होता है

यदि i = 1 एंपियर, t = 1 सेकंड हो तो

z=m

फैराडे का विद्युत अपघटन का द्वितीय नियम

यदि भिन्न-भिन्न इलेक्ट्रोलाइटओ में समान विद्युत धारा समान समय के लिए प्रवाहित की जाए, तो मुक्त पदार्थों की मात्राएं उनके रासायनिक तुल्यांकओं के समानुपाती होती है

मान लीजिए कि तो इलेक्ट्रोड में समान विद्युत धारा समान समय के लिए प्रवाहित करने पर मुक्त हुए तत्वों का द्रव्यमान m1व m2 है, यदि इन तत्वों के रासायनिक तुल्यांक क्रमशः z1 व z2 हो तो इस नियम के अनुसार

Faraday’s second law of electrolysis formula

m1/m2 = z1/z2

यहाँ,

z= मुक्त हुए पदार्थ का विद्युत रासायनिक तुल्यांक

m = मुक्त हुए तत्वों का द्रव्यमान

प्रबल तथा दुर्बल विद्युत अपघट्य की व्याख्या उदाहरण सहित

प्रबल विद्युत अपघटन क्या है

वह विद्युत अपघट्य जिनको हम जब जल मे घोलते हैं तो वहां पूरी तरह से वे ऋण आयन तथा धनायन में टूट जाते हैं इस प्रकार के अपघट्य को हम प्रबल विद्युत अपघट्य कहते हैं।

प्रबल विद्युत अपघटन के उदाहरण

  1. सोडियम क्लोराइड
  2. पोटेशियम क्लोराइड
  3. हाइड्रोजन क्लोराइड
  4. सोडियम हाइड्रॉक्साइड
  5. सोडियम क्लोराइड
  6. अमोनियम क्लोराइड
  7. सोडियम एसीटेट

दुर्बल विद्युत अपघटन क्या है

वह विद्युत अपघट्य जिसको जल में घोले जाने पर वह आंशिक रूप से या कम मात्रा में धनायन तथा ऋणायन में टूट जाता है ऐसे विद्युत अपघट्य को हम दुर्बल विद्युत अपघट्य कहते हैं

दुर्बल विद्युत अपघटन के उदाहरण

  1. अमोनियम एसीटेट
  2. अमोनियम हाइड्रोक्साइड
  3. कार्बनिक अम्ल
  4. एसिटिक अम्ल

विद्युत अपघटन के उपयोग

धातुओं को शुद्ध करने में

अशुद्ध या मिश्रित धातुओं को विद्युत अपघटन के द्वारा शुद्ध किया जाता है इस विधि में मिश्रित धातु को एनोड के रूप में तथा कैथोड को शुद्ध धातु की पतली स्ट्रिप के रूप में लिया जाता है इसमें मिश्रित धातुओं का लवण के साथ विलयन बनाया जाता है जब इस विलयन में धारा प्रवाहित की जाती है तब शुद्ध धातु कैथोड पर जमा हो जाती है तथा अशुद्ध एनोड पर जमा हो जाती है|

संधारित का निर्माण

उच्च धारिता के संधारित बनाने में बनाने हेतु इलेक्ट्रोलिसिस (विद्युत अपघटन) के द्वारा संधारित में दो प्लेटों के मध्य विद्युत परत तैयार की जाती है इस तरह के संधारित एलेक्ट्रोलाइटिक कहलाते हैं|

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Important Combination of Resistors with Numerical

प्रतिरोध श्रेणी और समानांतर का संयोजन और कक्षा 12 वीं और आईटीआई उम्मीदवार के साथ इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स में एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय मिश्रित मुख्य रूप से हम प्रतिरोध श्रेणी और समानांतर के संयोजन को जानते हैं लेकिन जहां हमें श्रृंखला संयोजन और समानांतर संयोजन के साथ-साथ मिश्रित संयोजन (श्रेणी-समानांतर संयोजन)के बारे में जानकारी मिलेगी|

प्रतिरोधों का संयोजन तीन प्रकार से होता है

  1. श्रेणी क्रम संयोजन
  2. समानांतर क्रम संयोजन
  3. श्रेणी समानांतर क्रम संयोजन

श्रेणी क्रम संयोजन (Series Combination)

श्रेणी क्रम संयोजन
श्रेणी क्रम संयोजन

यदि दो या दो से अधिक प्रतिरोधक को इस प्रकार जोड़ा जाए कि प्रत्येक प्रतिरोधक में समान धारा प्रवाहित हो तो ऐसे परिपथ को श्रेणी क्रम संयोजन परिपथ कहा जाता है|

श्रेणी क्रम संयोजन में धारा (Section in series order combination)

श्रेणी क्रम संयोजन में धारा के गुजरने का मार्ग एक ही होता है इस कारण प्रत्येक प्रतिरोध में एक समान धारा गुजरती है परिपथ की कुल धारा परिपथ के कुल प्रतिरोध के अनुसार गुजरती है व्यवहारिक रूप से सबसे अधिक प्रतिरोध वाला प्रतिरोधक परिपथ की धारा को नियंत्रित करता है अर्थात धारा I प्रत्येक प्रतिरोधक में सामान होगी या श्रेणी क्रम परिपथ की प्रत्येक शाखा में समान होगी|

Series Circuit Total Current Formula (I) = I1 = I2 = I3 ……(i)

श्रेणी क्रम संयोजन में वोल्टेज (Voltage in series combination)

जिस समय श्रेणी क्रम परिपथ में धारा गुजरती है उस समय परिपथ में वोल्टेज ड्रॉप प्रतिरोधक के मान के अनुसार होता है श्रेणी क्रम संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक में धारा समान बहती है अतः प्रत्येक प्रतिरोधक पर वोल्टेज ड्राप का योग परिपथ में दिए गए सप्लाई वोल्टेज के समान होता है

Series Circuit Total Voltage Formula (V) = V1+V2+V3 …….(ii)

श्रेणी क्रम संयोजन में प्रतिरोध (Resistance in series combination)

यदि परिपथ का कुल प्रतिरोध R हो तो ओम के नियमानुसार

V1 = IR1 ………(iii)

V2 = IR2 ………(iv)

V3 = IR3 ………(v)

V=IR (ओम के नियमानुसार) ………(vi)

अतः समीकरण (iii), (iv), व (v) के मान समीकरण (ii) में रखने पर

IR = IR1+IR2+IR3

या

Series Circuit Total Resistance Formula (R) = R1+R2+R3

समांतर क्रम संयोजन (Parallel Order Combination)

समांतर क्रम संयोजन (Parallel Order Combination)
समांतर क्रम संयोजन

विद्युत परिपथ में दो या दो से अधिक प्रतिरोधक को इस प्रकार जोड़ा जाए कि तारा के बहाने के कई मार्गो तथा प्रत्येक प्रतिरोधक के टर्मिनल वोल्टेज का मान समान हो ऐसे परिपथ को समानांतर परिपथ कहते है|

समांतर क्रम संयोजन वोल्टेज (Parallel order Combination Voltage)

समानांतर परिपथ में प्रत्येक प्रतिरोधक के टर्मिनल ऊपर प्राप्त वोल्टेज का मान समान अर्थात सप्लाई वोल्टेज बराबर होता है|

Parallel Circuit Total Voltage Formula (V) = V1=V2=V3 ………(i)

समांतर क्रम संयोजन में धारा (Current in Parallel Sequence Combination Circuit)

समानांतर परिपथ में प्रवाहित विद्युत धारा प्रत्येक शाखा या प्रतिरोधक में बढ़ती है अतः सभी शाखाओं या प्रतिरोध को से गुजरने वाली धाराओं का योग कुल धारा के बराबर होता है

Parallel Circuit Total Current Formula (I) = I1 +I2 +I3 ……(ii)

समांतर क्रम में प्रतिरोध (resistance in parallel Circuit)

समांतर क्रम संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक को सप्लाई (वोल्टेज) समान ही प्राप्त होता है अतः

ओम के नियम अनुसार,

I1= V/R1 ……..(iii)

I2= V/R2 …….(iv)

I3= V/R3 …….(v)

यदि परिपथ का कुल प्रतिरोध R हो तो,

I=V/R ……(vi)

समीकरण (iii,iv,v) तथा के मान समीकरण (ii) में रखने पर,

V/R = V/R1+V/R2+V/R3

G = 1/R = 1/R1+1/R2+1/R3 [∵कुल चालकता G = 1/R]

Parallel Circuit Total Resistance Formula (1/R) = 1/R1+1/R2+1/R3

अतः समांतर परिपथ में कुल चालकता उस परिपथ के प्रतिरोध के विपरीत अनुपात में होती है|

श्रेणी – समांतर क्रम संयोजन (Series – Parallel order combination Circuit)

series parallel order combination Circuit
श्रेणी समांतर क्रम संयोजन

विद्युत परिपथ जिसमें प्रतिरोधों का संयोजन श्रेणी क्रम हो समांतर दोनों क्रम में किया जाता है श्रेणी समांतर क्रम संयोजन कहलाता है इस परिपथ में धारा स्वयं ही दो भागों में बट जाती है भिन्न-भिन्न शाखाओं की धारा और वोल्टेज ड्राप किरचॉफ के नियम की सहायता से आसानी से ज्ञात किया जा सकता है

Ohm’s Law definition Formula in Hindi

Ohm Law full information with formula and numerical questions for ITI and 10th Class Student in Hindi

ओम के नियम का परिभाषा

सर्वप्रथम जर्मन वैज्ञानिक जॉर्ज साइमन ओम ने सन 1826 में धारा विद्युत वाहक बल एवं प्रतिरोध के संबंधों का अध्ययन कर बताया कि जब किसी विद्युत परिपथ की भौतिक अवस्था (ताप दाब इत्यादि) स्थिर रहती हैं तब परिपथ में प्रवाहित विद्युत धारा का मान परिपथ में आरोपित वोल्टेज के समानुपाती होता है|

Ohms Law

धारा वोल्टेज

या,I = V/R

यहां R एक नियतांक है|

ओम के नियम का सूत्र

Ohm’s Law Formula

V = I x R

I = V/R

R = V/I

जहां, V= विभवांतर वोल्ट में

I = धारा एंपियर में

R = प्रतिरोध ओम में

ओम के नियम का उदाहरण :-

Q1. यदि किसी परिपथ का प्रतिरोध 30 ओम है तथा वोल्टेज 240 वोल्ट है तो ओम के नियमानुसार परिपथ की धारा क्या होगी ?

Solve :- ओम के नियम अनुसार धारा वोल्टेज के समानुपाती व प्रतिरोध के वितक्रमानुपाती होता है

धारा = वोल्टेज/प्रतिरोध

240/30 = 8 Amp

तो सर्किट में 8 एंपियर की धारा प्रवाहित होगी|

इलेक्ट्रीशियन के अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

Post Office Box Method Experiment Physic in Hindi

post office box full details in Hindi with compete experiment for all physics and all competitive exam यह उपकरण पहले डाकघरों में टेलीफोन अथवा टेलीग्राम के तारों का प्रतिरोध ज्ञात करने या तार के टूट जाने की स्थिति में पता लगाने के काम आता था|

पोस्ट ऑफिस बॉक्स एक प्रतिरोध बॉक्स की भांति होता है जिसमें दो अनुपाती भुजाये AB व BC श्रेणीक्रम में जोड़े होती हैं इन भुजाओ में से प्रत्येक 10, 100 व 1000 ओम के प्रतिरोध लगे होते हैं| तीसरे ज्ञात भुजा AD में 1 ओम से 5000 ओम तक के प्रतिरोध U आकृति की पंक्ति में लगे होते हैं AC व BD भुजाओं में एक – एक कुंजी लगाने के लिए A का संबंध दाब कुंजी K1 से तथा B का संबंध दाब कुंजी K2 से होता है| जिस तार का प्रतिरोध S अथवा विशिष्ट प्रतिरोध निकालना होता है उससे अज्ञात भुजा CD में जोड़ देते हैं धारामापी G को कुंजी K2 के द्वारा B व D के बीच, तथा सेल E को कुंजी K1 के द्वारा A व C के बीच जोड़ देते हैं|

प्रयोग विधि :-

तार के प्रतिरोध S का मान निकालने के लिए अनुपाती भुजाएं AB व CD में से 10 10 ओम के प्रतिरोध प्लग निकाले जाते हैं इससे इन भुजाओं के प्रतिरोधो P व Q का अनुपात 1 : 1 हो जाता है अब ज्ञात भुजा AD में से किसी प्रतिरोध R का प्लग निकाल कर पहले सेल कुंजी K1 को तथा फिर धारामापी की कुंजी K2 को दबाते हैं इससे धारामापी में विछेप उत्पन्न होता है R का मान उत्तरोत्तर बढ़ाते हुए एक के अंतर में से दो ऐसे प्रतिरोध ज्ञात कर लेते हैं जिनके लिए पहले K1 को फिर K2 को दबाने पर धारामापी के विपरीत दिशा में विछेप उत्पन्न हो| अज्ञात प्रतिरोध S का मान, R के इन दो प्रतिरोधों के बीच होगा|

अब P का मान 100 ओम कर देते हैं तथा Q का मान 10 ओम ही रहने देते हैं जिससे कि P व Q का अनुपात 10 :1 हो जाता है AD भुजा में पुनः उत्तरोत्तर ऐसे दो प्रतिरोध ज्ञात करते हैं जिनका मान पहले दोनों प्रतिरोधों के 10 गुने के बीच में हो तथा पहले कुंजी K1 तथा फिर कुंजी K2 को दबाने पर धारामापी में विछेप विपरीत दिशा में हो इससे अज्ञात प्रतिरोध S का मान दशमलव के 1 अंक तक ज्ञात हो जाता है|

अंत में P व क् का अनुपात 100 :1 करके R का ऐसा मान ज्ञात करते हैं कि यह धारामापी में कोई विछेप ना हो| अविछेप स्थिति के लिए धारामापी का शंट हटा देते हैं इससे S का मान दशमलव के दो अंकों तक ज्ञात हो जाता है तार की लंबाई (l) मीटर पैमाने से तथा तार की त्रिज्या (r) और पेचमापी से ज्ञात करके, तार के पदार्थ के विशिष्ट प्रतिरोध (ρ) की गणना निम्न सूत्र द्वारा कर लेते हैं|

ρ = Sxπr2/l

Easy Explain of Meter Bridge Diagram with formula in Hindi

Meter Bridge full diagram with formula in Hindi for meter bridge class 12 notes and ITI Trade Theory and technical all competitive exam in this section full principle of meter bridge and how its work

किसी चालक तार का प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए व्हीटस्टोन सेतु के सिद्धांत पर आधारित मीटर सेतु एक सुग्राही यंत्र है इसके सुग्राहिता पोस्ट ऑफिस बॉक्स की अपेक्षा बहुत अधिक होती है

Meter Bridge Diagram

AC 1 मीटर लंबा मग्निन अथवा कॉन्स्टैनंट का एक तार है जो एक लकड़ी के आधार पर पैमाने के सहारे कसा हुआ है तार के अनुप्रस्थ काट सब जगह एक समान है तार के सिरे A व C, दो L के आकार में मुड़ी हुई तांबे की पत्तियों से जुड़े हैं जिनके सिरो पर सम्बन्धक पेच लगे हैं इन पत्तियों के बीच में दोनों और कुछ रिक्त स्थान छोड़कर एक तीसरी तांबे की पत्ती है जिस पर तीन सम्बन्धक पेच लगे रहते हैं बीच वाले पेच D को एक शंट युक्त धारामापी G से जोड़कर सर्पी कुंजी B से जोड़ देते हैं जिसकी नोक को तार पर खिसका कर कहीं भी स्पर्श करा सकते हैं|

Meter Bridge Diagram
a Meter Bridge set up as shown

प्रयोग विधि :-

जिस तार का प्रतिरोध (S) ज्ञात करना होता है उसे बिंदुओं C और D के बीच के रिक्त स्थान में, तथा एक प्रतिरोध बॉक्स A व D के बीच में रिक्त स्थान में लगा देते हैं A व C के बीच एक सेल, धारा नियंत्रक तथा कुंजी K सम्बन्धक पेचो के द्वारा जोड़ देते हैं प्रयोग में जब सर्पी – कुंजी, सेतु के तार AC को किसी बिंदु B पर छूती है तो तार दो भागों में बट जाता है ये दो भाग AB तथा BC व्हीटस्टोन सेतु के P तथा Q प्रतिरोधों का कार्य करते हैं |

सबसे पहले प्रतिरोध बॉक्स में से कोई प्रतिरोध R निकालते हैं तथा कुंजी K को बंद कर देते हैं अब सर्पी – कुंजी को तार के सहारे खिसका कर कर ऐसी स्थिति प्राप्त करते हैं की कुंजी को तार पर दबाने से धारामापी G में कोई विक्षेप उत्पन्न ना हो इस स्थिति में बिंदु B व D एक ही विभव पर हैं तथा बिंदु B को शुन्य -विक्षेप स्थिति (Null Deflection Point) कहते हैं तार के दोनों भागों AB व BC की लंबाईया पैमाने पर पढ़ लेते हैं|

Meter Bridge Formula

माना तार की AB लंबाई का प्रतिरोध P तथा BC लंबाई का प्रतिरोध Q है| तब व्हीटस्टोन सेतु के सिद्धांत से

P/Q = R/S …………….(i)

माना AB की लंबाई l सेंटीमीटर है तथा BC की लंबाई (100 – l)सेंटीमीटर है|

AB का प्रतिरोध, P =ρ l/a

तथा BC का प्रतिरोध, Q = ρ (100 – l)/a

जहां ρ (ओम सेंटीमीटर में) तार के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध है तथा a (सेंटीमीटर2 में) तार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है इस प्रकार

P/Q = l/100-l ……………..(ii)

P/Q का यह मान समीकरण (i) में रखने पर,

l/100-l = R/S

अथवा S=R(100-l/l)

R प्रतिरोध बॉक्स से निकाला गया प्रतिरोध है तथा l, AB की लंबाई को प्रदर्शित करता है अतः इस सूत्र से S प्रतिरोध का मान ज्ञात कर सकते हैं|

प्रतिरोध बॉक्स से भिन्न भिन्न प्रतिरोध निकालकर कई प्रेक्षण किए लिए जाते हैं तथा प्रत्येक प्रेक्षण के लिए S का मान ज्ञात करते हैं|

इसके पश्चात अज्ञात प्रतिरोध S का प्रतिरोध बॉक्स के स्थान को आपस में बदलकर प्रयोग को दोहराते हैं गणना में दोनों बार के प्रयोग से प्राप्त S के मान का माध्य ज्ञात करते हैं|

व्हीटस्टोन सेतु सिद्धांत क्या है सूत्र सहित व्याख्या in Hindi

इंग्लैंड के विज्ञानिक प्रोफेसर व्हीटस्टोन ने प्रतिरोध की एक विशेष व्यवस्था का आविष्कार किया जिसके द्वारा किसी चालक का प्रतिरोध ज्ञात किया जा सकता है इस व्यवस्था को व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) या मीटर सेतु कहते हैं|

व्हीटस्टोन सेतु सिद्धांत

व्हीटस्टोन सेतु या मीटर सेतु में चार प्रतिरोधों को श्रेणी क्रम में जोड़कर एक चतुर्भुज बनाते हैं इस चतुर्भुज के एक विकर्ण में धारामापी तथा दूसरे विकर्ण मे एक सेल जोड़ देते हैं अब यदि चतुर्भुज के चारों भुजाओं के प्रतिरोध को इस प्रकार समायोजित किया जाए कि सेल द्वारा सेतु में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर धारामापी में कोई विक्षेप ना हो तो सेल को संतुलित कहा जाता है इस स्थिति में चतुर्भुज की किन्ही दो संलग्न भुजाओं के प्रतिरोध का अनुपात शेष तो संलग्न भुजाओं में लगे प्रतिरोध के अनुपात के बराबर होता है|

मीटर सेतु का सिद्धांत क्या है सूत्र सहित व्याख्या

चित्र में चार प्रतिरोध P Q R S चतुर्भुज A B C D के चार भुजाओं के रूप में जुड़े हैं B तथा Dके बीच एक सुराही धारामापी तथा A और C के बीच में एक सेल लगा है K1 और K2 दो कुंजियां जब कुंजी K1 को दबाकर सेल से धारा i प्रवाहित की जाती है तो बिंदु A पर यह धारा दो भागों में बट जाता है एक भाग i1भुजा AB मैं दूसरा भाग i2 भुजा AD में प्रवाहित होता है प्रतिरोधों P,Q,R,S के मान इस प्रकार समायोजित किए जाते हैं कि K2 को दबाने पर धारामापी G मैं कोई भी विक्षेप ना हो स्पष्ट है कि इस दशा में विकर्ण BD में कोई धारा नहीं होगी अतः भुजा BC मैं वही धारा i1 होगी जो भुजा AB में है, तथा भुजा DC में वही धारा i2 होगी जो AD भुजा में है |

व्हीटस्टोन सेतु सिद्धांत सूत्र

कुंजी K2 दबाने पर भुजा BD में धारा नहीं होती | बंद पाश ABDA के लिए किरचॉफ का दूसरा नियम लगाने पर,

i1P-i2R = 0 ………(1)

इसी प्रकार बंद पाश BCDB के लिए,

i1Q-i2S = 0 ……….(2)

समीकरण 1 को समीकरण 2 से भाग करने पर,

i1P/i1Q = i2R/i2S

P/Q = R/S

इस सूत्र से स्पष्ट है कि यदि को प्रतिरोधो का P व Q का अनुपात तथा प्रतिरोध R का मान ज्ञात हो तो अज्ञात प्रतिरोध S की गणना की जा सकती है यही कारण है कि P तथा Q भुजाओं को ‘अनुपाती भुजाएं’ भुजा AD को ‘ज्ञात भुजा’ तथा भुजा CD को ‘अज्ञात भुजा’ कहते हैं सेतु के संतुलित होने पर धारामापी तथा सेल की स्थितियों को आपस में बदलने पर सेतु की संतुलन व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता अतः सेतु की BD तथा AC भुजाओं को संयुग्मी भुजाएं कहते हैं|

Some Important Question

व्हीटस्टोन सेतु का आविष्कार किसने किया?

इंग्लैंड के विज्ञानिक प्रोफेसर व्हीटस्टोन ने व्हीटस्टोन सेतु आविष्कार किया|

व्हीटस्टोन सेतु में कितने प्रतिरोध होते है?

व्हीटस्टोन सेतु या मीटर सेतु में चार प्रतिरोधों को श्रेणी क्रम में जोड़कर एक चतुर्भुज बनाते हैं|

Kirchhoff Laws : Current and Voltage Law

वैज्ञानिक किरचॉफ के नियम का उपयोग नेटवर्क परिपथ हो जटिल परिपथ में तुलनात्मक प्रतिरोध ज्ञात करने के हेतु किया जाता है इसके नियमों की सहायता से जटिल बंद परिपथ में अलग-अलग शाखाओं का प्रतिरोध एवं धारा का मान ज्ञात किया जा सकता है कृपया अपने 2 नियम प्रतिपादित किए जो निम्न प्रकार है|

  1. बिंदु नियम या धारा नियम
  2. मैश नियम या वोल्टेज नियम

किरचॉफ का प्रथम नियम (बिंदु या धारा नियम)

किरचॉफ का प्रथम नियम (बिंदु या धारा नियम)
किरचॉफ का प्रथम नियम (बिंदु या धारा नियम)

इस नियम के अनुसार परिपथ में संधि बिंदु पर आने वाली धाराओं वह उस बिंदु से जाने वाली धाराओं का बीजगणित योग्य शून्य के बराबर होता है अर्थात संधि बिंदु पर आने वाली धाराओं का योग संधि बिंदु पर से जाने वाली धाराओं की योग के बराबर होता है चित्रानुसार संधि बिंदु वह पर आने और जाने वाली धाराएं

I1+I4+I5+(-I2)+(-I3)+(I6) = 0

I1+I4+I5-I2+I3+I6 = 0

I1+I4+I5 = I2+I3+I6

आने वाले धाराओं का योग = जाने वाली धाराओं का योग

किरचॉफ का द्वितीय नियम (मैश नियम या वोल्टेज नियम)

किरचॉफ का द्वितीय नियम (मैश नियम या वोल्टेज नियम)
किरचॉफ का द्वितीय नियम (मैश नियम या वोल्टेज नियम)

किरचॉफ के द्वितीय नियम या मेस नियम के अनुसार यदि किसी बंद परिपथ में पृथक पृथक शाखाओं में होने वाले वोल्टेज ड्राप का बीजगणित के योग्य शुन्य होता है|

R1I1+R2I2+R3I3 = 0

  1. समीकरण तैयार करते समय यदि धारा की दिशा में बढ़ रहा हैं तो -ve चिन्ह ने एवं धारा के विपरीत दिशा में बढ़ रहे हैं तो +ve जिन लगाना चाहिए |
  2. वोल्टेज बढ़ रहा हो तो +ve चिन्ह व वोल्टेज में कमी को -ve चिन्ह द्वारा प्रदर्शित किया जाता है|
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